उज्जैन में पहली बार शिप्रा के पावन तट पर फहराया तिरंगा… मुख्यमंत्री मोहन यादव ने किया ध्वजारोहण
भोपाल / उज्जैन। 77वें गणतंत्र दिवस के अवसर पर मध्यप्रदेश में देशभक्ति, सांस्कृतिक गौरव और संविधान के प्रति सम्मान का अद्भुत दृश्य देखने को मिला। राजधानी भोपाल से लेकर धार्मिक नगरी उज्जैन तक, प्रदेशभर में राष्ट्रीय पर्व उत्साह और गरिमा के साथ मनाया गया। इस वर्ष गणतंत्र दिवस का सबसे खास और ऐतिहासिक पल उज्जैन में देखने को मिला। जहां पहली बार पवित्र शिप्रा नदी के तट पर मुख्यमंत्री डॉ.मोहन यादव ने तिरंगा फहराया।
भोपाल में राज्य स्तरीय मुख्य समारोह
मध्यप्रदेश का राज्य स्तरीय मुख्य समारोह राजधानी भोपाल के लाल परेड मैदान में आयोजित किया गया। कार्यक्रम की शुरुआत पारंपरिक सैन्य सलामी के साथ हुई, जहाँ राज्यपाल द्वारा राष्ट्रीय ध्वज फहराया गया और परेड की सलामी ली गई। इस अवसर पर पुलिस, होमगार्ड, एसएएफ और एनसीसी के जवानों ने अनुशासन और एकता का शानदार प्रदर्शन किया। राज्यपाल ने अपने संबोधन में संविधान के मूल्यों, लोकतंत्र की मजबूती और नागरिक कर्तव्यों पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि गणतंत्र दिवस केवल एक पर्व नहीं, बल्कि संविधान के प्रति निष्ठा और राष्ट्र निर्माण के संकल्प का प्रतीक है।
महाकाल की नगरी में ऐतिहासिक क्षण
पावन शिप्रा तट पर मुख्यमंत्री का ध्वजारोहण
महाकाल की नगरी उज्जैन में इस वर्ष गणतंत्र दिवस का आयोजन एक नई ऐतिहासिक पहचान के साथ हुआ। पवित्र शिप्रा नदी के तट पर पहली बार मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने राष्ट्रीय ध्वज फहराया। यह आयोजन धार्मिक आस्था और राष्ट्रीय भावना के अद्भुत संगम के रूप में सामने आया।
ध्वजारोहण के दौरान शिप्रा तट “वंदे मातरम” और “भारत माता की जय” के नारों से गूंज उठा। नदी के तट पर सजे मंच, पारंपरिक सजावट और आध्यात्मिक वातावरण ने इस आयोजन को और भी विशेष बना दिया। बड़ी संख्या में स्थानीय नागरिक, साधु-संत, जनप्रतिनिधि और प्रशासनिक अधिकारी इस ऐतिहासिक पल के साक्षी बने।
मुख्यमंत्री का संदेश: आस्था और राष्ट्र का संगम
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने अपने संबोधन में कहा कि शिप्रा नदी भारतीय संस्कृति, धर्म और जीवन दर्शन की प्रतीक है, और इसी पवित्र तट पर तिरंगा फहराना प्रदेश के लिए गौरव का विषय है। उन्होंने कहा कि गणतंत्र दिवस हमें संविधान, समानता और न्याय के मूल्यों को आत्मसात करने की प्रेरणा देता है। मुख्यमंत्री ने युवाओं से राष्ट्र निर्माण में सक्रिय भूमिका निभाने का आह्वान किया और कहा कि मध्यप्रदेश विकास, संस्कृति और आध्यात्मिक विरासत के साथ आगे बढ़ रहा है।
धार्मिक और सांस्कृतिक नगरी में विशेष आयोजन
उज्जैन में गणतंत्र दिवस के अवसर पर विभिन्न सांस्कृतिक कार्यक्रमों का भी आयोजन किया गया। स्कूली बच्चों द्वारा देशभक्ति गीत, लोकनृत्य और नाट्य प्रस्तुतियां दी गईं। महाकाल मंदिर क्षेत्र और शिप्रा तट को विशेष रूप से सजाया गया, जिससे पूरा शहर तिरंगे के रंग में रंगा नजर आया। स्थानीय लोगों का कहना है कि शिप्रा तट पर ध्वजारोहण ने गणतंत्र दिवस को एक नई आध्यात्मिक पहचान दी है, जिसे आने वाले वर्षों में भी याद रखा जाएगा।
प्रदेशभर में देशभक्ति का माहौल
भोपाल और उज्जैन के अलावा इंदौर, ग्वालियर, जबलपुर, रीवा, सागर और छिंदवाड़ा समेत प्रदेश के सभी जिलों में गणतंत्र दिवस पूरे उत्साह के साथ मनाया गया। कलेक्टर कार्यालयों, पुलिस लाइनों, स्कूल-कॉलेजों और पंचायत मुख्यालयों पर ध्वजारोहण किया गया।
एनसीसी कैडेट्स और स्कूली बच्चों ने प्रभात फेरियां निकालीं, जबकि कई स्थानों पर स्वतंत्रता सेनानियों और समाजसेवियों को सम्मानित किया गया। सरकारी और निजी भवनों पर तिरंगा लहराता नजर आया।
नारी शक्ति और युवा भागीदारी
इस वर्ष गणतंत्र दिवस समारोहों में नारी शक्ति और युवाओं की भागीदारी विशेष रूप से देखने को मिली। महिला पुलिस कर्मियों और छात्राओं की सक्रिय मौजूदगी ने यह संदेश दिया कि लोकतंत्र की मजबूती में हर वर्ग की भागीदारी आवश्यक है।
गणतंत्र दिवस बना आस्था
संस्कृति और संविधान का उत्सव
77वें गणतंत्र दिवस पर मध्यप्रदेश में आयोजित कार्यक्रमों ने यह साफ कर दिया कि यह पर्व केवल औपचारिक आयोजन नहीं, बल्कि आस्था, संस्कृति और संविधान के मूल्यों का उत्सव है। विशेष रूप से उज्जैन में शिप्रा तट पर मुख्यमंत्री द्वारा तिरंगा फहराना, प्रदेश के इतिहास में एक नया अध्याय जोड़ गया है।





