‘विष्णु’, ‘मोहन’ और ‘भजन’ का सियासी वजन…इस तिकड़ी के सहारे 250 लोकसभा सीट पर बीजेपी का ये है सियासी गणित

Vishnudev Sai Mohan Yadav Rajasthan Bhajanlal Sharma Chief Minister

पांच में से तीन राज्यों में सरकार बनाने के वाली बीजेपी ने अपने इन तीन राज्यों के मुख्यमंत्रियों, उपमुख्यमंत्रियों और विधानसभा अध्यक्षों के सहारे ने प्रदेश में तो जातिगत समीकरणों को साध ही लिया गया है। साथ ही अगले साल 2024 में होले वाले लोकसभा चुनाव के लिए हिंदी पट्टी को भी बड़ा संदेश दिया गया है। हालांकि कुछ लोग विभिन्न जातियों के साथ महिलाओं को दरकिनार किए जाने का आरोप लगा सकते हैं, लेकिन सच्चाई यह है कि लोकसभा चुनाव के लिहाज से बीजेपी और प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने बेहद सधी हुई चाल चल दी है। वैसे कहने को केवल तीन राज्य की सरकारें चुनीं गईं हैं। लेकिन माना जा रहा है कि इन तीन राज्यों के मुख्यमंत्री और दो दो उप मुख्यमंत्री के चयन के साथ बीजेपी ने करीब 250 लोकसभा सीटें साध ली हैं। इन राज्यों के साथ पड़ोसी प्रदेश हरियाणा और ओडिशा के साथ-साथ उत्तरप्रदेश ही नहीं बिहार तक इसका असर पड़ना तय माना जा है।

छत्तीसगढ़ में आदिवासी वर्ग से मुख्यमंत्री

छत्तीसगढ़ आदिवासी बहुल राज्य है। यहां करीब 32 फीसदी आबादी आदिवासी वर्ग से आती है। ऐसे में यहां पर आदिवासी वर्ग से ताल्लुक रखने वाले नेता विष्णुदेव साय को मुख्यमंत्री बनाया गया है। हालांकि बीजेपी चाहती तो छत्तीसगढ़ में किसी ओबीसी चेहरे को मुख्यमंत्री बना सकती थी। उसके पास ओबीसी वर्ग के भी बड़े नेता हैं लेकिन उसने आदिवासी बहुल राज्य में विष्णुदेव साय को चुना। बीजेपी ने चुनाव में इस बार सरगुजा और बस्तर क्षेत्र की आदिवासी बेल्ट वाली करीब 26 में से 22 सीट पर जीत दर्ज की है। ऐसे में छत्तीसगढ़ में साय को मुख्यमंत्री चुनकर बीजेपी ने देश के तमाम आदिवासी बहुत राज्यों और क्षेत्रों को साफ संदेश दिया है। बता दें बीजेपी इससे पहले ही आदिवासी वर्ग से आने वालीं द्रौपदी मुर्मू को देश का राष्ट्रपति बनाकर एक बड़ा दांव खेल चुकी है। वहीं अब छत्तीसगढ़ में विष्णुदेव साय के जरिए साल 2024 में होने लोकसभा चुनाव में बीजेपी पड़ोसी राज्यों मध्य प्रदेश और झारखंड के 22 और 26 फीसदी आदिवासी मतदाताओं को लुभा रही है। इसके साथ ही ओडिशा में भी करीब 23 प्रतिशत से अधिक आदिवासी आबादी है। ऐसे में इन 4 राज्यों को मिलाए तो लोकसभा की 75 सीट होती हैं। इनमें से 20 प्रतिशत सीट आदिवासियों के लिए आरक्षित हैं। इसके अलावा कई ऐसी सीटें हैं जहां आदिवासी वोटर्स का प्रभाव माना जाता है।

मध्य प्रदेश से बिहार यूपी तक निशाना

मध्य प्रदेश की बात करें तो दो डिप्टी सीएम और स्पीकर के साथ जातिगत समीकरण साधने में बीजेपी सफल रही है। 2024 के चुनाव से पहले भी इस चुनाव के लिए वोटरों को खुश ​कर दिया है। यहां पर पिछड़ा वर्ग समुदाय का यादव सीएम बनाया गया है तो दलित वर्ग के जगदीश देवड़ा और ब्राह्मण वर्ग के राजेंद्र शुक्ला डिप्टी सीएम बनाया है। ठाकुर वर्ग से आने वाले पूर्व केंद्रीय मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर को विधानसभा अध्यक्ष बनाया है। मध्य प्रदेश में भी बीजेपी ने एसटी के लिए आरक्षित करीब 47 में से 24 सीटों पर जीत दर्ज की है। इसके इनाम के रूप में यहां पर जगदीश देवड़ा को उप मुख्यमंत्री बनाया गया है। इसके साथा ही सामान्य और सवर्ण कास्ट के वोटरों को साधने ने के लिए बीजेपी ने ब्राह्मण चेहरे राजेन्द्र शुक्ल को भी डिप्टी सीएम की कुर्सी पर बैठा दिया है।

बीजेपी ने डॉ. मोहन यादव को सीएम बनाकर यूपी ही नहीं बिहार में भी संदेश भेज दिया है। बिहार और उत्तर प्रदेश को मिलाए तो लोकसभा की 120 सीट इन दोनों राज्य में हैं। असल में मध्य प्रदेश में यादव आबादी केवल छह प्रतिशत ही है। लेकिन बिहार में यह बढ़कर 14 फीसदी से ज्यादा और उत्तरप्रदेश में करीब 10 फीसदी ओबीसी हैं। इस तरह मप्र में यादव सीएम बनाकर करीब 30 फीसदी आबादी को उसके सशक्तिकरण का संदेश दिया है। इस कदम से यूपी में अखिलेश यादव तो बिहार में तेजस्वी यादव के रणनीतियों को भी झटका लगना तय है।

मध्यप्रदेश और छत्तीसगढ़ के बाद बीजेपी ने राजस्थान के नए मुख्यमंत्री की घोषणा कर दी है। राज्य की सांगानेर विधानसभा सीट से विधायक भजनलाल शर्मा को बीजेपी विधायक दल का नेता चुन लिया गया है। पहली बार विधायक बने भजनलाल अब राज्य के नए सीएम होंगे। राजस्थान बीजेपी प्रदेश कार्यालय में हुई विधायक दल की बैठक में बीजेपी आलाकमान द्वारा तय किए गए नाम की घोषणा की गई। सभी ने उस नाम पर सहमति जताई। पूर्व सीएम वसुंधरा राजे ने ही नए मुख्यमंत्री के नाम का प्रस्ताव रखा था। भजनलाल शर्मा संघ पृष्ठभूमि से आते हैं। वह मूल रूप से भरतपुर के रहने वाले हैं। वर्तमान में वह प्रदेश महासचिव के पद पर भी थे। भजन लाल शर्मा भरतपुर के रहने वाले हैं। बाहरी होने के आरोप के बावजूद उन्होंने सांगानेर से भारी अंतर से जीत हासिल की थी। शर्मा ने कांग्रेस के पुष्पेंद्र भारद्वाज को 48 हजार 081 वोटों से हराया था।भजनलाल शर्मा को संघ और संगठन दोनों का करीबी माना जाता है। भजन लाल शर्मा ब्राह्मण समुदाय से आते हैं। उन्हें मौजूदा विधायक अशोक लाहोटी का टिकट काटकर उम्मीदवार बनाया गया है। उन्होंने लंबे समय तक बीजेपी और संगठन में काम किया है।राजस्थान में सीएम के नाम के ऐलान के साथ ही दो डिप्टी सीएम के नाम का भी ऐलान कर दिया गया है। दीया कुमारी और प्रेम चंद्र बैरवा को उपमुख्यमंत्री बनाया गया है। जबकि वासुदेव देवनानी विधानसभा अध्यक्ष होंगे।

मरुभूमि में ब्राह्मण से बड़ा दांव

अब अगर राजस्थान की बात करें तो यहां पर भजनलाल शर्मा ब्राह्मण सीएम हैं। दीया कुमारी राजपूत हैंऔर प्रेमचंद बैरवा दलित डिप्टी सीएम हैं। राजस्थान में हालांकि ब्राह्मण वोटर सीधेतौर पर सियासी रूप से प्रभावशाली नहीं हैं। लेकिन पड़ोसी राज्यों में ब्राह्मण बीजेपी के लिए बड़ा वोट बैंक माने जाते हैं। खासतौर पर उत्तरप्रदेश में जोकि राजस्थान के उत्तर-पूर्वी सीमा से लगा हुआ है। यूपी में ब्राह्मण आबादी करीब 10 फीसदी है। यह सामान्य वोटर्स में एक बड़ा हिस्सा है। इसके अलावा हरियाणा में इससे भी करीब 12 फीसदी ब्राह्मण वर्ग के मतदाता हैं। इसके अलावा मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ दोनों में पांच-पांच फीसदी ब्राह्मण आबादी है। इन सभी राज्यों से बड़ी संख्या में सांसद लोकसभा जाते हैं, जिनमें जनरल कैटेगरी के सांसदों की संख्या भी अच्छी-खासी है।

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