उमा भारती का राजनीतिक विस्फोटक बयान…जानें आखिर व्यापम घोटाले में नाम आने पर इतने दिन बाद क्यों दी तीखी प्रतिक्रिया….शिवराज और पटवा शासन पर अप्रत्यक्ष निशाना क्यों साधा
भारतीय जनता पार्टी की फायरब्रांड नेता और मध्य प्रदेश की पूर्व मुख्यमंत्री उमा भारती ने एक बार फिर राज्य की राजनीति में भूचाल ला दिया है। शुक्रवार को भोपाल में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान उन्होंने व्यापम घोटाले को लेकर कई गंभीर सवाल उठाए और शिवराज सिंह चौहान और सुंदरलाल पटवा का नाम लिये बगैर उनके शासनकाल में अपने और अपने परिवार के साथ हुई कथित प्रताड़ना का भी जिक्र किया।
हालांकि उमा भारती ने किसी का नाम स्पष्ट रूप से नहीं लिया, लेकिन उनके बयान इस ओर स्पष्ट संकेत देते हैं कि वे भाजपा के भीतर ही कुछ बड़े नेताओं से नाराज हैं, जिनके कारण उनके परिवार को राजनीतिक और सामाजिक रूप से नुकसान झेलना पड़ा।
व्यापम घोटाले पर उमा भारती का तीखा सवाल
मध्य प्रदेश के सबसे चर्चित और बदनाम व्यापम घोटाले (Vyapam Scam) में उमा भारती का नाम आने को लेकर उन्होंने गहरा आक्रोश जताया। उन्होंने कहा उन्हें ये समझ नहीं आया कि उनका नाम व्यापम घोटाले में क्यों और कैसे आया। ऐसा लगा जैसे उन्होंने शुभांशु शुक्ला की जगह ले ली और अंतरिक्ष में पहुंच गई। क्या उनके नाम का इस्तेमाल किसी और को बचाने के लिए किया गया था?”
उमा भारती ने सीबीआई जांच की मांग करते हुए कहा कि जब ATS और CBI जैसी एजेंसियों पर उन्हें भरोसा है, तो मध्य प्रदेश क्राइम ब्रांच पर भरोसा क्यों नहीं किया जा सकता? उनके अनुसार, इस पूरे घोटाले में कई निर्दोषों की ज़िंदगियां बर्बाद हुई हैं और सच्चाई सामने लाना जरूरी है।
मेरे परिवार ने मेरी राजनीति की कीमत चुकाई”
अपने राजनीतिक जीवन की गहराई में उतरते हुए उमा भारती ने कहा कि मेरे भाइयों और उनके बच्चों ने सिर्फ इसलिए प्रगति नहीं की क्योंकि वे मुझसे जुड़े हुए थे। राजनीति में मेरे विरोधियों ने उन्हें टारगेट किया। यह सिर्फ कांग्रेस की ही नहीं, बल्कि हमारी ही सरकारों की भी जिम्मेदारी है। उन्होंने यह भी कहा कि उनके भतीजे राहुल को टिकट देना पार्टी की मजबूरी थी, न कि कोई एहसान। उनके अनुसार, उनके परिवार को जनसंघ के जमाने से भाजपा के लिए बलिदान देना पड़ा है।
ऐतिहासिक पीड़ा का बयान
पूर्व केन्द्रीय मंत्री उमा भारती ने अपने बयान में वर्ष 1990 से लेकर 1992 तक के उन वर्षों को याद किया जब उनके भाइयों पर झूठे मुकदमे लगाए गए। जिनमें डकैती और लूट के साथ ही हत्या जैसे संगीन आरोप भी शामिल थे। उमा भारती ने बताया कि उनके भाई पर न केवल कांग्रेस की दिग्विजय सिंह सरकार के दौरान हत्या का मामला दर्ज हुआ। इसके बाद बीजेपी के शासन में भी 2013 में व्यापमं प्रकरण आया, लेकिन उनके परिवार का उत्पीड़न तब भी नहीं रुका। उमा भारती ने इस पूरे दौर को अपने जीवन की सबसे कठिन मानसिक परिस्थितियों में से एक करार दिया है।
मध्य प्रदेश में भ्रष्टाचार और सामंतवाद पर हमला
उमा भारती ने कहा कि टीकमगढ़, निवाड़ी, और पन्ना जैसे जिलों में आज भी सामंती व्यवस्था चल रही है, और इसका खामियाजा आम जनता के साथ-साथ उनके परिवार को भी भुगतना पड़ा है। “भाजपा के शासन में भी गांवों में लोकतंत्र नहीं, सामंतवाद चलता है। भ्रष्टाचार बढ़ा है। अधिकारी बेलगाम हो गए हैं।
“राजनीति नहीं छोड़ूंगी, भाजपा नहीं छोड़ूंगी”
इस दौरान बढ़ती अटकलों के बीच उन्होंने स्पष्ट कर दिया कि वे न तो राजनीति से संन्यास लेंगी और न ही भाजपा छोड़ेंगी। उन्होंने कहा वे अभी 75 साल का नहीं हुई हैं। उन्हें अभी 15 से 20 साल और राजनीति करनी है। ज़रूरत पड़ी तो वे चुनाव भी लड़ेंगी। अटल जी और आडवाणी जी के साथ मैंने काम किया है। उन्हें भाजपा से कोई अलग नहीं कर सकता।
गौरक्षा, गंगा और शराबबंदी पर संकल्प
उमा भारती ने यह भी स्पष्ट किया कि उनकी राजनीति सिर्फ सत्ता पाने के लिए नहीं है, बल्कि गंगा, गौ और नारी कल्याण जैसे मुद्दों को लेकर है। उन्होंने कहा कि अक्टूबर तक उनका पूरा ध्यान गंगा पुनरुद्धार, गौसंरक्षण, और शराबबंदी पर रहेगा। “गंगा और गायों के लिए अदालतें चलती रहेंगी। मध्य प्रदेश में शराबबंदी लागू होनी चाहिए। गाय सिर्फ आस्था नहीं, ग्रामीण अर्थव्यवस्था का हिस्सा होनी चाहिए।”
नौकरशाही में पारदर्शिता की मांग
पूर्व सीएम उमा भारती ने नौकरशाही पर भी सीधा हमला बोला और कहा कि राज्य में नौकरशाहों की जवाबदेही तय नहीं होती। उन्होंने जोर देते हुए कहा “जब तक नौकरशाही पर नियंत्रण नहीं होगा, भ्रष्टाचार नहीं रुकेगा। शिक्षक, वकील, नेता कभी रिटायर नहीं होते, मैं भी नहीं होने वाली।
उमा भारती का यह बयान न सिर्फ मध्य प्रदेश की राजनीति को झकझोरने वाला है, बल्कि भाजपा के भीतर एक नए विमर्श की शुरुआत भी कर सकता है। एक तरफ उन्होंने व्यापमं घोटाले में निष्पक्ष जांच की मांग की, वहीं दूसरी ओर अपने राजनीतिक और वैचारिक संकल्प को दोहराते हुए साफ किया कि वह भाजपा छोड़ने वाली नहीं हैं। उनके इस प्रेस कॉन्फ्रेंस ने यह जता दिया है कि उमा भारती अब भी राजनीतिक रूप से सक्रिय हैं और आने वाले विधानसभा चुनाव या 2029 के लोकसभा चुनाव में वह एक निर्णायक भूमिका निभा सकती.. हैं। भाजपा नेतृत्व के लिए यह एक स्पष्ट संदेश है कि पार्टी के भीतर पुराने नेताओं की उपेक्षा अब राजनीतिक असंतोष को जन्म दे रही है, जिसका असर आने वाले चुनावों में दिख सकता है। ,,,(प्रकाश कुमार पांडेय)





