दिल्ली एनसीआर में इन दिनों लोगों को सांस लेना दूभर हो गया है। लोगों की सांस घुट रही है। राहत की आस भी नजर नहीं आ रही है। इतना ही नहीं दिल्ली-NCR के आसमान में जहरीला स्मॉग क्यों टिक गया है।
ठंडी रातें और बढ़ते कण – राजधानी की हवा फिर बनी जानलेवा
नई दिल्ली। दिल्ली और एनसीआर के लोग इन दिनों हर सांस के साथ जहरीली हवा अपने भीतर खींच रहे हैं। सर्दी की दस्तक के साथ ही राजधानी का आसमान फिर धुंधला हो गया है। रविवार को दिल्ली-एनसीआर का एयर क्वालिटी इंडेक्स (AQI) 366 पर पहुंच गया, जो ‘बहुत खराब’ श्रेणी में आता है। पीएम2.5 और पीएम10 जैसे खतरनाक कणों की मात्रा खतरनाक स्तर पर पहुंच गई है, जिससे बच्चों, बुजुर्गों और सांस या दिल के मरीजों के लिए हालात बेहद गंभीर हो गए हैं। मौसम विभाग और पर्यावरण एजेंसियों का अनुमान है कि 4 नवंबर तक राहत की कोई उम्मीद नहीं है।
- दिल्ली की हवा फिर जहरीली
- सांस लेना हुआ मुश्किल काम
- एयर क्वालिटी इंडेक्स 366 पहुंचा
- कमजोर हवाओं ने फंसा दिया धुआं
- पीएम2.5 और पीएम10 खतरनाक स्तर
- बच्चे-बुजुर्ग सबसे ज्यादा प्रभावित
- दिल्ली-एनसीआर में धुंध का कहर
- चार नवंबर तक राहत नहीं
- वेंटिलेशन इंडेक्स बेहद नीचे गया
- स्मॉग से दिल्ली में हाहाकार
कब, कैसे और क्यों बिगड़ी हवा?
दिल्ली में हवा की खराबी की सबसे बड़ी वजह बनी है — कमजोर हवाएं और ठंडी परत (Inversion Layer)। रविवार को हवा की गति 8 किलोमीटर प्रति घंटे से भी कम दर्ज की गई, जिससे प्रदूषक तत्व जमीन के पास ही अटक गए। केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB) के अनुसार, शनिवार को जहां दिल्ली का AQI 303 था, वहीं रविवार को यह तेजी से बढ़कर 366 तक पहुंच गया। यानी हवा में मौजूद जहरीले तत्वों की मात्रा खतरनाक रूप से बढ़ गई। दिल्ली के एयर क्वालिटी अर्ली वॉर्निंग सिस्टम (AQEWS) ने चेतावनी दी है कि जब हवा की गति 10 किलोमीटर प्रति घंटे से कम और वेंटिलेशन इंडेक्स 6,000 वर्ग मीटर प्रति सेकंड से नीचे होता है, तब प्रदूषण फैलने के बजाय एक ही जगह ठहर जाता है। यही वजह है कि दिल्ली का स्मॉग अब आसमान में जकड़ बना चुका है।
पीएम2.5 और पीएम10: ये कण क्यों हैं खतरनाक?
प्रदूषण की सबसे बड़ी वजह हैं ये दो सूक्ष्म कण —
PM2.5: व्यास 2.5 माइक्रोमीटर से छोटे होते हैं। इतने छोटे कि ये सीधे फेफड़ों में घुसकर खून तक पहुंच जाते हैं। PM10: आकार में थोड़े बड़े, लेकिन सांस के साथ अंदर जाकर श्वसन तंत्र को नुकसान पहुंचाते हैं। रविवार को दिल्ली में PM2.5 का स्तर 189.6 और PM10 का स्तर 316 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर दर्ज किया गया। यह विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) की सीमा से कई गुना अधिक है। WHO के अनुसार, PM2.5 का सुरक्षित स्तर 60 और PM10 का 100 से नीचे होना चाहिए। इन कणों की अधिकता से लोगों को सांस लेने में तकलीफ, आंखों में जलन, खांसी, अस्थमा के दौरे, फेफड़ों और हृदय रोगों का खतरा बढ़ जाता है।
एनसीआर और अन्य शहरों की भी हालत खराब
दिल्ली अकेली नहीं है जो इस जहरीली हवा की गिरफ्त में है। आसपास के शहरों की हवा भी लगभग समान स्थिति में है।
शहर AQI श्रेणी
- गाजियाबाद 351 बहुत खराब
- गुरुग्राम 357 बहुत खराब
- नोएडा 348 बहुत खराब
- ग्रेटर नोएडा 340 बहुत खराब
- फरीदाबाद 215 खराब
- धरूहेड़ा (हरियाणा) 434 गंभीर
- भिवंडी (महाराष्ट्र) 376 बहुत खराब
दिल्ली के वाजिरपुर में AQI 413 दर्ज किया गया, जो “गंभीर” श्रेणी में आता है।
सीपीसीबी की रिपोर्ट बताती है कि दिल्ली के 3 स्टेशन गंभीर स्तर (400 से ऊपर) और 28 स्टेशन बहुत खराब (300 से ऊपर) दर्ज किए गए हैं।
मौसम भी दे रहा है प्रदूषण को बढ़ावा
मौसम विभाग के आंकड़ों के अनुसार, रविवार को दिल्ली का अधिकतम तापमान 30.7°C (सामान्य से 0.5°C कम) और न्यूनतम तापमान 16.8°C (सामान्य से 1.5°C ज्यादा) रहा। नमी का स्तर 75% तक पहुंच गया और सोमवार को हल्के कोहरे की संभावना जताई गई है। कम तापमान, नमी और ठहरी हवा – ये तीनों मिलकर स्मॉग को और ज्यादा घना बना रहे हैं।
दिल्ली क्यों बन जाती है हर साल गैस चेंबर?
हर सर्दी दिल्ली में प्रदूषण का ग्राफ ऊपर चढ़ता है। इसके पीछे कई वजहें हैं। पराली जलाना: पंजाब और हरियाणा से उठने वाला धुआं हवा के साथ दिल्ली तक पहुंच जाता है। वाहनों की धुएं और ट्रैफिक जाम: राजधानी में बढ़ते वाहनों की संख्या प्रदूषण का बड़ा कारण है। निर्माण कार्य और सड़क की धूल: NCR के विकास कार्यों से लगातार धूलकण हवा में मिल रहे हैं। ठंडी और धीमी हवाएं: सर्दी में हवा की गति धीमी होने से प्रदूषक जमीन के करीब जम जाते हैं।
सेहत पर क्या असर पड़ रहा है?
विशेषज्ञों का कहना है कि दिल्ली की हवा अब “साइलेंट किलर” बन चुकी है। फेफड़ों की कार्यक्षमता 20-30% तक घट सकती है। अस्थमा और सीओपीडी के मरीजों की हालत बिगड़ सकती है। बच्चों में एलर्जी और खांसी बढ़ रही है। बुजुर्गों में दिल की धड़कन और ब्लड प्रेशर बढ़ने का खतरा रहता है। AIIMS के पल्मोनोलॉजिस्ट डॉक्टरों ने सलाह दी है कि सुबह-सुबह वॉक या एक्सरसाइज से फिलहाल बचें, क्योंकि इस समय हवा में प्रदूषण का स्तर सबसे अधिक होता है।
राहत की उम्मीद कब?
एयर क्वालिटी अर्ली वॉर्निंग सिस्टम का कहना है कि 4 नवंबर तक कोई खास सुधार नहीं होगा। केवल तभी राहत मिल सकती है जब हवा की रफ्तार बढ़े या हल्की बारिश हो जाए। फिलहाल, प्रशासन ने स्कूलों में बच्चों को आउटडोर एक्टिविटीज़ से बचाने की सलाह दी है और लोगों को मास्क पहनने की अपील की है। दिल्ली और एनसीआर में सांस लेना एक चुनौती बन चुका है। कमजोर हवाएं, ठंडी रातें और बढ़ते प्रदूषक कण — मिलकर राजधानी को फिर “गैस चेंबर” में बदल रहे हैं। जब तक सख्त कदम नहीं उठाए जाते — पराली जलाने पर रोक, वाहन उत्सर्जन नियंत्रण और निर्माण धूल प्रबंधन — तब तक यह जहरीली धुंध हर सर्दी दिल्ली के सिर पर छाई रहेगी। (प्रकाश कुमार पांडेय)





