मध्य प्रदेश के उज्जैन में 8 साल की बच्ची इच्छा रघुवंशी को पुलिस विभाग में बाल आरक्षक के रूप में नौकरी दी गई है। यह नियुक्ति उसके पिता, स्व. देवेंद्र सिंह रघुवंशी, जो थाना महाकाल में प्रधान आरक्षक थे, की अचानक मृत्यु के बाद की गई। पुलिस अधीक्षक (SP) प्रदीप शर्मा ने महज 25 मिनट में बच्ची का आवेदन स्वीकार कर ज्वाइनिंग लेटर सौंपा। इस कदम से न केवल परिवार को आर्थिक सहारा मिलेगा, बल्कि इच्छा को पुलिस विभाग की प्रक्रियाओं और अनुशासन की समझ भी मिलेगी।
बाल आरक्षक बनने का कारण
इच्छा रघुवंशी की नियुक्ति पिता की असमय मृत्यु के बाद परिवार की आर्थिक मदद और भरण-पोषण सुनिश्चित करने के लिए की गई है। इस प्रक्रिया के तहत नाबालिग बच्चों को विभाग के छोटे-मोटे कार्यों में लगाया जाता है और उन्हें पुलिस अनुशासन और प्रक्रिया का प्रशिक्षण भी दिया जाता है। बाल आरक्षक 18 साल की उम्र तक पढ़ाई के साथ-साथ विभागीय जिम्मेदारियों को निभाते हैं।
नौकरी की शर्तें और वेतन
पुलिस नियमों के अनुसार बाल आरक्षक को उनके आधे वेतन के हिसाब से भुगतान किया जाता है। इच्छा को मासिक 15,113 रुपए वेतन मिलेगा। साथ ही महीने में एक बार थाने जाकर साइन करना होगा और पढ़ाई की स्थिति रिपोर्ट करनी होगी। जब इच्छा 18 साल की हो जाएगी और 10वीं पास कर लेगी, तब वह स्थायी आरक्षक बन जाएगी। इस दौरान पिता की पेंशन परिवार को जारी रहेगी।
उज्जैन के एसपी प्रदीप शर्मा ने बताया कि बाल आरक्षकों के मामलों को प्राथमिकता से हल किया जाता है। उनका उद्देश्य बच्चों के परिवारों को आर्थिक संकट से तुरंत राहत देना है। इच्छा रघुवंशी की नियुक्ति इसी नीति का उदाहरण है। इससे पहले भी ऐसे बाल आरक्षकों को मौका दिया गया है।
शिक्षा और जिम्मेदारी का संतुलन
इच्छा वर्तमान में चौथी कक्षा की छात्रा है और पढ़ाई जारी रखेगी। बाल आरक्षक बनने से उसे पुलिस विभाग का अनुभव मिलेगा और भविष्य में स्थायी आरक्षक बनने का मार्ग साफ होगा। इस योजना से परिवार को आर्थिक सुरक्षा और बच्ची को प्रशिक्षण दोनों ही मिलते हैं।





