परमाणु टेस्टिंग की मचेगी होड़? ट्रंप के बयान से बढ़ी वैश्विक चिंता, रूस ने दी कड़ी प्रतिक्रिया
– पुतिन ने अधिकारियों को दिया निर्देश, अमेरिका की संभावित टेस्टिंग पर रूस भी करेगा जवाबी तैयारी
वॉशिंगटन/मॉस्को:दुनिया एक बार फिर परमाणु हथियारों की होड़ की ओर बढ़ती दिख रही है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के हालिया बयान ने वैश्विक स्तर पर तनाव बढ़ा दिया है। ट्रंप ने दावा किया कि “अमेरिका के पास दुनिया का सबसे बड़ा परमाणु भंडार है” और उन्होंने अपने रक्षा विभाग को निर्देश दिया कि अन्य देशों की तरह परमाणु परीक्षण दोबारा शुरू किए जाएं। इस बयान के बाद रूस ने तीखी प्रतिक्रिया दी है और अमेरिका से तत्काल स्पष्टीकरण मांगा है। रूस ने चेतावनी दी कि अगर अमेरिका वास्तव में इस दिशा में कदम उठाता है, तो उसका जवाब वैश्विक स्तर पर “गंभीर और खतरनाक प्रतिक्रियाओं” के रूप में देखने को मिलेगा
ट्रंप का बयान बना तनाव की जड़
राष्ट्रपति ट्रंप ने पिछले हफ्ते अमेरिकी रक्षा विभाग को आदेश दिया था कि परमाणु परीक्षण प्रक्रिया तुरंत दोबारा शुरू की जाए। हालांकि उन्होंने स्पष्ट नहीं किया कि इससे उनका मतलब परमाणु-सक्षम मिसाइलों के फ्लाइट टेस्ट से है या परमाणु विस्फोट परीक्षणों से — जिन्हें अमेरिका और रूस ने 1990 के दशक की शुरुआत से बंद कर रखा है। ट्रंप ने कहा था कि “दुनिया के अन्य देश अपने परमाणु हथियारों का परीक्षण कर रहे हैं। हम पीछे नहीं रह सकते।” उनके इस बयान ने न सिर्फ रूस, बल्कि चीन, यूरोपीय संघ और संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में भी चिंता की लहर पैदा कर दी है।
रूस की सख्त प्रतिक्रिया – “स्थिति होगी बेहद नकारात्मक”
रूस के विदेश मंत्रालय की प्रवक्ता मारिया जाखारोवा ने ट्रंप के बयान पर तीखी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा “अगर इस बयान से ट्रंप का मतलब उन परीक्षणों से है जिनमें वास्तविक परमाणु विस्फोट शामिल हैं, तो इससे बेहद नकारात्मक स्थिति उत्पन्न होगी। इसका जवाब रूस समेत अन्य देश भी देंगे। रूस ने यह भी कहा कि अमेरिका को अपने इरादों पर स्पष्टीकरण देना होगा, क्योंकि इस बयान ने दशकों से कायम परमाणु परीक्षण प्रतिबंध की स्थिरता पर सवाल खड़ा कर दिया है। पुतिन का निर्देश – “तैयार रहो जवाबी परीक्षणों के लिए अमेरिका की संभावित टेस्टिंग योजनाओं के संकेतों के बीच रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने बुधवार को शीर्ष रक्षा और वैज्ञानिक अधिकारियों को निर्देश दिया कि किसी भी अमेरिकी कदम के जवाब में रूस द्वारा संभावित परमाणु परीक्षणों की रूपरेखा तैयार की जाए।
पुतिन का प्रस्ताव और ट्रंप की चुप्पी
पुतिन ने कहा है कि रूस कम से कम एक वर्ष तक इस संधि की सीमाओं का पालन करने के लिए तैयार है, ताकि बातचीत जारी रखी जा सके और हथियारों की नई दौड़ रोकी जा सके।हालांकि, अमेरिका की ओर से अभी तक कोई औपचारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है। रूसी विश्लेषकों का कहना है कि ट्रंप का यह कदम “राजनीतिक बयानबाज़ी” भी हो सकता है, क्योंकि अमेरिका में आने वाले महीनों में राष्ट्रपति चुनावी माहौल गरमाने वाला है।
वैश्विक सुरक्षा विशेषज्ञों की चेतावनी
अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा विशेषज्ञों ने दोनों देशों को संयम बरतने की सलाह दी है। उनका कहना है कि परमाणु परीक्षण दोबारा शुरू करना बेहद अस्थिरता पैदा करेगा, खासकर तब जब दुनिया पहले से ही यूक्रेन युद्ध, मध्य पूर्व में तनाव, और एशिया-प्रशांत क्षेत्र में शक्ति संतुलन के संकट से गुजर रही है। विश्लेषक का कहना है “अगर अमेरिका और रूस फिर से परमाणु परीक्षण शुरू करते हैं, तो चीन, उत्तर कोरिया, पाकिस्तान और यहां तक कि भारत जैसे देश भी अपनी क्षमताओं को परखने के लिए दबाव महसूस कर सकते हैं। इससे एक नई ‘न्यूक्लियर रेस’ शुरू हो जाएगी, जो पूरी दुनिया के लिए खतरनाक होगी।
पृष्ठभूमि – तीन दशक पुराना परीक्षण प्रतिबंध
अमेरिका ने आखिरी बार 1992 में परमाणु विस्फोट परीक्षण किया था, जबकि रूस (तब सोवियत संघ) ने 1990 में। इसके बाद दोनों देशों ने Comprehensive Nuclear Test Ban Treaty (CTBT) पर हस्ताक्षर किए, हालांकि अमेरिका ने इसे कभी औपचारिक रूप से मंज़ूर नहीं किया। CTBT के तहत सभी देशों ने परमाणु विस्फोटक परीक्षणों पर रोक लगाई थी। लेकिन पिछले कुछ वर्षों से रूस, चीन और उत्तर कोरिया की गतिविधियों ने इस प्रतिबंध को कमजोर किया है। अब अगर अमेरिका आधिकारिक रूप से परीक्षण शुरू करता है, तो यह इस संधि की आत्मा को तोड़ने जैसा होगा और दुनिया भर में शस्त्र नियंत्रण की पूरी व्यवस्था डगमगा सकती है।
आगे क्या?
रूस और अमेरिका दोनों ने संकेत दिए हैं कि वे सैन्य संतुलन बनाए रखने के लिए हर कदम उठाने को तैयार हैं।लेकिन विशेषज्ञों का मानना है कि अगर यह “टेस्टिंग की होड़” शुरू हुई, तो इसका असर सिर्फ इन दो देशों तक सीमित नहीं रहेगा — बल्कि इससे वैश्विक तनाव, सैन्य खर्च, और युद्ध की आशंकाएं भी बढ़ेंगी। संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटेरेस ने कहा है कि “दुनिया को एक और हथियारों की दौड़ की नहीं, बल्कि संवाद और संयम की जरूरत है।” ट्रंप के बयान से भले ही अमेरिका में राजनीतिक चर्चा तेज हो गई हो, लेकिन इससे वैश्विक सुरक्षा पर गहरी छाया पड़ गई है। रूस की चेतावनी और पुतिन के आदेश ने साफ कर दिया है कि दुनिया अब उस मोड़ पर खड़ी है, जहां ज़रा सी गलती “शीत युद्ध 2.0” की शुरुआत बन सकती है। अब निगाहें इस बात पर हैं कि क्या वॉशिंगटन और मॉस्को आखिरी क्षणों में संयम दिखाएंगे — या फिर परमाणु परीक्षण की नई दौड़ सचमुच शुरू हो जाएगी। प्रकाश कुमार पांडेय