वॉशिंगटन। अमेरिका की राजनीति एक बार फिर उबाल पर है। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के एक सोशल मीडिया पोस्ट ने देश में बड़ा सियासी विवाद खड़ा कर दिया है। ईस्टर के मौके पर ईरान को लेकर की गई उनकी आक्रामक और अभद्र टिप्पणी ने न केवल विपक्ष को हमलावर बना दिया है, बल्कि उनकी अपनी पार्टी के भीतर भी असहजता पैदा कर दी है। इस विवाद ने एक अहम संवैधानिक सवाल को फिर चर्चा में ला दिया है—अगर राष्ट्रपति का व्यवहार अस्थिर या गैर-जिम्मेदाराना लगे, तो क्या उन्हें पद से हटाया जा सकता है?
ट्रंप के बयान से सियासी तूफान
क्या 25वें संशोधन से हटाए जा सकते हैं राष्ट्रपति?
ईरान पर अभद्र टिप्पणी के बाद अमेरिका में तेज हुई बहस
विपक्ष और कुछ रिपब्लिकन नेताओं ने भी उठाए सवाल
ईरान पर बयान से बढ़ा विवाद
राष्ट्रपति ट्रंप ने अपने पोस्ट में ईरान को लेकर कड़ी चेतावनी दी और तीखी भाषा का इस्तेमाल किया। इस बयान के सामने आते ही वॉशिंगटन में राजनीतिक हलचल तेज हो गई। डेमोक्रेटिक नेताओं ने इसे गैर-जिम्मेदाराना करार दिया, वहीं कुछ रिपब्लिकन नेताओं ने भी इस पर चिंता जताई। विशेषज्ञों का मानना है कि अंतरराष्ट्रीय संबंधों जैसे संवेदनशील मुद्दों पर इस तरह की भाषा अमेरिका की वैश्विक छवि को प्रभावित कर सकती है।
क्या है 25वां संशोधन?
अमेरिकी संविधान का 25वां संशोधन 1967 में लागू हुआ था। इसकी जरूरत उस समय महसूस हुई जब राष्ट्रपति जॉन एफ. केनेडी की हत्या के बाद सत्ता हस्तांतरण को लेकर स्पष्ट व्यवस्था की कमी सामने आई थी। इस संशोधन का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि राष्ट्रपति के पद पर किसी भी असामान्य स्थिति—जैसे मृत्यु, इस्तीफा या अक्षमता—के दौरान सत्ता का खालीपन न रहे। ऐसे में उपराष्ट्रपति तत्काल कार्यभार संभाल लेते हैं।
सेक्शन-4: सबसे विवादित प्रावधान
25वें संशोधन का सेक्शन-4 सबसे ज्यादा चर्चा में रहता है। इसके तहत उपराष्ट्रपति और कैबिनेट के अधिकांश सदस्य लिखित रूप में यह घोषित कर सकते हैं कि राष्ट्रपति अपने कर्तव्यों का निर्वहन करने में सक्षम नहीं हैं। ऐसी स्थिति में उपराष्ट्रपति कार्यकारी राष्ट्रपति बन जाते हैं। हालांकि, यदि राष्ट्रपति इस फैसले को चुनौती देते हैं, तो मामला कांग्रेस तक जाता है, जहां दोनों सदनों में दो-तिहाई बहुमत से निर्णय लेना होता है। यही कारण है कि अमेरिकी इतिहास में अब तक इस प्रावधान का इस्तेमाल किसी राष्ट्रपति को जबरन हटाने के लिए नहीं किया गया है।
ट्रंप के बयान पर क्यों उठी हटाने की मांग?
ट्रंप के हालिया बयान को कई नेताओं ने ‘खतरनाक’ और ‘असंतुलित’ बताया है। डेमोक्रेट नेता चक शूमर ने कहा कि ऐसे बयान अमेरिका की छवि को नुकसान पहुंचाते हैं। वहीं सीनेटर क्रिस मर्फी ने 25वें संशोधन पर विचार करने की बात कही। इसके अलावा बर्नी सैंडर्स ने भी राष्ट्रपति के बयान को खतरनाक बताते हुए उनकी निर्णय क्षमता पर सवाल उठाए। यह पहली बार नहीं है जब ट्रंप के बयानों को लेकर विवाद हुआ हो, लेकिन इस बार मामला अंतरराष्ट्रीय तनाव, खासकर ईरान से जुड़े होने के कारण अधिक गंभीर हो गया है।
रिपब्लिकन खेमे में भी बेचैनी
इस मुद्दे पर चिंता सिर्फ विपक्ष तक सीमित नहीं है। ट्रंप की अपनी पार्टी के कुछ नेताओं और पूर्व सहयोगियों ने भी उनके व्यवहार पर सवाल उठाए हैं। पूर्व रिपब्लिकन नेता जो वॉल्श और पूर्व कम्युनिकेशन डायरेक्टर एंथोनी स्कारामुची ने खुलकर 25वें संशोधन पर चर्चा की मांग की है। हालांकि, पार्टी का मौजूदा नेतृत्व अभी इस मुद्दे पर खुलकर सामने नहीं आया है, जिससे आंतरिक मतभेद साफ नजर आते हैं।
सोशल मीडिया और सट्टा बाजार में बहस तेज
यह विवाद अब राजनीतिक गलियारों से निकलकर आम जनता तक पहुंच चुका है। सोशल मीडिया पर #25thAmendment ट्रेंड कर रहा है, जहां लोग राष्ट्रपति की मानसिक स्थिति और फैसले लेने की क्षमता पर बहस कर रहे हैं। साथ ही ऑनलाइन प्रेडिक्शन मार्केट्स में भी इस बात पर दांव लगाए जा रहे हैं कि क्या ट्रंप के कार्यकाल में इस संशोधन का इस्तेमाल होगा।
स्वास्थ्य को लेकर अफवाहें, व्हाइट हाउस का खंडन
विवाद के बीच ट्रंप की सेहत को लेकर भी कई तरह की अफवाहें सामने आईं। कुछ रिपोर्ट्स में दावा किया गया कि उन्हें अस्पताल ले जाया गया, लेकिन व्हाइट हाउस ने इन खबरों को सिरे से खारिज कर दिया।हालांकि, इन अफवाहों ने पहले से चल रही बहस को और हवा दे दी है और जनता के बीच संदेह बढ़ा है।
क्या वाकई हटाए जा सकते हैं ट्रंप?
संवैधानिक तौर पर राष्ट्रपति को हटाने का रास्ता मौजूद है, लेकिन व्यवहारिक रूप से यह बेहद कठिन प्रक्रिया है। इसके लिए उपराष्ट्रपति, कैबिनेट और कांग्रेस—तीनों स्तरों पर व्यापक समर्थन जरूरी होता है। फिलहाल ऐसा कोई संकेत नहीं है कि ट्रंप के खिलाफ इतनी बड़ी कार्रवाई की तैयारी हो रही है। लेकिन उनके हालिया बयान और उस पर आई प्रतिक्रियाओं ने यह साफ कर दिया है कि 25वें संशोधन को लेकर बहस अभी खत्म नहीं होने वाली। अमेरिकी राजनीति में ट्रंप का यह विवाद एक बार फिर यह दिखाता है कि नेतृत्व की भाषा और व्यवहार किस तरह संवैधानिक बहस को जन्म दे सकते हैं। आने वाले दिनों में यह मुद्दा और तूल पकड़ सकता है, खासकर अगर इस तरह के बयान जारी रहते हैं।





