13 जून 2025 को अहमदाबाद में हुए भीषण विमान हादसे ने पूरे देश को हिला कर रख दिया। एयर इंडिया की फ्लाइट AI171, जो लंदन जा रही थी, टेकऑफ के कुछ ही समय बाद अनियंत्रित होकर एक अस्पताल के हॉस्टल भवन से जा टकराई। इस हादसे में 265 लोगों की मौत हो गई, लेकिन एक नाम रमेश विश्वास कुमार ऐसा रहा जिसने चमत्कारिक रूप से मौत को मात दी। अस्पताल के बिस्तर पर लेटे विश्वास कुमार ने मीडिया के साथ भी अपनी आपबीती साझा की और बताया कि प्लेन जैसे ही रनवे पर स्पीड पकड़ने लगा, तभी कुछ अजीब-सा लगा था।
विमान हादसे में बचे रमेश विश्वास कुमार से की पीएम मोदी ने मुलाकात
प्लेन से कूदे नहीं थे रमेश
सीट समेत मैं बाहर गिर गये थे
रमेश विश्वास कुमार ने पीएम को बताया घटनाक्रम
रमेश ने बताया प्लेन क्रैश में भी कैसे बचे जिंदा
आज शुक्रवार को अहमदाबाद पहुंचे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी खुद अस्पताल पहुंचे और रमेश से मुलाकात कर उनका हालचाल जाना। दोनों के बीच यह मुलाकात भावुक कर देने वाली रही।
हादसे के चश्मदीद…रमेश की जुबानी आपबीती
बुरी तरह जले बाएं हाथ के साथ अस्पताल के बिस्तर पर लेटे रमेश ने बताया कि टेकऑफ के वक्त ही उन्हें कुछ अजीब सा महसूस हुआ था। जैसे सब कुछ कुछ सेकंड के लिए थम गया हो। फिर अचानक कई हरी और सफेद लाइट्स जगमगाने लगीं। इसके बाद जोरदार झटका महसूस हुआ। तब तक विमान सीधे हॉस्टल की इमारत से जा टकराया था।
रमेश विश्वास कुमार ने कहा उन्होंने खुद को सीट समेत नीचे गिरता पाया। शायद मेरी किस्मत थी कि जिस हिस्से में मैं था वो नीचे गिरा और ऊपर के हिस्से में आग लग गई।
आंखों के सामने एयर होस्टेस और दर्जनों यात्रियों को जलते देखा
मौत से मुठभेड़… जिंदगी की जीत
रमेश विश्वास कुमार ने बताया कि उनकी आंखों के सामने दो एयर होस्टेस, एक अंकल-आंटी और दर्जनों यात्री जलते हुए देखे, लेकिन वे सीट सहित नीचे की ओर गिर गए और दरवाजे से बाहर निकलने में सफल हो गए। उनके मुताबिक अगर 5 सेकंड की भी देरी होती, तो शायद वे भी इस दुर्घटना का शिकार हो जाते।
पीएम मोदी की प्रतिक्रिया
प्रधानमंत्री मोदी ने रमेश के साहस और जीवटता की सराहना की। उन्होंने कहा “ईश्वर की कृपा और आपकी हिम्मत ने आपको बचाया है। देश आपके इस अद्भुत संकल्प और जीवटता से प्रेरणा लेगा।
बता दें रमेश विश्वास कुमार का इलाज अहमदाबाद के सिविल अस्पताल में चल रहा है। डॉक्टरों के मुताबिक उनका बायां हाथ झुलस गया है, लेकिन उनकी हालत अब स्थिर है। उन्हें विशेष निगरानी में रखा गया है। इस हादसे ने जहां कई परिवारों को गहरे दुख में डुबो दिया, वहीं रमेश विश्वास की कहानी इस बात का प्रतीक है कि जब तक ऊपर वाला चाहता है, तब तक कोई नहीं छू सकता। उनकी जीवटता और ईश्वर में आस्था ने उन्हें “मौत के मुंह से बाहर” निकाल लिया। (प्रकाश कुमार पांडेय)