ट्रंप ने दिखाया अब असली रंग… वेनेजुएला के ऑयल पर अमेरिकी मनमानी! तेल डील पर ट्रंप ने लगाई कड़ी शर्त

Trump now shows his true colors urging the US to impose strict restrictions on Venezuelan oil

ट्रंप ने दिखाया अब असली रंग… वेनेजुएला के ऑयल पर अमेरिकी मनमानी! तेल डील पर ट्रंप ने लगाई कड़ी शर्त

वॉशिंगटन/काराकस। अमेरिका और वेनेजुएला के बीच तनाव एक बार फिर चरम पर पहुंच गया है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने वेनेजुएला को लेकर ऐसा ऐलान किया है, जिसे अंतरराष्ट्रीय राजनीति में आर्थिक दबाव और अमेरिकी मनमानी के तौर पर देखा जा रहा है। ट्रंप ने साफ कर दिया है कि अमेरिका के साथ हुए तेल समझौते से वेनेजुएला को जो भी कमाई होगी, वह सिर्फ और सिर्फ अमेरिकी उत्पादों की खरीद में ही खर्च की जा सकेगी। इस फैसले के बाद अमेरिका-वेनेजुएला संबंधों में नई हलचल मच गई है।

तेल डील के बाद बदले ट्रंप के तेवर

वेनेजुएला पर हालिया हमलों और दबाव की रणनीति के कुछ ही दिनों बाद राष्ट्रपति ट्रंप ने अपने इरादे खुलकर जाहिर कर दिए हैं। एक दिन पहले ही ट्रंप ने घोषणा की थी कि वेनेजुएला अमेरिका को 30 से 50 मिलियन बैरल हाई-क्वालिटी प्रतिबंधित तेल देगा। अब इस समझौते पर नई शर्त जोड़ते हुए ट्रंप ने कहा है कि इस तेल की बिक्री से मिलने वाली पूरी रकम वेनेजुएला अमेरिका में ही खर्च करेगा।

ट्रंप ने यह भी दावा किया कि इस समझौते के बाद वेनेजुएला अमेरिका को अपना प्रमुख व्यापारिक साझेदार (Principal Business Partner) बनाने जा रहा है। उनके अनुसार, यह फैसला वेनेजुएला की कमजोर अर्थव्यवस्था के लिए जरूरी है और इससे वहां के लोगों को राहत मिलेगी। हालांकि आलोचकों का कहना है कि यह राहत नहीं, बल्कि आर्थिक मजबूरी का फायदा उठाने की रणनीति है।

50 मिलियन बैरल तेल अमेरिका को

इससे पहले ट्रंप ने ऐलान किया था कि वेनेजुएला अमेरिका को 30 से 50 मिलियन बैरल तक हाई-क्वालिटी तेल देगा। यह वही तेल है, जिस पर पहले अमेरिकी प्रतिबंध लगे हुए थे। अमेरिका इस तेल को अंतरराष्ट्रीय बाजार में मार्केट रेट पर बेचेगा और उससे मिलने वाली राशि पर भी अमेरिकी नियंत्रण रहेगा।

रॉयटर्स की एक रिपोर्ट के मुताबिक, इस तेल की कुल कीमत करीब 2 अरब डॉलर तक आंकी जा रही है। यानी तेल वेनेजुएला का, बिक्री अमेरिका की और कमाई भी अमेरिकी शर्तों के तहत खर्च होगी।

तेल भंडार, लेकिन निर्यात पर रोक

गौरतलब है कि वेनेजुएला के पास लाखों बैरल तेल पहले से ही टैंकरों और स्टोरेज टैंकों में पड़ा हुआ है। अमेरिका द्वारा दिसंबर के मध्य से लगाए गए तेल निर्यात प्रतिबंध (ब्लॉकेड) के कारण वेनेजुएला इस तेल को अंतरराष्ट्रीय बाजार में भेज नहीं पा रहा था। इसी मजबूरी का फायदा उठाकर अमेरिका ने यह नया समझौता थोपा है।

वेनेजुएला पर दबाव की पुरानी नीति

डोनाल्ड ट्रंप पहले भी वेनेजुएला के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो की सरकार पर लगातार दबाव बनाते रहे हैं। तेल प्रतिबंध, आर्थिक नाकेबंदी और सैन्य कार्रवाई की धमकियां ट्रंप प्रशासन की पुरानी रणनीति का हिस्सा रही हैं। ट्रंप ने हाल ही में चेतावनी दी थी कि अगर वेनेजुएला अमेरिका के लिए “नहीं खुलता”, तो और सैन्य कार्रवाई की जा सकती है।

क्या यह आर्थिक शोषण है?

अंतरराष्ट्रीय विशेषज्ञों का मानना है कि यह समझौता वेनेजुएला की संप्रभुता पर सीधा हमला है। तेल जैसे प्राकृतिक संसाधन से मिलने वाली कमाई पर दूसरे देश की शर्तें थोपना, आर्थिक शोषण की श्रेणी में आता है। आलोचकों का कहना है कि अमेरिका इस डील के जरिए वेनेजुएला की कमजोर अर्थव्यवस्था को अपने फायदे के लिए इस्तेमाल कर रहा है।

अमेरिका को क्या फायदा?

इस समझौते से अमेरिका को कई स्तरों पर फायदा होता दिख रहा है

उसे सस्ता और हाई-क्वालिटी तेल मिलेगा

अमेरिकी कंपनियों को वेनेजुएला में बड़ा बाजार मिलेगा

अमेरिकी कृषि, दवा और मेडिकल सेक्टर को सीधा लाभ

लैटिन अमेरिका में अमेरिकी प्रभाव और मजबूत होगा

वेनेजुएला के लिए मजबूरी या विकल्प?

वेनेजुएला पहले से ही आर्थिक संकट, महंगाई और ऊर्जा समस्याओं से जूझ रहा है। ऐसे में अमेरिका की शर्तें मानना उसके लिए मजबूरी बनती जा रही हैं। हालांकि सरकार समर्थकों का कहना है कि इस डील से कम से कम जरूरी दवाइयां और बिजली व्यवस्था सुधारने में मदद मिलेगी। ट्रंप का यह कदम साफ संकेत देता है कि अमेरिका वेनेजुएला के तेल को सिर्फ ऊर्जा स्रोत नहीं, बल्कि राजनीतिक हथियार की तरह इस्तेमाल कर रहा है। जहां ट्रंप इसे “दोनों देशों के लिए फायदेमंद” बता रहे हैं, वहीं दुनिया के कई हिस्सों में इसे अमेरिकी दबदबे और मनमानी की मिसाल माना जा रहा है। आने वाले दिनों में यह देखना अहम होगा कि वेनेजुएला इस समझौते को किस हद तक स्वीकार करता है और इसका असर अमेरिका-लैटिन अमेरिका संबंधों पर क्या पड़ता है।

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