1000 रूसी फाइटर जेट बना चुकी नासिक की HAL फैक्ट्री अब स्वदेशी ‘तेजस’ की उड़ान में जुटी

Nashik based HAL factory which has already

भारत की वायुसेना के इतिहास में एक नया अध्याय जुड़ने जा रहा है। नासिक की हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (HAL) फैक्ट्री, जिसने पिछले दशकों में लगभग 1000 रूसी लड़ाकू विमान बनाए, अब पूरी तरह स्वदेशी तेजस एलसीए एमके1ए और एचटीटी-40 ट्रेनर विमानों के निर्माण में जुट गई है। यह बदलाव न केवल तकनीकी रूप से बड़ा कदम है, बल्कि भारत के ‘आत्मनिर्भर भारत’ अभियान की उड़ान भी है।

रूसी विमानों से स्वदेशी मिशन तक

नासिक की यह फैक्ट्री दशकों से भारतीय वायुसेना की रीढ़ मानी जाती रही है। यह वही जगह है जहां कभी सोवियत डिजाइन वाले लड़ाकू विमान, जैसे मिग-21 और सु-30 एमकेआई, जोड़े जाते थे। फैक्ट्री के रिकॉर्ड बताते हैं कि यहां से 575 मिग-21 विमान निकले, जिन्हें बाद में “मिग-21 बाइसन” नाम से अपग्रेड किया गया। यह वही विमान था जिसने दशकों तक भारत की हवाई सीमाओं की रक्षा की। इसके बाद इसी जगह से सु-30 एमकेआई जैसे शक्तिशाली ट्विन-इंजन लड़ाकू विमान बनाए गए, जिनकी संख्या मिलाकर लगभग 1000 तक पहुंच गई। इन रूसी विमानों ने वायुसेना को मजबूती दी, लेकिन वे विदेशी तकनीक पर आधारित थे। अब भारत ने अपना ध्यान स्वदेशी उत्पादन की ओर मोड़ लिया है।

तेजस एमके1ए की नई शुरुआत

नासिक का यह एचएएल संयंत्र अब एक नए युग की शुरुआत कर रहा है। यहां अब स्वदेशी ‘तेजस एलसीए एमके1ए’ (Light Combat Aircraft) और एचटीटी-40 बेसिक ट्रेनर विमान बनाए जाएंगे। इन विमानों का डिज़ाइन और तकनीक पूरी तरह भारतीय है — एरोनॉटिकल डेवलपमेंट एजेंसी (ADA) और एचएएल की साझेदारी में विकसित। तेजस एमके1ए को भारतीय वायुसेना ने पहले ही मंजूरी दे दी है और 83 विमानों का ऑर्डर दिया गया है। यह विमान हल्का, तेज और अत्याधुनिक एवियोनिक्स सिस्टम से लैस है। नासिक की नई लाइन में पहले साल 8 तेजस विमान बनाए जाएंगे, और बाद में उत्पादन बढ़ाकर हर साल 24 विमान तक किया जाएगा।

500 करोड़ की आधुनिक फैक्ट्री

इस बड़े बदलाव के लिए एचएएल ने नासिक प्लांट को आधुनिक तकनीक से लैस किया है। करीब 500 करोड़ रुपये के निवेश से इस विशाल परिसर को पूरी तरह नया रूप दिया गया है। यह प्लांट 13 लाख वर्ग फुट में फैला हुआ है, जिसमें पुराने सोवियत-युग के हैंगरों को हटाकर नई असेंबली लाइनें बनाई गई हैं। अब यहां अत्याधुनिक जिग्स, फिक्सचर और टूलिंग सिस्टम लगाए गए हैं, जो तेजस और एचटीटी-40 के मुख्य हिस्सों — जैसे फ्रंट, सेंटर और रियर फ्यूज़लेज, विंग्स, एयर इनटेक और टेल यूनिट — को जोड़ने का काम करेंगे। फैक्ट्री अधिकारियों के अनुसार, “नासिक प्लांट अब पूरी तरह तैयार है। यह केवल एक उत्पादन केंद्र नहीं, बल्कि भारत की आत्मनिर्भरता की मिसाल है।”

हर साल 24 विमान लक्ष्य

भारतीय वायुसेना को वर्तमान समय में नए विमानों की भारी जरूरत है। मिग-21 जैसे पुराने विमानों को अब चरणबद्ध तरीके से रिटायर किया जा रहा है। इस कमी को पूरा करने के लिए एचएएल ने बेंगलुरु और नासिक दोनों जगह तेजस उत्पादन लाइनें तैयार की हैं।

इसके अलावा, नासिक की फैक्ट्री अभी भी 15 नए सु-30 एमकेआई विमानों के ऑर्डर पूरे कर रही है। लेकिन धीरे-धीरे इसका फोकस पूरी तरह स्वदेशी विमानों पर स्थानांतरित किया जा रहा है। इससे भारत की विदेशी रक्षा निर्भरता कम होगी और उत्पादन क्षमता दोगुनी होने की उम्मीद है।

आत्मनिर्भर भारत की नई उड़ान

नासिक की यह नई असेंबली लाइन भारत की तकनीकी स्वतंत्रता का प्रतीक है।
पहले जो फैक्ट्री केवल विदेशी डिजाइन वाले विमानों को जोड़ती थी, वही अब ‘मेड इन इंडिया’ विमान बना रही है। यह बदलाव न केवल तकनीकी बल्कि आर्थिक रूप से भी महत्वपूर्ण है। भारत अब न केवल अपने विमानों की जरूरत खुद पूरी करेगा, बल्कि भविष्य में उन्हें निर्यात करने की भी क्षमता हासिल करेगा। एचटीटी-40 ट्रेनर विमान भी इस दिशा में अहम भूमिका निभा रहा है। यह पूरी तरह से भारतीय डिजाइन है और भारतीय वायुसेना के प्रशिक्षण कार्यक्रम में शामिल किया गया है। बेंगलुरु और नासिक दोनों जगह इसका उत्पादन चल रहा है ताकि तेजी से डिलीवरी हो सके।

नासिक की HAL फैक्ट्री ने इतिहास में एक लंबा सफर तय किया है — रूसी मिग-21 से लेकर भारतीय तेजस तक। यह वही जगह है जहां से भारत ने विदेशी तकनीक पर निर्भरता की जंजीरें तोड़ी हैं। आज यह फैक्ट्री ‘आत्मनिर्भर भारत’ की असली उड़ान का प्रतीक बन चुकी है। आने वाले वर्षों में जब तेजस एमके1ए और एचटीटी-40 के इंजन की गर्जना इसी फैक्ट्री से सुनाई देगी, तब यह संदेश साफ होगा “भारत अब खुद अपने पंखों से उड़ान भरने के लिए तैयार है। (प्रकाश कुमार पांडेय)

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