अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने मजबूत डॉलर को अमेरिकी अर्थव्यवस्था की ताकत बताते हुए कहा है कि मजबूत मुद्रा कई तरह से फायदे देती है और इसका एक बड़ा लाभ महंगाई को नियंत्रित रखने में मिलता है। ट्रंप का यह बयान ऐसे समय में आया है जब वैश्विक अर्थव्यवस्था में मुद्रा की मजबूती, महंगाई और ब्याज दरों को लेकर लगातार चर्चा बनी हुई है।
ट्रंप ने कहा कि अमेरिकी डॉलर मजबूत है क्योंकि अमेरिका अच्छा प्रदर्शन कर रहा है। उनके मुताबिक मजबूत डॉलर अमेरिका को आर्थिक ताकत देता है और इसका सीधा फायदा कीमतों पर पड़ने वाले दबाव को कम करने में मिल सकता है। आखिर मजबूत डॉलर से महंगाई पर असर कैसे पड़ता है? इसका सीधा संबंध अमेरिका के आयात से है। जब डॉलर दूसरी मुद्राओं के मुकाबले मजबूत होता है तो विदेशी वस्तुओं और कच्चे माल को खरीदने की डॉलर में लागत कम हो सकती है। इससे आयातित महंगाई का दबाव घट सकता है। खासकर ऊर्जा, औद्योगिक कच्चे माल और विदेशी उत्पादों की कीमतों पर इसका असर पड़ सकता है।
लेकिन मजबूत डॉलर का दूसरा पहलू भी है। अमेरिकी कंपनियां जब विदेशों में अपने उत्पाद बेचती हैं तो मजबूत डॉलर उनके उत्पादों को दूसरी मुद्राओं में महंगा बना सकता है। इससे निर्यातकों पर दबाव पड़ सकता है और विदेशी बाजारों से मिलने वाली कमाई को डॉलर में बदलने पर भी असर पड़ सकता है। यानी अमेरिकी नीति के सामने चुनौती यह है कि डॉलर इतना मजबूत रहे कि महंगाई पर नियंत्रण में मदद मिले, लेकिन इतना मजबूत भी न हो कि अमेरिकी निर्यात और घरेलू कंपनियों की अंतरराष्ट्रीय प्रतिस्पर्धा प्रभावित होने लगे।
ट्रंप का बयान इसी बड़े आर्थिक संतुलन की ओर इशारा करता है। मजबूत डॉलर अमेरिका के लिए आयात को सस्ता कर सकता है, लेकिन वैश्विक स्तर पर इसका असर दूसरे देशों पर भी पड़ता है। डॉलर दुनिया की प्रमुख रिजर्व मुद्रा होने के कारण अमेरिकी मुद्रा में बड़ा बदलाव अंतरराष्ट्रीय व्यापार, पूंजी प्रवाह और उभरती अर्थव्यवस्थाओं की मुद्रा पर असर डाल सकता है। भारत जैसे देशों के लिए भी मजबूत डॉलर महत्वपूर्ण है। अगर डॉलर मजबूत होता है तो रुपये पर दबाव बढ़ सकता है और डॉलर में खरीदे जाने वाले कच्चे तेल जैसे आयात महंगे हो सकते हैं। इसका असर घरेलू कीमतों और महंगाई पर पड़ सकता है।
इसलिए ट्रंप का मजबूत डॉलर वाला बयान केवल अमेरिकी मुद्रा की मजबूती की बात नहीं है। इसके पीछे महंगाई, आयात लागत, ब्याज दर, निर्यात और वैश्विक बाजार का पूरा आर्थिक समीकरण जुड़ा हुआ है। सार यही है कि मजबूत डॉलर अमेरिका के लिए महंगाई के खिलाफ एक सहायक कारक बन सकता है, लेकिन इसकी कीमत और असर का संतुलन अमेरिकी अर्थव्यवस्था के साथ-साथ पूरी दुनिया को प्रभावित करता है।





