…तो टैरिफ का अरबों डॉलर हड़प जाएगा ट्रंप प्रशासन!
अमेरिकी वित्त मंत्री ने खोला ट्रंप सरकार का प्लान…सुप्रीम कोर्ट में टिकी नजरें
टैरिफ विवाद पर नई हलचल
अमेरिका में राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की आक्रामक व्यापार नीतियों ने पूरी दुनिया को हिला दिया है। 180 से अधिक देशों पर लगाए गए भारी-भरकम ‘रेसिप्रोकल टैरिफ’ अब कानूनी जाल में उलझ चुके हैं। अमेरिकी फेडरल कोर्ट ने इन टैरिफ को राष्ट्रपति के अधिकारों का उल्लंघन करार दिया है और अब मामला सुप्रीम कोर्ट में है। अगर सुप्रीम कोर्ट भी यही कहता है, तो ट्रंप प्रशासन को अरबों डॉलर वापस करने पड़ सकते हैं। लेकिन अमेरिकी वित्त मंत्री स्कॉट बेसेन्ट ने साफ किया है कि सरकार ने इसके लिए “कई और रास्ते” तैयार किए हैं।
फेडरल कोर्ट का बड़ा झटका
पिछले 29 अगस्त को अमेरिकी फेडरल अपील अदालत ने ऐतिहासिक फैसला सुनाते हुए कहा था कि ट्रंप ने “इंटरनेशनल इमरजेंसी इकनॉमिक पावर्स एक्ट (IEEPA)” का गलत इस्तेमाल किया। अदालत के अनुसार, यह कानून राष्ट्रपति को इतने बड़े पैमाने पर टैरिफ लगाने का अधिकार नहीं देता। अदालत ने साफ कहा कि “रेसिप्रोकल टैरिफ और ट्रैफिकिंग टैरिफ की इतनी बड़ी मात्रा” को संसदीय मंजूरी के बिना लागू करना असंवैधानिक है।
हालांकि, अदालत ने अपने आदेश को 14 अक्टूबर तक स्थगित कर दिया। इसका मतलब है कि फिलहाल टैरिफ जारी रहेंगे और अंतिम फैसला अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट से ही तय होगा।
वित्त मंत्री ने खोला राज
एक न्यूज कार्यक्रम में जब अमेरिकी वित्त मंत्री स्कॉट बेसेन्ट से इस मुद्दे पर पूछा गया तो उन्होंने माना कि सुप्रीम कोर्ट का फैसला ट्रंप प्रशासन की मुश्किलें बढ़ा सकता है। उन्होंने क हा “हमें लगभग आधे टैरिफ पर रिफंड देना होगा, जो राजकोष के लिए भयानक होगा। इसमें कोई ‘तैयार रहो’ नहीं है। अगर अदालत कहती है, तो हमें यह करना होगा।” लेकिन इसके साथ ही बेसेन्ट ने यह भी संकेत दिया कि सरकार ने टैरिफ वापस करने से बचने के लिए अन्य रास्तों पर काम शुरू कर दिया है। उन्होंने विस्तृत जानकारी तो नहीं दी, लेकिन साफ कहा कि टैरिफ लौटाने के बजाय “वैकल्पिक उपाय” अपनाए जा सकते हैं।
“राष्ट्रपति की सौदेबाजी की ताकत घटेगी”
वित्त मंत्री ने यह भी माना कि टैरिफ लौटाने से राष्ट्रपति ट्रंप की ‘नेगोशिएशन पावर’ यानी सौदेबाजी की ताकत कमजोर हो जाएगी। ट्रंप ने भारत, चीन, कनाडा और ब्राजील जैसे देशों पर भारी टैरिफ लगाकर व्यापार वार्ताओं में दबाव बनाने की कोशिश की थी। अब अगर अदालत टैरिफ को अवैध ठहरा देती है, तो यह पूरी रणनीति ढह सकती है।
भारत पर सबसे ज्यादा बोझ
भारत उन देशों में शामिल है जिन पर ट्रंप प्रशासन ने सबसे कड़ा वार किया है। 7 अगस्त 2025 से भारत पर 25% टैरिफ और 27 अगस्त से 50% टैरिफ लागू कर दिया गया। इसका सीधा असर भारतीय निर्यातकों और छोटे व्यवसायों पर पड़ा है। भारत ने इस पर आपत्ति जताई, लेकिन अमेरिकी प्रशासन ने दलील दी कि यह “रेसिप्रोकल” यानी बराबरी का शुल्क है। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर अमेरिका को अरबों डॉलर लौटाने पड़ते हैं और भारत भी दावा करता है, तो यह द्विपक्षीय रिश्तों पर बड़ा असर डालेगा।
अरबों डॉलर की कमाई पर संकट
सिर्फ अगस्त महीने में ही अमेरिकी सरकार ने टैरिफ से 31 अरब डॉलर की कमाई की है। यह रकम अब कानूनी संकट में फंस गई है। अगर सुप्रीम कोर्ट भी फेडरल कोर्ट के फैसले को बरकरार रखता है, तो इसका बड़ा हिस्सा लौटाना पड़ेगा। इस स्थिति ने अमेरिकी वित्त विभाग को चिंतित कर दिया है। बेसेन्ट ने कहा कि अगर ऐसा हुआ तो यह “खजाने के लिए भयानक” होगा। हालांकि उन्होंने भरोसा जताया कि सुप्रीम कोर्ट में सरकार जीत जाएगी।
दुनिया भर की अर्थव्यवस्थाओं पर असर
ट्रंप की टैरिफ नीति ने सिर्फ भारत ही नहीं, बल्कि चीन, तुर्की, ब्राजील और कनाडा जैसी बड़ी अर्थव्यवस्थाओं को भी झटका दिया है। कई देशों ने पलटवार करते हुए अमेरिकी उत्पादों पर अतिरिक्त शुल्क लगाया। इससे वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला पर असर पड़ा और महंगाई बढ़ी। अंतरराष्ट्रीय विशेषज्ञ मानते हैं कि अगर अमेरिका टैरिफ वापस करने से बचता है, तो यह WTO (विश्व व्यापार संगठन) के नियमों के भी खिलाफ होगा और नए विवाद खड़े हो सकते हैं।
सुप्रीम कोर्ट का फैसला क्यों अहम?
इस पूरे विवाद का असली समाधान अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट के फैसले में छिपा है। अगर अदालत ट्रंप प्रशासन के पक्ष में फैसला देती है, तो टैरिफ वैध रहेंगे और अरबों डॉलर अमेरिकी खजाने में सुरक्षित रहेंगे। लेकिन अगर अदालत फेडरल कोर्ट के फैसले को बरकरार रखती है, तो न सिर्फ अमेरिका को टैरिफ लौटाना पड़ेगा बल्कि राष्ट्रपति के अधिकारों पर भी कानूनी सवाल खड़े हो जाएंगे।
अमेरिका का टैरिफ विवाद अब सिर्फ व्यापार का नहीं, बल्कि राजनीति और कानून का भी मामला बन चुका है। वित्त मंत्री की चेतावनी ने साफ कर दिया है कि ट्रंप प्रशासन अरबों डॉलर लौटाने के मूड में नहीं है और “अन्य रास्तों” से पैसा बचाने की कोशिश करेगा। सवाल यह है कि क्या सुप्रीम कोर्ट ट्रंप की टैरिफ नीति को वैध ठहराएगा या फिर दुनिया की दिग्गज अर्थव्यवस्थाओं के लिए राहत का रास्ता खोलेगा? (प्रकाश कुमार पांडेय)





