सावन का महीना…महाकाल की नगरी में इस दिन निकलेगी बाबा महाकाल की पहली सवारी…
कुल 6 बार नगर भ्रमण पर रहेंगे भगवान
Sawan 2025 उज्जैन में श्रावण के चार और भादौ के दो सोमवार को हर साल धर्म नगरी में बाबा महाकाल Mahakal नगर भ्रमण पर निकलते हैं। इस बार भी बाबा के नगर भ्रमण की तैयारी तेज हो गई है। इस दौरान देश-दुनिया के भक्त एक झलक पाने के लिए उज्जैन में जुटते हैं। इस बार बाबा महाकाल के नगर भ्रमण के दौरान श्रद्धालुओं को आकर्षित करने के लिए राज्य के मुख्यमंत्री डॉ.मोहन यादव की पहल पर राज्य सरकार की ओर से अलग-अलग थीम के साथ मध्यप्रदेश सहित देशभर की सांस्कृतिक, धार्मिक और पर्यटन की झलक दिखाने की तैयारी की है।
वैदिक मंत्रों के उद्घोष के साथ होगा सवारी का शुभारंभ
उज्जैन में बाबा महाकाल की सवारी का शुभारंभ 14 जुलाई से होगा। 14th July Baba Mahakal first ride वैदिक मंत्रों के उद्घोष के साथ सवारी का शुभारंभ होगा। उज्जैन में सेना का बैंड बाबा को सलामी प्रदान करेगा। सावन माह 2025 में हर दिन सांस्कृतिक संध्या का भी आयोजन किया जाएगा। जिसमें देश के प्रसिद्ध कलाकार प्रस्तुतियां देंगे।
महाकाल की नगरी तैयार
14 जुलाई को निकलेगी बाबा महाकाल की पहली सवारी
इस बार कुल 6 बार नगर भ्रमण पर रहेंगे बाबा महाकाल
सावन माह का आगाज हो चुका है। हर वर्ष की तरह इस वर्ष 2025 में भी सावन-भादौ के पावन महीनों में उज्जैन के महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग से बाबा महाकाल की भव्य और दिव्य सवारी निकाली जाएगी। महाकाल मंदिर समिति द्वारा इस बार की सवारी का शेड्यूल पहले से ही घोषित कर दिया गया है, जो श्रद्धालुओं के लिए अत्यंत उपयोगी है। इस वर्ष आज शुक्रवार 11 जुलाई से सावन मास की शुरुआत हुई है। सावन में बाबा महाकाल की पहली सवारी 14 जुलाई को निकाली जाएगी। जबकि अंतिम और शाही सवारी 18 अगस्त सोमवार के दिन सम्पन्न होगी।
क्या है महाकाल की सवारी का महत्व?
उज्जैन स्थित श्री महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग भारत के 12 ज्योतिर्लिंगों में प्रमुख है। सावन और भाद्रपद के सोमवारों को बाबा महाकाल नगर भ्रमण पर निकलते हैं, जिसे “महाकाल की सवारी” कहा जाता है। यह परंपरा सैकड़ों वर्षों से चली आ रही है। बाबा अलग-अलग वाहनों — जैसे शेषनाग, गरुड़, हाथी, बैलगाड़ी और पालकी पर विराजमान होकर नगर भ्रमण करते हैं। सावन 2025 में उज्जैन महाकालेश्वर मंदिर में बाबा महाकाल की सवारी को लेकर जो शेड्यूल जारी किया गया है, वह अत्यंत पावन और भक्तों के लिए विशेष रूप से महत्वपूर्ण है।
महाकाल सवारी 2025 – पूर्ण विवरण
सावन मास आरंभ….
आज 11 जुलाई 2025 शुक्रवार को सावन का पहला दिन
महाकाल की सवारियों की तारीखें
इस वर्ष कुल 6 सवारियाँ निकाली जाएंगी
3 जुलाई में और 3 अगस्त में निकाली जाएगी
जुलाई 2025 में महाकाल सवारी
क्रम दिनांक दिन सवारी विवरण
1 14 जुलाई सोमवार पहली सवारी
2 21 जुलाई सोमवार दूसरी सवारी
3 28 जुलाई सोमवार तीसरी सवारी
अगस्त 2025 में महाकाल सवारी
क्रम दिनांक दिन सवारी विवरण
4- 4 अगस्त सोमवार चौथी सवारी
5- 11 अगस्त सोमवार पांचवीं सवारी
6- 18 अगस्त सोमवार छठी / शाही सवारी
विशेष धार्मिक प्रसंग
नागपंचमी 2025: मंगलवार, 29 जुलाई
हर सोमवार को उपवास: बाबा महाकाल खुद उपवासी रूप में नगर भ्रमण करते हैं। सवारी उज्जैन नगर भ्रमण पर निकलेगी, प्रमुख मार्गों से होते हुए रामघाट पर समापन होगा।
बाबा महाकाल विभिन्न वेशों (रूपों) में भक्तों के दर्शन देते हैं। सवारी में बाबा चांदी की पालकी, बैलगाड़ी, हाथी, शेषनाग, गरुड़, नंदी, आदि वाहनों पर नगर भ्रमण करते हैं। सवारी महाकालेश्वर मंदिर से आरंभ होकर रामघाट पर जलाभिषेक के साथ संपन्न होती है।
उज्जैन प्रशासन द्वारा विशेष सुरक्षा प्रबंध। हजारों की संख्या में पुलिस बल, CCTV, व ड्रोन निगरानी। भक्तों से अनुरोध है। दर्शन हेतु सुबह से ही लाइन में लगें, वाहन पार्किंग चिन्हित स्थान पर करें। हर सोमवार की सवारी का अलग-अलग महत्व होता है। आखिरी सवारी को शाही सवारी कहा जाता है। ये परंपरा सदियों पुरानी है। जिसे केवल महाकालेश्वर में जीवंत रूप से आज भी निभाया जाता है। शाही सवारी को विशेष रूप से भव्य स्वरूप दिया जाता है। जिसमें पूरे नगर को फूलों से सजाया जाता है। बाबा महाकाल को चांदी की पालकी में विराजमान कर पूरे नगर का भ्रमण कराया जाता है।
बाबा महाकाल भी रखते हैं उपवास
परंपरा अनुसार, सावन सोमवार के दिन बाबा महाकाल स्वयं भी उपवासी रूप में रहते हैं। यह मान्यता है कि जब भक्त उपवास रखते हैं, बाबा भी उनके साथ व्रत करते हुए नगर भ्रमण पर निकलते हैं और अपने भक्तों की समस्याओं को सुनते व समाधान करते हैं। पिछले वर्ष 2024 में कुल 7 सवारियां निकाली गई थीं जिनमें 22 जुलाई को पहली और 2 सितंबर को अंतिम शाही सवारी थी। उस वर्ष बाबा ने बैलगाड़ी पर नगर भ्रमण किया था, जो भक्तों के लिए विशेष आकर्षण का केंद्र बना। इस वर्ष नागपंचमी 29 जुलाई 2025 को मनाई जाएगी। यह दिन शिवभक्तों के लिए और विशेष है क्योंकि शिव और नागों का गहरा संबंध है। महाकाल की सवारी न केवल एक धार्मिक यात्रा है, बल्कि यह उज्जैन की आस्था, संस्कृति और अध्यात्म का जीवंत प्रदर्शन भी है। यदि आप साक्षात शिव के दर्शन पाना चाहते हैं तो यह सावन आपके लिए बेहद शुभ हो सकता है। भक्तों से अनुरोध है कि वे इन पावन सवारी तिथियों पर उज्जैन अवश्य जाएं और बाबा महाकाल के दिव्य रूप का साक्षात्कार करें।…(प्रकाश कुमार पांडेय)





