भारत-अमेरिका ट्रेड डील से पहले ट्रंप का सख्त रुख, 2 से 7 अरब डॉलर तक घट सकता है भारत का वार्षिक निर्यात कुछ सेक्टर्स को मिल सकती है राहत

ट्रेड डील से पहले भारत को लेकर ट्रंप का सख्त रुख,.. ट्रंप के इस कदम से घट सकता है भारत का वार्षिक निर्यात

अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अब भारत के खिलाफ भी एक सख्त आर्थिक कदम उठाने के संकेत दिये है। ट्रंप कहा है कि भारत से आयातित वस्तुओं पर अमेरिका में 20 से 25 फीसदी तक टैरिफ (आयात शुल्क) लगाने पर विचार कर सकता है। ट्रंप का यह बयान ऐसे समय आया है जब भारत और अमेरिका दोनों ही देशों के बीच ट्रेड डील को लेकर छठवें दौर की बातचीत होने जा रही है। अगर ट्रंप का यह टैरिफ लागू होता है, तो इसका सीधा सीधा असर भारत के कई प्रमुख निर्यात क्षेत्रों पर पड़ सकता है। जिनमें वस्त्र, जूते, ज्वेलरी, मोबाइल और इलेक्ट्रॉनिक्स जैसी प्रमुख इंडस्ट्री शामिल हैं।

टेक्सटाइल और गारमेंट इंडस्ट्री सबसे ज्यादा प्रभावित

भारत, अमेरिका को कपड़ा और फुटवियर का सबसे बड़ा निर्यातक देश है। अमेरिकी खुदरा बाजारों में भारतीय कपड़ों और जूतों की मांग काफी अधिक है। लेकिन अगर इन पर 20 से 25 फीसदी का टैरिफ लागू किया गया तो इनकी कीमतें अमेरिका में काफी बढ़ जाएंगी। इससे न सिर्फ डिमांड में गिरावट आएगी, बल्कि भारत से अमेरिका को होने वाला शिपमेंट और व्यापार भी प्रभावित हो सकता है।

खतरे में इलेक्ट्रॉनिक्स और मोबाइल एक्सपोर्ट भी

भारत अमेरिका को हर साल करीब 14 अरब डॉलर के मोबाइल, टेलीकॉम प्रोडक्ट्स और इलेक्ट्रॉनिक्स सामान एक्सपोर्ट करता है। टैरिफ लागू होने पर इन उत्पादों की कीमत अमेरिका में बढ़ेगी, जिससे उपभोक्ताओं की खरीदारी घट सकती है। इसका सीधा असर भारत के निर्यात पर पड़ेगा, जो धीरे-धीरे अन्य प्रतिस्पर्धी देशों की तरफ मुड़ सकता है।

रसायन और केमिकल उद्योग पर भी असर

केमिकल और इंडस्ट्रियल रॉ मटेरियल जैसे सेगमेंट भी इस टैरिफ नीति की चपेट में आ सकते हैं। हालांकि अभी इस पर स्पष्ट स्थिति नहीं है, लेकिन विशेषज्ञों का मानना है कि टैरिफ लगने की स्थिति में इनका एक्सपोर्ट भी घट सकता है।

किन सेक्टर्स को मिल सकती है राहत?

 

कुछ सेक्टर्स ऐसे भी हैं जिन्हें अमेरिका टैरिफ से मुक्त रख सकता है। इनमें फार्मास्यूटिकल्स, सेमीकंडक्टर्स, ऊर्जा उत्पाद (तेल, गैस, कोयला, एलएनजी) और कॉपर जैसे उत्पाद शामिल हैं। ये सभी अमेरिका की आवश्यकताओं के लिए अहम हैं और इनकी सप्लाई बाधित होना अमेरिका के लिए भी नुकसानदायक हो सकता है

 

किन सेक्‍टर्स को टैरिफ से छूट?

 

अगर टैरिफ लागू होता है तो भारत के कुछ ऐसे सेक्‍टर्स हैं, जिन्‍हें अमेरिका टैरिफ से दूर रखेगा. इसमें फार्मास्यूटिकल्स (दवाएं), सेमीकंडक्टर, ऊर्जा उत्पाद (तेल, गैस, कोयला, LNG) और कॉपर आदि शामिल हैं. क्‍योंकि ये चीजें अमेरिका के लिए ज्‍यादा जरूरी हैं, जिस कारण इनपर कभी भी टैरिफ लगाना नहीं चाहेगा।

भारत क्या करेगा?

1. टैरिफ को चुनौती देगा

भारत इस टैरिफ को व्यापार के नियमों के खिलाफ मानते हुए World Trade Organization (WTO) में भी आपत्ति दर्ज कर सकता है। WTO का मकसद ही यह है कि कोई भी देश एकतरफा फैसले लेकर दूसरे देशों को नुकसान न पहुंचाए।

2. वार्ता के जरिए समाधान

भारत और अमेरिका के बीच जो ट्रेड डील की बातचीत चल रही है, उसमें भारत ट्रंप प्रशासन को मनाने की कोशिश करेगा कि इन टैरिफ्स से अमेरिका के उपभोक्ताओं को भी नुकसान होगा, क्योंकि भारतीय वस्तुएं महंगी हो जाएंगी।

3. बदले में छूट और सुविधा की पेशकश

भारत सेवाओं के क्षेत्र में, जैसे कि IT और फार्मा, कुछ रियायतें देकर अमेरिका को संतुष्ट कर सकता है, ताकि टेक्सटाइल, ज्वेलरी, मोबाइलऔर ऑटो सेक्टर पर भारी टैरिफ न लगे।  ( प्रकाश कुमार पाण्डेय)

 

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