घने कोहरे ने ली एक और जान…दिल्ली–लखनऊ हाईवे पर दो ट्रक डिवाइडर से टकराए, एक व्यक्ति घायल
मुरादाबाद (उत्तर प्रदेश)। उत्तर प्रदेश में सर्दी के मौसम के साथ ही कोहरा एक बार फिर हादसों की वजह बनने लगा है। दिल्ली–लखनऊ राष्ट्रीय राजमार्ग पर मुरादाबाद जिले के कटघर क्षेत्र के पास मंगलवार तड़के घने कोहरे के कारण एक बड़ा सड़क हादसा हो गया। इस हादसे में दो ट्रक सड़क के डिवाइडर से टकरा गए, जिसमें एक व्यक्ति को मामूली चोटें आई हैं।
यह दुर्घटना सुबह करीब 5 बजे हुई, जब पूरे इलाके में घना कोहरा और स्मॉग छाया हुआ था। दृश्यता बेहद कम होने के कारण सड़क पर आगे देख पाना मुश्किल हो रहा था। हादसे के बाद कुछ समय के लिए हाईवे पर अफरा-तफरी का माहौल बन गया और यातायात प्रभावित हुआ।
कैसे हुआ हादसा
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, सबसे पहले एक ट्रक चालक ने कोहरे के कारण वाहन पर नियंत्रण खो दिया और ट्रक सीधे सड़क के डिवाइडर से जा टकराया। कुछ ही पलों बाद पीछे से आ रहा दूसरा ट्रक भी उसी डिवाइडर से टकरा गया। दोनों ट्रकों की रफ्तार अधिक बताई जा रही है, लेकिन कोहरे के कारण चालक समय पर ब्रेक नहीं लगा सके। सुबह की सैर पर निकले एक स्थानीय व्यक्ति ने बताया “उस समय कोहरा इतना घना था कि कुछ भी साफ नजर नहीं आ रहा था। सड़क पर स्ट्रीट लाइट्स भी ठीक से काम नहीं कर रही थीं। पहले एक ट्रक डिवाइडर से टकराया और उसके तुरंत बाद दूसरा ट्रक भी उसी जगह जा भिड़ा।”
एक व्यक्ति घायल, बड़ा नुकसान टला
हादसे में एक व्यक्ति को मामूली चोटें आईं, जिसे मौके पर प्राथमिक उपचार दिया गया। राहत की बात यह रही कि इस दुर्घटना में कोई जानमाल का बड़ा नुकसान नहीं हुआ। दोनों ट्रकों के चालकों को हल्की चोटें आईं, लेकिन किसी की हालत गंभीर नहीं बताई गई है। स्थानीय लोगों का कहना है कि अगर उस समय सड़क पर ज्यादा वाहन होते, तो हादसा और बड़ा हो सकता था।
सर्दियों में बढ़ जाते हैं हादसे
स्थानीय निवासियों ने बताया कि दिल्ली–लखनऊ हाईवे का यह हिस्सा हादसों के लिहाज से पहले से ही संवेदनशील माना जाता है, खासकर सर्दियों के मौसम में। कोहरा, स्मॉग और खराब रोशनी के कारण यहां अक्सर दुर्घटनाएं होती रहती हैं। एक स्थानीय निवासी ने कहा “यहां हादसे होना आम बात हो गई है। हर महीने दो से चार दुर्घटनाएं हो जाती हैं। सर्दियों में तो हालात और खराब हो जाते हैं। प्रशासन को यहां स्पीड ब्रेकर लगाने चाहिए या फिर अन्य सुरक्षा उपाय करने चाहिए।”
प्रशासन की कार्रवाई
हादसे की सूचना मिलते ही पुलिस और हाईवे प्रशासन की टीम मौके पर पहुंच गई। क्षतिग्रस्त ट्रकों और सड़क पर बिखरे मलबे को हटाने के लिए क्रेन की मदद ली गई। सफाई कार्य के दौरान कुछ समय के लिए यातायात आंशिक रूप से बाधित रहा, जिससे वाहनों की लंबी कतारें लग गईं। हालांकि, प्रशासन की तत्परता से कुछ ही घंटों में सड़क को पूरी तरह साफ कर लिया गया और ट्रैफिक को सामान्य रूप से बहाल कर दिया गया।
रोशनी और सुरक्षा इंतजामों पर सवाल
स्थानीय लोगों और वाहन चालकों ने हाईवे पर पर्याप्त रोशनी न होने और चेतावनी संकेतों की कमी पर सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि घने कोहरे के दौरान सड़क पर रिफ्लेक्टर, साइन बोर्ड और स्ट्रीट लाइट्स की भूमिका बेहद अहम होती है, लेकिन इस हिस्से में ये सुविधाएं नाकाफी हैं।
लोगों ने प्रशासन से मांग की है कि:
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कोहरे के मौसम में स्पीड लिमिट सख्ती से लागू की जाए
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हाईवे पर अतिरिक्त स्ट्रीट लाइट्स लगाई जाएं
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संवेदनशील स्थानों पर रिफ्लेक्टिव साइन बोर्ड और स्पीड ब्रेकर लगाए जाएं
पुलिस की अपील
पुलिस ने वाहन चालकों से अपील की है कि सर्दियों में कोहरे के दौरान सावधानी बरतें। कम दृश्यता में तेज रफ्तार से वाहन चलाने से बचें और फॉग लाइट्स का सही तरीके से इस्तेमाल करें। एक पुलिस अधिकारी ने कहा, “कोहरे के समय वाहन चलाते वक्त दूरी बनाए रखें, अचानक ब्रेक न लगाएं और हाई बीम लाइट्स के बजाय फॉग लैंप का प्रयोग करें। थोड़ी सी लापरवाही बड़े हादसे का कारण बन सकती है।”
हर साल दोहराई जाती है समस्या
दिल्ली–लखनऊ हाईवे पर कोहरे के कारण होने वाले हादसे हर साल सर्दियों में दोहराए जाते हैं। इसके बावजूद स्थायी समाधान नहीं निकल पाया है। विशेषज्ञों का मानना है कि तकनीकी उपायों और सख्त निगरानी से इन हादसों को काफी हद तक रोका जा सकता है। मंगलवार सुबह हुआ यह हादसा एक बार फिर यह याद दिलाता है कि घना कोहरा और लापरवाही मिलकर कितनी बड़ी दुर्घटनाओं को जन्म दे सकते हैं। हालांकि इस बार जानमाल का बड़ा नुकसान नहीं हुआ, लेकिन यह घटना प्रशासन और वाहन चालकों—दोनों के लिए एक चेतावनी है। जब तक सड़क सुरक्षा को लेकर ठोस कदम नहीं उठाए जाते, तब तक इस तरह की घटनाएं होती रहेंगी।





