फिर भड़क उठे ट्रंप…भारत से क्यों नाराज़ हो रहे हैं ट्रंप?….50% टैरिफ के बाद अब दिल्ली दौरा भी रद्द, क्वाड समिट से भी दूरी
भारत-अमेरिका रिश्तों में बढ़ते तनाव के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक और बड़ा कदम उठाया है। ताज़ा रिपोर्टों के मुताबिक, ट्रंप ने भारत का प्रस्तावित दौरा रद्द कर दिया है। यही नहीं, इस साल के अंत में भारत की मेज़बानी में होने वाले क्वाड शिखर सम्मेलन में भी अब उनके शामिल होने की संभावना नहीं है। न्यूयॉर्क टाइम्स ने सूत्रों के हवाले से दावा किया है कि राष्ट्रपति ट्रंप ने पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को अपने भारत आने की सूचना दी थी, लेकिन अब यह कार्यक्रम स्थगित कर दिया गया है। हालांकि, न तो व्हाइट हाउस और न ही भारत सरकार की ओर से इस पर आधिकारिक बयान आया है।
व्यापारिक तनाव से रिश्तों में कड़वाहट
भारत और अमेरिका के बीच बीते कुछ महीनों से व्यापारिक रिश्ते तनावपूर्ण बने हुए हैं। राष्ट्रपति ट्रंप ने हाल ही में भारत पर 50 फीसदी तक का टैरिफ लगाने की घोषणा की थी। अमेरिकी प्रशासन का मानना है कि भारत अमेरिकी उत्पादों के साथ भेदभाव करता है और घरेलू बाज़ार को संरक्षण देता है। दूसरी तरफ, भारत ने इस कदम को अनुचित बताते हुए कहा कि वह निष्पक्ष व्यापार के पक्ष में है।
इस फैसले से दोनों देशों के बीच पहले से मौजूद मतभेद और गहरे हो गए। विशेषज्ञों का कहना है कि अमेरिका की यह नीति आने वाले दिनों में भारत-अमेरिका व्यापार संबंधों पर नकारात्मक असर डाल सकती है।
मोदी-ट्रंप बातचीत और विवाद
तनाव केवल व्यापार तक ही सीमित नहीं है। दरअसल, राष्ट्रपति ट्रंप ने कई बार सार्वजनिक रूप से दावा किया कि उन्होंने मई में भारत और पाकिस्तान के बीच हुए सैन्य संघर्ष को सुलझाने में अहम भूमिका निभाई थी। हालांकि भारत ने इस दावे को सिरे से खारिज कर दिया।
भारत के विदेश सचिव विक्रम मिस्री ने साफ कहा था कि सीजफायर की बातचीत भारत और पाकिस्तान की सेनाओं के बीच मौजूद सैन्य चैनलों के माध्यम से हुई थी, जिसकी पहल पाकिस्तान ने की थी। भारत ने दो टूक यह भी कहा कि वह अपने और पाकिस्तान के बीच किसी भी विवाद में किसी बाहरी मध्यस्थता को स्वीकार नहीं करता।
यही बात प्रधानमंत्री मोदी ने खुद 17 जून को हुई एक 35 मिनट लंबी फोन कॉल के दौरान ट्रंप को स्पष्ट कर दी थी। यह कॉल उस समय हुई जब ट्रंप जी-7 शिखर सम्मेलन से लौटकर वॉशिंगटन जा रहे थे। रिपोर्टों के अनुसार, मोदी ने ट्रंप से कहा था कि भारत-पाक संघर्ष में अमेरिका की कोई भूमिका नहीं रही।
नोबेल शांति पुरस्कार और खींचतान
न्यूयॉर्क टाइम्स की रिपोर्ट में दावा किया गया है कि राष्ट्रपति ट्रंप भारत-पाकिस्तान संघर्ष खत्म करने का श्रेय लेते हुए लगातार यह कहते रहे कि पाकिस्तान उन्हें नोबेल शांति पुरस्कार के लिए नामित करने की योजना बना रहा है। उनका इशारा था कि प्रधानमंत्री मोदी को भी उनके अभियान का समर्थन करना चाहिए। लेकिन मोदी ने ट्रंप की इस अपेक्षा को मानने से इनकार कर दिया। भारत की यह स्पष्टता और अमेरिकी राष्ट्रपति की महत्वाकांक्षा के बीच टकराव ने दोनों नेताओं के व्यक्तिगत रिश्तों में भी खटास ला दी।
आधिकारिक पुष्टि से परहेज़
दिलचस्प बात यह है कि व्हाइट हाउस ने न तो कभी इस फोन कॉल को सार्वजनिक रूप से स्वीकार किया और न ही ट्रंप ने इसे सोशल मीडिया पर साझा किया। इसके बावजूद, 10 मई से अब तक राष्ट्रपति ट्रंप सार्वजनिक मंचों पर 40 से अधिक बार यह दावा कर चुके हैं कि उन्होंने भारत-पाक युद्ध रुकवाया।
भारतीय रणनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह के बयानबाज़ी से न केवल कूटनीतिक संबंध प्रभावित होते हैं, बल्कि आपसी विश्वास भी कमजोर होता है।
क्वाड शिखर सम्मेलन पर असर
भारत इस साल के अंत में क्वाड (भारत, अमेरिका, जापान और ऑस्ट्रेलिया) शिखर सम्मेलन की मेज़बानी करने जा रहा है। यह बैठक हिंद-प्रशांत क्षेत्र में चीन के बढ़ते दबदबे का संतुलन बनाने के लिहाज़ से बेहद अहम मानी जाती है। अमेरिका अब तक इसका सबसे बड़ा साझेदार रहा है। लेकिन राष्ट्रपति ट्रंप के दौरा रद्द करने से इस सम्मेलन की सियासी अहमियत पर भी असर पड़ सकता है। हालांकि, विशेषज्ञों का मानना है कि क्वाड का ढांचा इतना मज़बूत है कि यह किसी एक देश की अनुपस्थिति में भी आगे बढ़ सकता है। फिर भी, अमेरिका के शीर्ष नेतृत्व की अनुपस्थिति इस मंच की रणनीतिक गंभीरता को कमजोर करेगी।
आगे की राह
स्पष्ट है कि भारत-अमेरिका रिश्तों में मौजूदा खटास केवल व्यापारिक मुद्दों से पैदा नहीं हुई, बल्कि यह व्यक्तिगत नेतृत्व स्तर पर बने तनाव का भी नतीजा है। राष्ट्रपति ट्रंप की आक्रामक व्यापार नीति और राजनीतिक महत्वाकांक्षाओं का टकराव प्रधानमंत्री मोदी की स्पष्ट कूटनीतिक रेखा से हो रहा है। विश्लेषकों का मानना है कि आने वाले महीनों में दोनों देशों के रिश्ते और मुश्किल दौर से गुजर सकते हैं। हालांकि, यह भी सच है कि भारत और अमेरिका वैश्विक राजनीति में एक-दूसरे के अहम साझेदार हैं। रक्षा, प्रौद्योगिकी और रणनीतिक मामलों में दोनों के बीच सहयोग अनिवार्य है। ऐसे में उम्मीद यही है कि मतभेदों के बावजूद दोनों देश कूटनीतिक संवाद के रास्ते को खुला रखेंगे। डोनाल्ड ट्रंप का भारत दौरा रद्द करना और क्वाड शिखर सम्मेलन से दूरी बनाना एक बड़ा कूटनीतिक संकेत है। यह सिर्फ टैरिफ विवाद नहीं, बल्कि गहरे स्तर पर बढ़ते राजनीतिक अविश्वास और नेतृत्व स्तर पर टकराव की झलक है। आने वाले दिनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि दोनों देश मतभेदों को किनारे रखकर रिश्तों को पटरी पर लाते हैं या फिर यह तनाव लंबे समय तक खिंचता है। …(प्रकाश कुमार पांडेय)





