Trump Tariff Warning: ईरान कार्ड से फिर हिला वैश्विक व्यापार…ट्रेड वॉर की आहट

TRADE WAR 2026

Trump Tariff Warning: ईरान कार्ड से फिर हिला वैश्विक व्यापार

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक बार फिर पूरी दुनिया के लिए टैरिफ अलर्ट जारी कर दिया है। रूस के बाद अब ईरान को लेकर अमेरिकी राष्ट्रपति ने ऐसा बयान दिया है, जिसने वैश्विक व्यापार जगत में नई हलचल पैदा कर दी है। ट्रंप ने साफ कहा है कि ईरान के साथ कारोबार करने वाले किसी भी देश पर अमेरिका 25 फीसदी टैरिफ लगाएगा। इस चेतावनी के बाद सबसे बड़ा सवाल यही उठ रहा है कि क्या भारत पर पहले से लागू 50 फीसदी टैरिफ अब बढ़कर 75 फीसदी तक पहुंच सकता है?

ट्रंप का नया टैरिफ बम

डोनाल्ड ट्रंप ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘ट्रुथ सोशल’ पर पोस्ट कर यह ऐलान किया कि अमेरिका अब ईरान के साथ व्यापार करने वाले किसी भी देश को बख्शने वाला नहीं है। उन्होंने कहा कि जो भी देश इस्लामिक रिपब्लिक ऑफ ईरान के साथ बिजनेस करेगा, उसे अमेरिका के साथ अपने सभी व्यापार पर तत्काल प्रभाव से 25 फीसदी अतिरिक्त टैरिफ देना होगा। ट्रंप के शब्दों में यह आदेश “फाइनल” है, यानी इसमें किसी तरह की छूट या बातचीत की गुंजाइश नहीं छोड़ी गई है।

तुरंत लागू होगा नया आदेश

अमेरिकी राष्ट्रपति का यह बयान सिर्फ चेतावनी भर नहीं माना जा रहा, बल्कि इसे तत्काल लागू होने वाला फैसला बताया जा रहा है। ठीक इसी तरह रूस के मामले में भी पहले चेतावनी दी गई और फिर 25 फीसदी एक्स्ट्रा टैरिफ लागू कर दिया गया था। अब ईरान को लेकर भी वही रणनीति अपनाई जा रही है। इससे यह संकेत मिल रहे हैं कि अमेरिका प्रतिबंधों के जरिए ईरान पर आर्थिक दबाव और बढ़ाना चाहता है।

भारत पर बढ़ेगा टैरिफ खतरा

भारत पहले से ही अमेरिकी टैरिफ के दबाव में है। रूसी तेल और हथियारों की खरीद को लेकर अमेरिका ने भारत पर पहले 25 फीसदी और फिर उसे बढ़ाकर 50 फीसदी टैरिफ लगा दिया। अब ईरान को लेकर ट्रंप की नई धमकी के बाद आशंका जताई जा रही है कि भारत पर कुल अमेरिकी टैरिफ 75 फीसदी तक पहुंच सकता है। हालांकि भारत ने 2019 के बाद से ईरान से कच्चे तेल का आयात बंद कर दिया है, लेकिन व्यापार पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है।

ईरान से भारत का व्यापार

तेल आयात बंद होने के बावजूद भारत और ईरान के बीच कई अन्य क्षेत्रों में व्यापार जारी है। भारत, ईरान को चावल, चाय, चीनी, दवाइयां, कृत्रिम फाइबर, इलेक्ट्रिक मशीनरी और आर्टिफिशियल ज्वेलरी जैसे उत्पाद निर्यात करता है। वहीं ईरान से भारत सूखे मेवे, कांच के बर्तन और रासायनिक उत्पाद आयात करता है। इसी व्यापार को लेकर भारत पर अमेरिकी टैरिफ का खतरा मंडरा रहा है।

आंकड़ों में भारत-ईरान कारोबार

वाणिज्य विभाग के आंकड़ों के मुताबिक वित्त वर्ष 2024-25 में भारत और ईरान के बीच द्विपक्षीय व्यापार करीब 1.68 अरब डॉलर रहा। इसमें भारत ने 1.24 अरब डॉलर का निर्यात किया, जबकि 0.44 अरब डॉलर का आयात किया गया। इस तरह भारत को लगभग 0.80 अरब डॉलर का ट्रेड सरप्लस मिला। अगर अमेरिकी दबाव बढ़ता है तो इस व्यापार पर सीधा असर पड़ सकता है।

चाबहार और INSTC पर असर

अगर हालात बिगड़ते हैं तो भारत के लिए रणनीतिक रूप से अहम चाबहार बंदरगाह परियोजना पर भी असर पड़ सकता है। इसके अलावा इंटरनेशनल नॉर्थ-साउथ ट्रांसपोर्ट कॉरिडोर (INSTC) के जरिए होने वाली माल ढुलाई भी बाधित हो सकती है। यह कॉरिडोर भारत, ईरान और रूस के बीच व्यापार का एक अहम रास्ता माना जाता है, जिस पर अमेरिकी टैरिफ का दबाव नई चुनौतियां खड़ी कर सकता है।

ट्रेड वॉर की आहट तेज

ईरान की अर्थव्यवस्था मुख्य रूप से तेल और गैस पर निर्भर है। अमेरिकी प्रतिबंधों के बावजूद ईरान का सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार चीन बना हुआ है, जहां उसके कुल तेल निर्यात का 70 से 80 फीसदी तक जाता है। इसके अलावा रूस, तुर्की, इराक और अफगानिस्तान जैसे देशों के साथ भी ईरान का व्यापार जारी है। अगर अमेरिका इन देशों पर भी 25 फीसदी टैरिफ लागू करता है, तो दुनिया की दो सबसे बड़ी अर्थव्यवस्थाओं—अमेरिका और चीन—के बीच तनाव और बढ़ सकता है। यही वजह है कि ट्रंप का यह ऐलान सिर्फ एक देश नहीं, बल्कि पूरी वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए ट्रेड वॉर की नई आहट माना जा रहा है।

Exit mobile version