पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष के बीच दुनिया के सबसे अहम समुद्री मार्गों में से एक स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को लेकर नई आशंकाएं सामने आई हैं। अमेरिका का दावा है कि ईरान इस समुद्री मार्ग में बारूदी सुरंगें यानी समुद्री खदानें बिछाने की तैयारी कर रहा था। इसी आशंका के बीच अमेरिकी सेना ने ईरान के 16 माइनलेयर जहाजों को नष्ट करने की कार्रवाई की है। इस घटना ने वैश्विक शिपिंग, तेल आपूर्ति और अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा को लेकर चिंताएं और बढ़ा दी हैं।
स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में बारूदी सुरंगों का खतरा
स्ट्रेट ऑफ होर्मुज दुनिया का वह समुद्री रास्ता है जहां से वैश्विक तेल आपूर्ति का बड़ा हिस्सा गुजरता है। खाड़ी देशों से निकलने वाला तेल इसी रास्ते से होकर एशिया, यूरोप और अन्य हिस्सों तक पहुंचता है। ऐसे में अगर यहां समुद्री खदानें बिछाई जाती हैं तो यह न केवल क्षेत्रीय बल्कि वैश्विक आर्थिक संकट का कारण बन सकता है।
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इस मामले को लेकर ईरान को कड़ी चेतावनी दी है। उन्होंने कहा कि अमेरिका के पास अभी इस बात की पक्की पुष्टि नहीं है कि ईरान ने वास्तव में खदानें बिछा दी हैं, लेकिन अगर ऐसा हुआ है तो उन्हें तुरंत हटाना होगा। ट्रंप ने साफ कहा कि यदि समुद्री मार्ग को खतरे में डालने की कोशिश हुई तो अमेरिका सैन्य कार्रवाई से पीछे नहीं हटेगा।
दुनिया की ऊर्जा आपूर्ति पर मंडराया संकट
अमेरिका ने ईरान के जहाज किए नष्ट
समुद्री खदानें कैसे करती हैं हमला
माइनलेयर जहाजों की गुप्त रणनीति
ट्रंप की चेतावनी से बढ़ा तनाव
तेल टैंकरों और शिपिंग पर असर
स्ट्रेट ऑफ होर्मुज क्यों है इतना अहम
पेंटागन के मुताबिक अमेरिकी सेना ने जिन 16 जहाजों को नष्ट किया है, वे माइनलेयर जहाज थे। इन जहाजों का इस्तेमाल समुद्र में खदानें बिछाने के लिए किया जाता है। अमेरिकी अधिकारियों का कहना है कि इन जहाजों में या तो खदानें पहले से लदी थीं या फिर उन्हें बिछाने की तैयारी की जा रही थी। इससे यह आशंका मजबूत हुई कि ईरान इस महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग को बाधित करने की रणनीति पर काम कर रहा था।
समुद्री खदानें दरअसल पानी के भीतर लगाए जाने वाले विस्फोटक उपकरण होते हैं। इनका मकसद दुश्मन के जहाजों को नुकसान पहुंचाना या समुद्री रास्तों को असुरक्षित बनाना होता है। इन खदानों के कई प्रकार होते हैं। कुछ खदानें ऐसी होती हैं जो समुद्र की सतह के नीचे रस्सी से बंधी रहती हैं और जहाज के टकराते ही फट जाती हैं। वहीं कुछ खदानें समुद्र की तलहटी में रखी जाती हैं और जहाज के ऊपर से गुजरने पर सक्रिय हो जाती हैं।
तकनीकी रूप से ये खदानें कई तरह से काम कर सकती हैं। कुछ संपर्क के जरिए फटती हैं, यानी जहाज के सीधे टकराने पर विस्फोट होता है। कुछ चुंबकीय प्रणाली पर आधारित होती हैं जो बड़े जहाजों के लोहे के ढांचे को पहचान कर सक्रिय हो जाती हैं। वहीं कुछ ध्वनि आधारित खदानें होती हैं जो जहाज के इंजन की आवाज से सक्रिय हो जाती हैं। इसके अलावा दबाव आधारित खदानें भी होती हैं जो पानी में जहाज के गुजरने से पैदा होने वाले दबाव को पहचान कर विस्फोट कर देती हैं।
विशेषज्ञों के अनुसार इन खदानों में 100 से 500 किलोग्राम तक विस्फोटक सामग्री हो सकती है। यही वजह है कि एक छोटी सी खदान भी बड़े जहाज को गंभीर नुकसान पहुंचा सकती है। यदि कोई बड़ा तेल टैंकर इन खदानों की चपेट में आ जाए तो न केवल जहाज डूब सकता है बल्कि समुद्र में बड़े पैमाने पर तेल फैलने से पर्यावरणीय संकट भी पैदा हो सकता है।
माइनलेयर जहाज इस पूरी प्रक्रिया में अहम भूमिका निभाते हैं। ये छोटे या मध्यम आकार के जहाज होते हैं जिन्हें विशेष रूप से खदानें बिछाने के लिए तैयार किया जाता है। इनमें रेल या क्रेन जैसी व्यवस्था होती है जिससे बड़ी संख्या में खदानों को तेजी से समुद्र में डाला जा सकता है। अक्सर ये जहाज रात के समय या कम निगरानी वाले इलाकों में काम करते हैं ताकि उनकी गतिविधियों का पता न चल सके।
ईरान के पास ऐसे कई छोटे जहाज और तेज गति वाली नावें होने की जानकारी पहले भी सामने आती रही है। इन्हें आसानी से छिपाया जा सकता है और कम समय में बड़ी संख्या में खदानें बिछाई जा सकती हैं। अमेरिकी सेना का मानना है कि यही कारण है कि उसने संभावित खतरे को देखते हुए पहले ही इन जहाजों को निशाना बनाया। इस बीच अमेरिकी प्रशासन ने यह भी संकेत दिया है कि यदि जरूरत पड़ी तो अमेरिकी नौसेना इस समुद्री मार्ग से गुजरने वाले जहाजों को सुरक्षा प्रदान कर सकती है। हालांकि अभी तक किसी तेल टैंकर को औपचारिक रूप से सैन्य सुरक्षा देने की पुष्टि नहीं हुई है।
स्ट्रेट ऑफ होर्मुज भौगोलिक रूप से बेहद संकरा समुद्री मार्ग है। इसकी चौड़ाई कई जगहों पर केवल लगभग 33 किलोमीटर है और जहाजों के लिए निर्धारित मार्ग उससे भी संकरा होता है। ऐसे में यदि यहां एक भी समुद्री खदान विस्फोट कर जाए तो पूरा समुद्री यातायात प्रभावित हो सकता है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि इस मार्ग में बड़े पैमाने पर खदानें बिछा दी गईं तो वैश्विक तेल बाजार में भारी उथल-पुथल मच सकती है। इससे न केवल तेल की कीमतें बढ़ेंगी बल्कि कई देशों की ऊर्जा आपूर्ति भी प्रभावित हो सकती है।
कुल मिलाकर स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में बढ़ता सैन्य तनाव दुनिया के लिए एक बड़ा रणनीतिक और आर्थिक खतरा बनता जा रहा है। अमेरिका, ईरान और उनके सहयोगी देशों के बीच जारी टकराव ने इस समुद्री मार्ग को वैश्विक राजनीति के केंद्र में ला खड़ा किया है। आने वाले दिनों में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि क्या कूटनीतिक प्रयास इस संकट को कम कर पाते हैं या फिर यह तनाव और गहराता है।