जनजातीय गौरव दिवस: आदि संस्कृति के वैभव का उत्सव CM डॉ. मोहन यादव ने दिए निर्देश— हर जिले में गरिमामय आयोजन की तैयारी

Tribal Pride Day

जनजातीय गौरव दिवस: आदि संस्कृति के वैभव का उत्सव
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने दिए निर्देश— हर जिले में गरिमामय आयोजन की तैयारी

मध्यप्रदेश में इस वर्ष का जनजातीय गौरव दिवस पूरी गरिमा, सम्मान और सांस्कृतिक उत्साह के साथ मनाया जाएगा। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने प्रदेश के सभी कलेक्टरों को निर्देश दिए हैं कि धरती आबा भगवान बिरसा मुंडा की 150वीं जयंती पर आयोजित होने वाले इस अवसर को जनजातीय समाज के गौरव और परंपरा के अनुरूप भव्य बनाया जाए। उन्होंने कहा कि यह सिर्फ एक उत्सव नहीं, बल्कि भारत की आदि संस्कृति के वैभव और प्रतिभा के सम्मान का पर्व है।

आदि संस्कृति का गौरवपूर्ण उत्सव

मुख्यमंत्री ने कहा कि जनजातीय गौरव दिवस हमें अपनी मूल संस्कृति, परंपराओं और जीवन मूल्यों से जोड़ने का अवसर देता है। जनजातीय समाज की मेहनत, वीरता और जीवन दर्शन ने भारतीय संस्कृति को गहराई प्रदान की है। इस अवसर पर जिलों में सांस्कृतिक और सामाजिक कार्यक्रमों की श्रृंखला प्रारंभ की जाएगी, जिनमें स्थानीय कलाकार, विद्यार्थी और महिला समूह भाग लेंगे।

2021 से मनाया जा रहा जनजातीय गौरव दिवस

वर्ष 2021 में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने मध्यप्रदेश से इस दिवस की शुरुआत की थी। इसका उद्देश्य उन जनजातीय नायकों को श्रद्धांजलि देना है जिन्होंने स्वतंत्रता संग्राम में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। भगवान बिरसा मुंडा के नेतृत्व में हुए उलगुलान आंदोलन ने ब्रिटिश हुकूमत की नींव हिला दी थी। उनकी जयंती, 15 नवंबर, आज जनजातीय अस्मिता और सम्मान का प्रतीक बन चुकी है।

प्रधानमंत्री की मंशा के अनुरूप भव्य आयोजन

प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में स्वतंत्रता के 75 वर्षों के उत्सव आजादी का अमृत महोत्सव के दौरान जनजातीय गौरव दिवस को राष्ट्रीय स्तर पर मनाने की घोषणा की गई थी। यह दिन न केवल जनजातीय समाज की संस्कृति और इतिहास का प्रतीक है, बल्कि भारत की एकता और विविधता का भी उत्सव है। मुख्यमंत्री ने कहा कि “यह दिन हमें प्रेरित करता है कि हम अपने जनजातीय समुदायों की मेहनत, परंपरा और बलिदान को नमन करें और उनके योगदान को नई पीढ़ी तक पहुंचाएं।

जिलों में होंगे सम्मान और सांस्कृतिक आयोजन

प्रदेश के सभी जिलों में कार्यक्रमों का आयोजन किया जाएगा, जिनमें जनजातीय समाज के प्रतिभावान युवाओं, प्रगतिशील किसानों और कलाकारों का सम्मान किया जाएगा। मुख्यमंत्री के निर्देश पर जनजातीय बहुल जिलों में नई परियोजनाओं की शुरुआत भी की जा रही है। इनमें आदि कर्मयोगी अभियान, पीएम जनमन योजना और धरती आबा अभियान के तहत नई गतिविधियों को गति दी जा रही है। स्वतंत्रता सेनानियों और जनजातीय नायकों पर निबंध, भाषण और चित्रकला प्रतियोगिताएं आयोजित होंगी।

स्वास्थ्य, शिक्षा और कला पर विशेष फोकस
कार्यक्रमों में स्वास्थ्य परीक्षण शिविर, स्वास्थ्य जागरूकता अभियान और महिलाओं के लिए प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे।
विद्यार्थियों के लिए निबंध, पेंटिंग, क्विज़ और खेल प्रतियोगिताओं का आयोजन होगा। महिलाओं के स्व-सहायता समूह अपने हस्तशिल्प और पारंपरिक उत्पादों का प्रदर्शन करेंगी। जनजातीय कलाकार लोक नृत्य, मांडना कला, लोक नाट्य, लोक चित्र कला और पारंपरिक पाक कला का प्रदर्शन करेंगे, जिससे स्थानीय संस्कृति का संरक्षण और प्रसार हो सके।

राज्यभर में रथ यात्राएं और सांस्कृतिक परंपरा का संगम
प्रदेश के विभिन्न हिस्सों से रथ यात्राएं निकाली जाएंगी जो 14 नवंबर तक जिला मुख्यालयों पर पहुंचेंगी। जनजातीय समाज के सदस्य पारंपरिक वेशभूषा और वाद्य यंत्रों के साथ भाग लेंगे। जबलपुर और अलीराजपुर में विशेष आयोजन होंगे, वहीं मंडला में बैगा सम्मेलन, अलीराजपुर में भगोरिया महोत्सव, छिंदवाड़ा में भारिया सम्मेलन, पातालपानी में टंट्या मामा बलिदान दिवस* और सतना में माता शबरी जयंती सम्मेलन* का आयोजन होगा।

सभी विभागों की संयुक्त भागीदारी
राज्य सरकार ने कार्यक्रमों की सुचारू तैयारी के लिए सभी विभागों को जिम्मेदारी सौंपी है। स्कूल शिक्षा, उच्च शिक्षा, संस्कृति, पंचायत एवं ग्रामीण विकास, स्वास्थ्य, महिला एवं बाल विकास, कृषि, खेल एवं युवा कल्याण, नगरीय प्रशासन, गृह, राजस्व और परिवहन विभाग मिलकर जनजातीय गौरव दिवस को ऐतिहासिक बनाएंगे। सभी जिलों को आयोजन हेतु आवश्यक बजट जारी कर दिया गया है।

जनजातीय गौरव दिवस: आत्मसम्मान और एकता का प्रतीक
यह दिवस केवल एक सरकारी आयोजन नहीं, बल्कि समाज के हर वर्ग के लिए प्रेरणा का अवसर है। यह हमें यह याद दिलाता है कि भारत की ताकत उसकी विविधता और लोक संस्कृति में निहित है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा, “जनजातीय गौरव दिवस हमारे जनजातीय नायकों के शौर्य, संघर्ष और बलिदान की अमर गाथा है। यह हमें बताता है कि हमारी आदि संस्कृति न केवल अतीत की धरोहर है, बल्कि भारत के उज्जवल भविष्य की भी आधारशिला है। मध्यप्रदेश इस बार जनजातीय गौरव दिवस को “गौरव, एकता और संस्कृति के महापर्व” के रूप में मना रहा है — जहां हर गांव और हर जनजातीय परिवार की परंपरा, संगीत और संस्कृति एक नए उजास में जगमगाएगी। (प्रकाश कुमार पांडेय)

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