अखिलेश यादव तुष्टीकरण का राजनीति करतें है इसलिए यूनिफार्म सिविल कोड का विरोध करते हैं। ये कहना है मध्यप्रदेश के गृहमंत्री नरोत्तम मिश्रा का। नरोत्तम मिश्रा ने आज भोपाल मे पत्रकारों से बात करते हुए अखिलेश यादव पर निशाना साधा ।
क्या कहा अखिलेश यादव ने
समाजवादी पार्टी यूनिफार्म सिविल कोड का लगातार विरोध कर रही है। बिल राज्यसभा में पेश होने के बाद तो समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष और पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने ही मोर्चा सम्हाल लिया। अखिलेश यादव ने UCC का विरोध किया और बीजेपी पर जमकर निशाना साधा। अखिलेश यादव ने UCC को बिल नहीं “बीजेपी का ध्रुवीकरण का मसौदा बताया।“ अखिलेश यादव ने कहा कि यूनिफार्म सिविल कोड से “समाज में खाई पैदा होगी।“
कई राज्य हैं UCC के पक्ष में
UCC को लेकर राजनैतिक दलों में आरोप प्रत्यारोप जारी है। लेकिन इस बीच कई सारे राज्यों ने UCC को समर्थन किया है। समर्थन करने वाले राज्यों में उत्तरप्रदेश, उत्तराखंड, मध्यप्रदेश, गुजरात राज्य शामिल हैं। इन राज्यों के मुख्यमंत्री UCC के पक्ष में लगातार बयान दे रहे हैं।
UCC बिल राज्यसभा में 9 तारीख को पेश हुआ
UCC बिल को किरोड़ीलाल मीणा ने इस बिल को राज्यसभा में पेश किया है। बिल 9 दिसंबर को राज्यसभा में प्राइवेट मेंबर बिल के तौर पर पेश किया गया। बिल के पेश होते ही विपक्ष ने बहुत हंगामा किया। उसी समय से तय हो चुका था कि बिल पास करने को लेकर विपक्षी दल जल्दी एकमत नहीं होगें।
क्या है यूनिफार्म सिविल कोड
यूनिफार्म सिविल कोड मतलब की पूरे देश में सभी धर्मों के नागरिकों के लिए समान कोड बनाना। इस कोड का उल्लेख संविधान में भी है । इस बिल के पास होने के बाद सभी धर्मों के लिए समान कोड होगा और मुस्लिम पर्सनल लॉ की वैधानिकता खत्म हो जाएगी।
बीजेपी बना सकती है मुद्दा
2023 में चार राज्यों में विधानसभा चुनाव है। इनमें कर्नाटक, मध्यप्रदेश, छत्तीसगढ़ और राजस्थान शामिल हैं । ऐसे में इन राज्यों में बीजेपी UCC को मुद्दा बना सकती है। अगर विपक्ष बिल पास नहीं होने देता है तो भी बीजेपी इसे मुद्दे के तौर पर जनता के बीच ले जा सकती और विपक्ष पर तुष्टीकरण का आरोप लगा सकती है। अगर केंद्र सरकार इस बिल को पास कर कानून बना लेती है तो भी बीजेपी जनता के बीच ये कह सकेगी कि सकी नज़रों में सभी नागरिक एक समान है। दऱअसल दोनों ही सूरत में बीजेपी UCC के मुद्दे को कैश करा सकती है।