मिडिल ईस्ट संकट के बीच भारत को राहत: 93 हजार मीट्रिक टन एलपीजी लेकर दो जहाज़ होर्मुज़ जलडमरूमध्य पार
पश्चिम एशिया में जारी तनाव और युद्ध जैसी स्थिति के बीच भारत के लिए राहत भरी खबर सामने आई है। अमेरिका और इज़राइल द्वारा ईरान पर किए गए हमलों के बाद पूरे मिडिल ईस्ट में तनाव बढ़ गया है और समुद्री मार्गों की सुरक्षा को लेकर भी चिंता पैदा हो गई है। इसी बीच भारत के दो महत्वपूर्ण जहाज़ सुरक्षित रूप से होर्मुज़ जलडमरूमध्य को पार कर भारत की ओर बढ़ रहे हैं। इन जहाज़ों में बड़ी मात्रा में रसोई गैस यानी एलपीजी भरी हुई है, जो देश की ऊर्जा जरूरतों के लिए अहम मानी जा रही है।
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने अंतर-मंत्रालयीय प्रेस ब्रीफिंग में यह जानकारी दी। उन्होंने बताया कि भारत आने वाले कुछ जहाज़ होर्मुज़ जलडमरूमध्य से गुजरने में सफल रहे हैं। इनमें भारतीय जहाज़ INS Shivalik और Nanda Devi शामिल हैं, जो इस संवेदनशील समुद्री मार्ग को पार कर चुके हैं और अब भारतीय बंदरगाहों की ओर बढ़ रहे हैं।
जहाज़ों में 93 हजार मीट्रिक टन एलपीजी
विदेश मंत्रालय के अनुसार इन दोनों जहाज़ों में बड़ी मात्रा में एलपीजी लदी हुई है। प्रत्येक जहाज़ में लगभग 46 हजार मीट्रिक टन से अधिक गैस भरी है। इस तरह दोनों जहाज़ मिलाकर करीब 93 हजार मीट्रिक टन एलपीजी भारत ला रहे हैं। मौजूदा हालात में यह आपूर्ति बेहद महत्वपूर्ण मानी जा रही है, क्योंकि पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव से तेल और गैस की सप्लाई प्रभावित होने की आशंका है।इस जानकारी को साझा करने के लिए विदेश मंत्रालय, पेट्रोलियम मंत्रालय और शिपिंग मंत्रालय के अधिकारियों की संयुक्त प्रेस वार्ता आयोजित की गई थी। अधिकारियों ने बताया कि भारत सरकार लगातार स्थिति पर नजर रखे हुए है और ऊर्जा आपूर्ति को सुरक्षित रखने के लिए कई स्तरों पर प्रयास किए जा रहे हैं।
संघर्ष में भारतीयों की मौत
विदेश मंत्रालय के अतिरिक्त सचिव (गल्फ) असीम महाजन ने बताया कि पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष का असर भारतीय नागरिकों पर भी पड़ा है। अब तक इस संकट में पांच भारतीयों की मौत हो चुकी है, जबकि एक भारतीय घायल हुआ है। एक अन्य भारतीय नागरिक अभी लापता बताया जा रहा है। उन्होंने बताया कि ओमान, इराक, संयुक्त अरब अमीरात और बहरीन में मौजूद भारतीय दूतावास लगातार स्थानीय प्रशासन के संपर्क में हैं। मिशन का उद्देश्य लापता व्यक्ति की तलाश करना और मृतकों के पार्थिव शरीर को उनके परिवारों तक पहुंचाना है। भारतीय मिशन चौबीसों घंटे हालात की निगरानी कर रहा है।
खाड़ी क्षेत्र में भारतीय जहाज़ों की स्थिति
शिपिंग मंत्रालय के विशेष सचिव Rajesh Kumar Sinha ने बताया कि मौजूदा समय में भारतीय झंडा लगे कुल 22 जहाज़ फारस की खाड़ी क्षेत्र में मौजूद हैं। इनमें विभिन्न प्रकार के जहाज़ शामिल हैं जो अलग-अलग तरह का माल लेकर चल रहे हैं। इनमें 6 एलपीजी टैंकर, एक एलएनजी टैंकर, चार कच्चे तेल के टैंकर, एक केमिकल उत्पाद लेकर चलने वाला जहाज़, तीन कंटेनर जहाज़, दो बल्क कैरियर और एक ड्रेजर शामिल है। इसके अलावा एक जहाज़ खाली बैलास्ट की स्थिति में है, यानी उसमें कोई माल नहीं है। वहीं तीन जहाज़ ड्राई डॉक में हैं जहां उनकी मरम्मत का काम चल रहा है। सरकार इन सभी जहाज़ों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए संबंधित देशों के साथ लगातार संपर्क में है ताकि समुद्री मार्गों से ऊर्जा आपूर्ति बाधित न हो।
सरकार ने जारी किए नए आदेश
देश में एलपीजी की संभावित कमी से निपटने के लिए केंद्र सरकार ने एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है। सरकार ने Essential Commodities Act 1955 के प्रावधानों का उपयोग करते हुए नया आदेश जारी किया है। इस आदेश के अनुसार जिन उपभोक्ताओं के पास पाइपलाइन गैस यानी पीएनजी और एलपीजी दोनों कनेक्शन हैं, उन्हें एलपीजी कनेक्शन छोड़ना होगा। ऐसे उपभोक्ता अब घरेलू एलपीजी सिलेंडर की रीफिल नहीं करा सकेंगे। सरकार ने निर्देश दिया है कि जिन क्षेत्रों में पाइप्ड गैस उपलब्ध है, वहां एलपीजी कनेक्शन रखने की अनुमति नहीं होगी। सरकार का मानना है कि इससे एलपीजी की उपलब्धता उन इलाकों में बढ़ाई जा सकेगी जहां पाइपलाइन गैस की सुविधा नहीं है।
तेल और गैस के भंडार पर सरकार की सफाई
पेट्रोलियम मंत्रालय की संयुक्त सचिव Sujata Sharma ने कहा कि भारत के पास फिलहाल कच्चे तेल और पेट्रोलियम उत्पादों का पर्याप्त भंडार मौजूद है। देश की रिफाइनरियां पूरी क्षमता के साथ काम कर रही हैं और पेट्रोल तथा डीजल की कोई कमी नहीं है। उन्होंने बताया कि खुदरा पेट्रोल पंपों पर कहीं भी ईंधन खत्म होने की स्थिति नहीं है। भारत अपनी जरूरत के अनुसार पेट्रोल और डीजल का उत्पादन कर रहा है, इसलिए इन उत्पादों के लिए आयात पर निर्भरता कम है।
गैस की बुकिंग में घबराहट
हालांकि एलपीजी को लेकर लोगों में चिंता दिखाई दे रही है। सुजाता शर्मा ने बताया कि हाल के दिनों में गैस सिलेंडर की बुकिंग अचानक तेजी से बढ़ी है। एक दिन में करीब 75 लाख बुकिंग हुई थीं जो अगले ही दिन बढ़कर 88 लाख तक पहुंच गईं। उन्होंने कहा कि यह “पैनिक बुकिंग” का परिणाम है। सरकार ने लोगों से अपील की है कि वे घबराकर सिलेंडर बुक न करें और जरूरत होने पर ही गैस की बुकिंग कराएं। इससे सभी उपभोक्ताओं तक गैस की आपूर्ति बेहतर तरीके से सुनिश्चित की जा सकेगी।
ऊर्जा सुरक्षा पर बढ़ी चिंता
विशेषज्ञों का मानना है कि पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष का असर वैश्विक ऊर्जा बाजार पर पड़ सकता है। खासकर होर्मुज़ जलडमरूमध्य जैसे संवेदनशील समुद्री मार्ग से होकर दुनिया की बड़ी मात्रा में तेल और गैस की आपूर्ति होती है। ऐसे में भारत जैसे बड़े ऊर्जा आयातक देशों के लिए स्थिति चुनौतीपूर्ण बन सकती है। फिलहाल भारत सरकार ऊर्जा आपूर्ति को सुरक्षित बनाए रखने और संभावित संकट से निपटने के लिए कूटनीतिक, रणनीतिक और प्रशासनिक स्तर पर कई कदम उठा रही है।





