गिरिडीहः केंद्र सरकार ने गुरुवार यानी 5जनवरी को तीन साल पहले जारी अपना आदेश वापस ले लिया है और झारखंड के पारसनाथ स्थित जैन तीर्थ स्थल सम्मेद शिखर पर पर्यटन और इको टूरिज्म एक्टिविटी पर रोक लगा दी गई है। । केंद्रीय पर्यावरण मंत्रालय की ओर से गुरुवार को जारी अधिसूचना में सभी पर्यटन और इको टूरिज्म एक्टिविटी पर रोक लगाने के निर्देश दिए गए हैं।
केंद्र सरकार ने 3 साल पहले नोटिफाई किया
झारखंड के पारसनाथ स्थित जैन तीर्थ स्थल सम्मेद शिखर पर पर्यटन और इको टूरिज्म एक्टिविटी पर रोक लगा दी गई है। इसके अलावा केंद्र सरकार ने एक निगरानी समिति भी बनाई है। भूपेंद्र यादव ने गुरुवार को दिल्ली में जैन समाज के प्रतिनिधियों से मीटिंग की।
पारसनाथ पर्वत पर इन गतिविधियों पर लगी रोक
- तेज संगीत या लाउडस्पीकर का बजाना
- पालतू जानवरों के साथ आना
- मांसाहारी खाद्य पदार्थों की बिक्री
- इसके अलावा ऐसी सारी गतिविधियों पर रोक रहेगी, जिससे पर्यावरण को नुकसान पहुंचे
जैनियों के लिए बेहद महत्वपूर्ण है यह शिखर
झारखंड का हिमालय माने जाने वाले इस स्थान पर जैनियों का पवित्र तीर्थ शिखरजी स्थापित है। इस पुण्य क्षेत्र में जैन धर्म के 24 में से 20 तीर्थंकरों ने मोक्ष की प्राप्ति की। यहां पर 23वें तीर्थंकर भगवान पार्श्वनाथ ने भी निर्वाण प्राप्त किया था। पवित्र पर्वत के शिखर तक श्रद्धालु दुर्गम रास्तों से गुजरते हुए नौ किलोमीटर की यात्रा तय कर शिखर पर पहुंचते हैं।
जैन समाज इसलिए कर रहा है विरोध
जैन समाज को आशंका है कि पर्यटन स्थल बनने के बाद यहां मांस-मदिरा आदि बिकने लगेगा, यह समाज की भावना-मान्यता के खिलाफ है। इस मसले पर सम्मेद शिखर में विराजित मुनिश्री प्रमाण सागरजी ने कहा कि सम्मेद शिखर इको टूरिज्म नहीं, इको तीर्थ होना चाहिए। सरकार पूरी परिक्रमा के क्षेत्र और इसके 5 किलोमीटर के दायरे के क्षेत्र को पवित्र स्थल घोषित करे, ताकि इसकी पवित्रता बनी रहे।





