परिवार की खातिर ट्रंप का पाकिस्तान मोह… भारत-अमेरिका रिश्तों पर पड़ा भारी…पूर्व अमेरिकी NSA जैक सुलिवन का बड़ा खुलासा
अमेरिका के पूर्व राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार जैक सुलिवन ने राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उनका कहना है कि ट्रंप ने भारत के साथ वर्षों से चल रही रणनीतिक साझेदारी को अपने पारिवारिक व्यावसायिक हितों की बलि चढ़ा दी। सुलिवन का दावा है कि पाकिस्तान में ट्रंप परिवार के व्यापारिक सौदों ने भारत-अमेरिका संबंधों को गहरी चोट पहुँचाई है।
अमेरिका ने लंबे समय से भारत को रूस के प्रभाव से अलग करने और चीन के प्रभाव को संतुलित करने के लिए सहयोग की नींव रखी थी। लेकिन ट्रंप की नीतियों ने इस प्रक्रिया को उल्टा कर दिया है। अब भारत खुलकर चीन और रूस के साथ खड़ा दिख रहा है।
- पूर्व अमेरिकी NSA जैक सुलिवन का बड़ा खुलासा
- आरोप – परिवार के बिज़नेस सौदों के लिए तोड़ा भारत से विश्वास
- भारत के साथ दशकों की मेहनत पर पानी
- परिवार की खातिर ट्रंप का पाकिस्तान मोह
- भारत-अमेरिका रिश्तों पर पड़ा भारी
पाकिस्तान से व्यापारिक डील का कनेक्शन
सुलिवन ने बताया कि ट्रंप परिवार से जुड़ी कंपनी वर्ल्ड लिबर्टी फाइनेंशियल (WLF) ने हाल ही में पाकिस्तान क्रिप्टो काउंसिल के साथ करार किया। इस कंपनी में ट्रंप के बेटों एरिक ट्रंप और डोनाल्ड ट्रंप जूनियर, तथा दामाद जेरेड कुशनर की 60% हिस्सेदारी बताई जाती है। यह डील उस समय सामने आई जब पाकिस्तान ने क्रिप्टोकरेंसी को कानूनी मान्यता देने के संकेत दिए। इस समझौते से ट्रंप परिवार के लिए पाकिस्तान में करोड़ों डॉलर कमाने का रास्ता खुल सकता है। यही कारण है कि पूर्व अमेरिकी NSA ने इसे रणनीतिक साझेदारी पर निजी लाभ को तरजीह देने वाला कदम बताया।
सुलिवन ने एक इंटरव्यू में कहा कि दशकों से अमेरिका और भारत तकनीक, व्यापार और रक्षा जैसे क्षेत्रों में साझेदारी मजबूत कर रहे थे। लेकिन ट्रंप ने पाकिस्तान के साथ बिज़नेस बढ़ाने की चाहत में भारत से दूरी बना ली।उनके मुताबिक, “अगर हमारे सहयोगी यह समझने लगें कि अमेरिका पर भरोसा नहीं किया जा सकता, तो यह हमारे राष्ट्रीय हितों के लिए खतरे की घंटी होगी। भारत के साथ बिगाड़े रिश्तों का असर वैश्विक साझेदारियों पर भी पड़ेगा।”
पाकिस्तान की ‘मेहरबानियां’ और ट्रंप का झुकाव
रिपोर्ट्स के मुताबिक पाकिस्तान ने न सिर्फ ट्रंप को नोबेल शांति पुरस्कार के लिए नामांकित किया बल्कि उनके परिवार और करीबी लोगों को नई पाकिस्तान क्रिप्टो काउंसिल में भी जगह दी। पहलगाम हमले के कुछ दिनों बाद ही WLF और पाकिस्तान क्रिप्टो काउंसिल के बीच समझौते पर हस्ताक्षर हुए। विश्लेषकों का मानना है कि यही डील ट्रंप के पाकिस्तान झुकाव का सबसे बड़ा सबूत है।
दूसरी आवाज़ें भी उठीं
सिर्फ सुलिवन ही नहीं, बल्कि अमेरिका के एक और पूर्व राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार जॉन बॉल्टन ने भी ट्रंप की आलोचना की है। उन्होंने कहा कि ट्रंप की टैरिफ नीति ने भारत को फिर से रूस के करीब धकेल दिया। दशकों से चली आ रही कूटनीतिक कोशिशों को एक झटके में बर्बाद कर दिया गया।
नवारो का विवादित बयान
ट्रंप के व्यापारिक सलाहकार पीटर नवारो भी लगातार भारत के खिलाफ बयान दे रहे हैं। उन्होंने हाल ही में कहा कि “भारत में ब्राह्मण तेल से मुनाफा कमा रहे हैं।” इसके अलावा उन्होंने प्रधानमंत्री मोदी की तुलना पुतिन और शी जिनपिंग से करते हुए कहा कि भारत दुनिया के दो सबसे बड़े तानाशाहों से मेलजोल बढ़ा रहा है, जो शर्मनाक है।
रणनीतिक साझेदारी पर गहरा असर
भारत-अमेरिका संबंध दशकों की मेहनत से बने थे। चाहे रक्षा सहयोग हो, टेक्नोलॉजी ट्रांसफर या एशिया में चीन के प्रभाव को रोकना – दोनों देशों की साझेदारी अहम रही। लेकिन अब विशेषज्ञों का मानना है कि ट्रंप की नीतियों ने इन रिश्तों को पीछे धकेल दिया है। सुलिवन का कहना है कि ट्रंप के फैसलों से भारत ही नहीं, बल्कि अमेरिका के अन्य सहयोगियों का भी विश्वास डगमगा सकता है।
नतीजा – चीन और रूस को मिला मौका
ट्रंप की नीतियों का सीधा असर यह हुआ कि भारत अब चीन और रूस के और करीब दिखने लगा है। अमेरिका जिन कोशिशों में दशकों से लगा था, वह एक ही प्रशासन की नीतियों से ढहती दिखाई दे रही है। जैक सुलिवन और जॉन बॉल्टन जैसे अनुभवी कूटनीतिज्ञों की टिप्पणियाँ इस बात का संकेत हैं कि ट्रंप प्रशासन ने निजी हितों के लिए भारत जैसे रणनीतिक साझेदार को पीछे धकेल दिया। पाकिस्तान के साथ पारिवारिक व्यापारिक डील ने अमेरिका की वैश्विक विश्वसनीयता पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। भारत-अमेरिका संबंधों में आई दरार का फायदा अब रूस और चीन उठा रहे हैं। विशेषज्ञ मानते हैं कि अगर जल्द ही दिशा नहीं बदली गई, तो यह स्थिति एशिया और वैश्विक राजनीति के संतुलन को पूरी तरह बदल सकती है। प्रकाश कुमार पांडेय