तीसरे चीन-यूरोप वैज्ञानिक फोरम का उद्घाटन समारोह 30 अक्टूबर को जर्मनी के फ्रैंकफर्ट
में आयोजित हुआ। इस फोरम में चीन और यूरोप के कई देशों के वैज्ञानिकों, विद्वानों और
उद्योग जगत के प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया। इस दौरान कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI), कार्बन
न्यूट्रलिटी और नई ऊर्जा जैसे आधुनिक तकनीकी क्षेत्रों पर विचारों का आदान-प्रदान किया
गया। साथ ही, चीन और यूरोप के बीच वैज्ञानिक एवं तकनीकी नवाचार और औद्योगिक
सहयोग की संभावनाओं पर भी चर्चा हुई।
इस साल के फोरम का विषय है, चीन और यूरोप की बुद्धिमत्ता का संगम, भविष्य की नई
शुरुआत फोरम की आयोजन समिति के अध्यक्ष और यूरोपीय विज्ञान अकादमी के सदस्य
हामिद रेजा करीमी ने कहा कि दुनिया आज तकनीकी बदलाव, सार्वजनिक स्वास्थ्य, सतत
ऊर्जा विकास और पर्यावरण संरक्षण जैसी कई जटिल चुनौतियों का सामना कर रही है। ऐसे
में कोई भी देश या विषय अकेले इन सभी चुनौतियों का समाधान नहीं कर सकता। उन्होंने
उम्मीद जताई कि इस फोरम के जरिए चीन और यूरोप के वैज्ञानिकों के बीच संयुक्त शोध
परियोजनाओं, संस्थागत साझेदारी, प्रतिभाओं के आदान-प्रदान और लंबे समय तक चलने
वाले सहयोग को बढ़ावा मिलेगा।
आयोजकों के मुताबिक, इस फोरम के तहत आठ समानांतर सत्र आयोजित किए गये। इनमें
कृत्रिम बुद्धिमत्ता, नैदानिक चिकित्सा, कार्बन न्यूट्रलिटी और नई ऊर्जा, रोबोटिक्स एवं
जटिल प्रणालियां, स्मार्ट सिटी और भवन निर्माण डिजाइन जैसे विषय शामिल हैं। इसके
अलावा, फोरम में शैक्षणिक और विशेष विषयों पर कुल 70 प्रस्तुतियां भी दी गईं।
गौरतलब है कि चीन-यूरोप वैज्ञानिक फोरम का मुख्य उद्देश्य दोनों पक्षों के बीच शैक्षणिक
आदान-प्रदान और वैज्ञानिक सहयोग को मजबूत करना है। इसके साथ ही, उच्चस्तरीय
प्रतिभाओं और नवाचार से जुड़ी कंपनियों के बीच सहयोग और तालमेल को बढ़ावा देना भी
इसका एक अहम लक्ष्य है। इस फोरम का पहला आयोजन अक्तूबर, 2024 में जर्मनी के
फ्रैंकफर्ट में ही किया गया था।
(साभार- चाइना मीडिया ग्रुप, पेइचिंग)





