भारत के इतिहास में क्यों खास है 25 जुलाई…अब तक 10 राष्ट्रपतियों ने इसी तारीख को ली शपथ…जानें नीलम संजीव रेड्डी से द्रौपदी मुर्मू तक कैसी कायम रही ये परंपरा

10 presidents have taken oath 25th July

भारत के संवैधानिक इतिहास में 25 जुलाई की तारीख एक खास पहचान रखती है। इस दिन न केवल भारतीय लोकतंत्र की सबसे ऊंची संवैधानिक कुर्सी के लिए शपथ ली जाती है, बल्कि यह संवैधानिक स्थायित्व और परंपरा की प्रतीक भी बन चुकी है। 1977 से लेकर अब तक 10 राष्ट्रपतियों ने 25 जुलाई को ही पद एवं गोपनीयता की शपथ ली है, जिनमें मौजूदा राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू भी शामिल हैं।

भारत के इतिहास में क्यों खास है 25 जुलाई…

अब तक 10 राष्ट्रपतियों ने इसी तारीख को ली शपथ…

जानें नीलम संजीव रेड्डी से द्रौपदी मुर्मू तक कैसी कायम रही ये परंपरा

जानें 25 जुलाई कैसे बन गई राष्ट्रपति शपथ ग्रहण की परंपरा

भारत के पहले राष्ट्रपति ने कब ली थी शपथ?

भारत के पहले राष्ट्रपति डॉ. राजेंद्र प्रसाद ने संविधान लागू होने के दिन यानी 26 जनवरी 1950 को पहली बार राष्ट्रपति पद की शपथ ली थी। हालांकि, स्वतंत्र भारत में पहला राष्ट्रपति चुनाव 1952 में हुआ, जिसके बाद उन्होंने 13 मई 1952 को औपचारिक रूप से निर्वाचित राष्ट्रपति के रूप में शपथ ली।

इस तारीख पर बाद में अन्य राष्ट्रपतियों ने भी शपथ ली
डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन – 13 मई 1962
डॉ. जाकिर हुसैन – 13 मई 1967
वी.वी. गिरी ने जहां 3 मई 1969 को कार्यवाहक राष्ट्रपति के रुप में शपथ
तो वहीं इसके बाद 24 अगस्त 1969 वीवी गिरी राष्ट्रपति चुने गए थे।

कार्यकाल के दौरान दो राष्ट्रपतियों का निधन

भारत के दो राष्ट्रपतियों का निधन कार्यकाल के दौरान हुआ। डॉ. जाकिर हुसैन – 3 मई 1969 और फखरुद्दीन अली अहमद का 11 फरवरी 1977 को निधन हुआ था। इसके कारण कार्यवाहक राष्ट्रपतियों की नियुक्ति की गई। जिसमें वी.वी. गिरी कार्यवाहक राष्ट्रपति 3 मई 1969 बनाए गए। वहीं जस्टिस मोहम्मद हिदायतुल्ला भी 20 जुलाई 1969 को कार्यवाहक राष्ट्रपति बनाए गए। इसके बाद बी.डी. जत्ती को 1977 में फखरुद्दीन अली अहमद के निधन के बाद कार्यवाहक राष्ट्रपति बनाया गया।

25 जुलाई: एक परंपरा की शुरुआत

1977 में नीलम संजीव रेड्डी ने जब 25 जुलाई को राष्ट्रपति पद की शपथ ली, तब शायद किसी ने यह कल्पना नहीं की थी कि यह तारीख आने वाले दशकों में राष्ट्रपति शपथ का स्थायी दिन बन जाएगी। इसके बाद लगभग हर निर्वाचित राष्ट्रपति ने इसी तारीख को पदभार संभाला।

वर्ष राष्ट्रपति का नाम शपथ की तारीख

1977 नीलम संजीव रेड्डी 25 जुलाई
1982 ज्ञानी जैल सिंह 25 जुलाई
1987 रामास्वामी वेंकटरमण 25 जुलाई
1992 डॉ. शंकर दयाल शर्मा 25 जुलाई
1997 के.आर. नारायणन 25 जुलाई
2002 डॉ. ए.पी.जे. अब्दुल कलाम 25 जुलाई
2007 प्रतिभा पाटिल 25 जुलाई
2012 प्रणब मुखर्जी 25 जुलाई
2017 रामनाथ कोविंद 25 जुलाई
2022 द्रौपदी मुर्मू 25 जुलाई

क्या है परंपरा के पीछे के कारण ?

25 जुलाई को राष्ट्रपति शपथ लेने की परंपरा के पीछे कोई लिखित संवैधानिक नियम नहीं है, परंतु यह एक प्रशासनिक और प्रक्रिया आधारित स्थायित्व का उदाहरण बन गया है। राष्ट्रपति का कार्यकाल 5 वर्ष का होता है, इसलिए जब एक राष्ट्रपति 25 जुलाई को पदभार छोड़ते हैं, अगला उसी दिन पदभार ग्रहण करता है। इससे सत्ता हस्तांतरण में स्पष्टता और प्रोटोकॉल में एकरूपता बनी रहती है। यह परंपरा एक तरह से संवैधानिक कैलेंडर का हिस्सा बन गई है।

द्रौपदी मुर्मू: 25 जुलाई को शपथ लेने वाली 10वीं राष्ट्रपति

2022 में द्रौपदी मुर्मू ने भारत की 15वीं राष्ट्रपति और पहली आदिवासी महिला राष्ट्रपति के रूप में शपथ ली थी। उनका शपथ ग्रहण भी 25 जुलाई को हुआ, जिससे यह तारीख एक ऐतिहासिक और भावनात्मक महत्व की वाहक बन गई।

अन्य रोचक तथ्य:
अब तक केवल एक महिला (प्रतिभा पाटिल) राष्ट्रपति बनी थीं, जिनका शपथ ग्रहण भी 25 जुलाई को हुआ था। डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम, जिन्हें “मिसाइल मैन” और “जनता के राष्ट्रपति” के रूप में जाना जाता है, ने भी इसी तारीख को राष्ट्रपति पद ग्रहण किया था।

राजनीतिक विशेषज्ञों के अनुसार 25 जुलाई की तारीख अब भारतीय गणराज्य के लिए उतनी ही महत्वपूर्ण हो गई है। जितनी 26 जनवरी या 15 अगस्त। यह तारीख केवल एक औपचारिकता नहीं, बल्कि लोकतंत्र की स्थिरता और परिपक्वता का प्रतीक बन चुकी है।”

परंपरा, प्रतीक और पहचान
25 जुलाई की तारीख अब केवल एक कैलेंडर तिथि नहीं रही। यह बन चुकी है भारतीय लोकतंत्र के सर्वोच्च पद के शांतिपूर्ण और गरिमामय हस्तांतरण की पहचान। हर 5 साल बाद यह दिन संवैधानिक विश्वास के साथ लोकतांत्रिक उत्तरदायित्व ही नहीं राष्ट्रीय गौरव का उत्सव नजर आता है। भारत के राष्ट्रपति स्वर्गीय नीलम संजीव रेड्डी से प्रारंभ होने वाला यह सफर या संयोग द्रौपदी मुर्मू तक जारी रहा। …(प्रकाश कुमार पांडेय)

Exit mobile version