दक्षिण-पूर्वी दिल्ली के बटला हाउस इलाके में स्थित मुरादी रोड पर डीडीए (दिल्ली विकास प्राधिकरण) की संभावित डिमोलिशन कार्रवाई से पहले ही मकानों और दुकानों को खाली करने की प्रक्रिया तेज हो गई है। जिन दुकानों पर डीडीए ने नोटिस चस्पा किए थे, वहां अब दुकानदार खुद ही अपना सामान समेटने में जुट गए हैं।
इलाके में पुलिस द्वारा बैरिकेडिंग शुरू करने के साथ ही डिमोलिशन की तैयारी की चर्चा और अधिक तेज हो गई है। हालांकि, फिलहाल किसी भी इमारत पर बुलडोजर नहीं चला है, लेकिन लोगों में तनाव और अनिश्चितता बनी हुई है।
दुकानदारों में चिंता, खुद ही समेट रहे सामान
मुरादी रोड पर जिन दुकानों को डीडीए द्वारा नोटिस दिए गए थे, वहां के दुकानदारों ने कहा कि “हमने पहले ही सामान पैक कर लिया था, अब दुकानें खाली भी कर रहे हैं। हमें नहीं पता कार्रवाई कब होगी, लेकिन बैरिकेडिंग देखकर हम तैयार हो गए हैं।”
इलाके के बारात घर के पास पुलिस ने बैरिकेडिंग का सामान दीवार किनारे जमा कर रखा है, जिससे यह संकेत मिल रहा है कि ध्वस्तीकरण किसी भी समय हो सकता है। हालांकि अब तक भारी पुलिस फोर्स की तैनाती नहीं की गई है।
कोर्ट के निर्देश के बाद भी संभावित कार्रवाई
दिल्ली हाई कोर्ट ने हाल ही में बटला हाउस में डीडीए द्वारा प्रस्तावित ध्वस्तीकरण पर 10 जुलाई तक यथास्थिति बनाए रखने का आदेश दिया है। 16 जून को न्यायमूर्ति तेजस करिया ने डीडीए और अन्य पक्षों को चार सप्ताह में जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया। कोर्ट ने कहा कि “इस बीच, पक्ष यथास्थिति बनाए रखें।” सूत्रों के अनुसार, जिन संपत्तियों को लेकर कोर्ट से स्टे मिला है, उन्हें फिलहाल छोड़ दिया जाएगा, लेकिन अन्य प्रॉपर्टी पर कार्रवाई की जा सकती है। पुलिस और डीडीए के अधिकारी इस पर औपचारिक बयान से बच रहे हैं।
बारिश के बीच पुलिस की सतर्कता
भारी बारिश के बावजूद मंगलवार को पुलिस कर्मियों को इलाके में बैरिकेडिंग करते हुए देखा गया। सूत्रों ने बताया कि “पुलिस ने इलाके में अवरोधक लगाए हैं और कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए मुखबिर नेटवर्क को भी सक्रिय कर दिया है। इलाके में अस्थायी शांति के बीच लोगों में बेचैनी है। स्थानीय निवासी और दुकानदारों को अब हाई कोर्ट की अगली सुनवाई (10 जुलाई) तक राहत की उम्मीद है, लेकिन डीडीए की चुप्पी और बैरिकेडिंग के कारण आशंका बनी हुई है कि किसी भी क्षण कार्रवाई हो सकती है। बटला हाउस की गलियों में सन्नाटा पसरा है, लेकिन अंदरूनी हलचल बहुत तेज़ है। डीडीए की ओर से की जा रही तैयारी, पुलिस की गतिविधियाँ और कोर्ट के निर्देश – तीनों के बीच फंसे स्थानीय नागरिक अभी भी कानूनी राहत और स्थायित्व की उम्मीद लगाए बैठे हैं। आगामी 10 जुलाई की अदालत की सुनवाई इस प्रकरण की दिशा तय करेगी।……(प्रकाश कुमार पांडेय)





