सुबह घने कोहरे की चादर, बर्फीली हवाओं से बढ़ी ठिठुरन…फिलहाल ऐसा ही रहेगा मौसम का मिजाज

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सुबह घने कोहरे की चादर, बर्फीली हवाओं से बढ़ी ठिठुरन

भोपाल–ग्वालियर समेत 20 जिलों में विजिबिलिटी बेहद कम, 10 फरवरी तक मौसम बिगड़ने के आसार

भोपाल। मध्यप्रदेश में मौसम के बदले मिज़ाज ने एक बार फिर ठंड बढ़ा दी है। पिछले चार दिनों से बारिश और ओलावृष्टि से परेशान प्रदेश अब घने कोहरे की गिरफ्त में आ गया है। बुधवार सुबह भोपाल, ग्वालियर समेत करीब 20 जिलों में कोहरा इतना घना रहा कि विजिबिलिटी बेहद कम दर्ज की गई। रीवा में हालात यह रहे कि 100 मीटर की दूरी पर भी कुछ दिखाई नहीं दे रहा था।

कोहरे और तेज हवाओं के कारण प्रदेश के कई हिस्सों में जनजीवन प्रभावित हुआ है। भोपाल, इंदौर और ग्वालियर-चंबल संभाग में धुंध इतनी घनी थी कि सड़कों पर वाहन चालकों को लाइट जलाकर बेहद धीमी गति से चलना पड़ा। कम दृश्यता के चलते सुबह के समय ट्रैफिक की रफ्तार थमी नजर आई।

5 फरवरी से फिर सक्रिय होगा वेस्टर्न डिस्टरबेंस

मौसम विभाग ने चेतावनी दी है कि राहत अभी दूर है। गुरुवार 5 फरवरी से हिमालयी क्षेत्र में एक नया वेस्टर्न डिस्टरबेंस सक्रिय होने जा रहा है। इसके असर से मध्यप्रदेश में तेज हवाएं चलेंगी, जिससे ठंड और बढ़ सकती है। हालांकि तत्काल बारिश का कोई अलर्ट जारी नहीं किया गया है, लेकिन 10 फरवरी तक मावठा गिरने के प्रबल आसार जताए गए हैं।

ओलावृष्टि के बाद छाया कोहरा

मौसम विभाग का पूर्वानुमान एक बार फिर सटीक साबित हुआ है। चक्रवात और पश्चिमी विक्षोभ के असर से मंगलवार को भोपाल, ग्वालियर और रीवा सहित 15 से अधिक जिलों में गरज-चमक के साथ बारिश हुई और कई जगह ओले गिरे। इसके बाद बुधवार सुबह पूरा प्रदेश कोहरे की सफेद चादर में लिपटा नजर आया।

इन जिलों में रहा मध्यम से घना कोहरा

भोपाल, इंदौर, ग्वालियर, मुरैना, भिंड, दतिया, श्योपुर, शिवपुरी, गुना, अशोकनगर, नीमच, मंदसौर, आगर-मालवा, राजगढ़, विदिशा, रायसेन, सागर, निवाड़ी, टीकमगढ़, छतरपुर, दमोह, पन्ना, सतना, रीवा और मऊगंज में मध्यम से घना कोहरा दर्ज किया गया।

फसलों के लिए राहत, लेकिन खतरा भी

मौसम विशेषज्ञों के अनुसार हालिया बारिश रबी फसलों के लिए अमृत समान है, लेकिन यदि कोहरा लंबे समय तक बना रहता है तो फसलों में फंगस लगने का खतरा बढ़ सकता है। ठंड और कोहरे के कारण पार्कों में मॉर्निंग वॉक करने वालों की संख्या भी कम हो गई है, वहीं स्कूल जाने वाले बच्चों के लिए यह मौसम चुनौती बनता जा रहा है।

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