मानसूनी बारिश…पहाड़ से मैदान तक कुदरत का रौद्र रूप
कुदरत का रौद्र रूप नजर आने लगा है। मानसून की शुरुआत के साथ ही देश भर में कई स्थानों पर भारी बारिश ने तबाही मचा दी है। जिससे पहाड़ों से लेकर मैदानी क्षेत्रों तक बाढ़ के हालात बने हैं। यहां नदियां उफान पर हैं तो भूस्खलन के चलते रास्ते बंद हो चुके हैं। वहीं जनजीवन भी अस्त-व्यस्त है और फंसे हुए लोगों को बचाने के लिए रेस्क्यू ऑपरेशन लगातार जारी हैं।
बात पहाड़ों से लेकर मैदान तक के मौसम की मार की। बरसात जो कुदरत का वरदान मानी जाती थी वही कुदरत का अभिशाप बनकर बरस रही है। वो दिन जो सबसे खूबसूरत माने जाते थे। वही दिन सबसे बदरंग होने लगे।
वो मौसम जो प्राणवायु का काम करता था। वही मौसम जान लेने पर उतारू हो गया है। वो बादल जिन्हें देखकर किसानों के चेहरे खिल जाते हैं। वही बादल अब दिलों में खौफ पैदा करते हैं।
यह समस्याएं ईश्वर की मर्जी से हुई हैं या यह समस्या मानव जनित है? इस सवाल पर मत जाइए। मगर इतना जरूर है कि इस बार मौसम की
मार ने तबाही की बयार बहा दी है। क्या पहाड़ क्या मैदान? क्या रेगिस्तान बादल झूम कर नहीं बरसते बल्कि झकझोर के बरसते हैं। इतना बरसते हैं
कि कहीं गर्दन तक पानी चढ़ाता है। कहीं दरिया अपने साथ सब कुछ बहा ले जाता है। कहीं पहाड़ अपना आधार खोकर भरभरा जाते हैं। कहीं चट्टाने चकनाचूर हो जाती हैं। कहीं बड़े और पुराने पेड़ ढह जाते हैं। ऐसा मौसम आया है मैदान से पहाड़ तक आदमी घबराया है।
हालात उत्तराखंड और हिमाचल में भी खराब है। कई शहरों में सैलाब जैसा मंजर है और कई जगह भूस्खलन ने लोगों की जिंदगी पर खतरा पैदा कर दिया है। देखिए पहाड़ों पर कैसे चट्टानें चटक रही हैं और पहाड़ धड़क रहे हैं।
बारिश के मौसम में जिस अलकनंदा को देखकर मन मयूर हो जाता था उसी अलकनंदा को नजदीक से देखिए तो खौफ से भर जाना होता है।
अलकनंदा की लहरों का शोर दहशत को बढ़ा लगता है। अलकनंदा की धारा अपने किनारे बनी इमारतें, मकानों, बरामदों सबको निगलती नजर आती है। पहाड़ पर 15 दिनों की बारिश और बादल फटने की घटनाओं के बाद अलकनंदा में ऐसा सैलाब उतरा है कि नदी में मौजूद मूर्तियां जलमग्न हो चुकी हैं। नदी की जलधारा में करीब 20 मीटर दूर भगवान शिव की विशाल प्रतिमा जो रुद्रप्रयाग में अलकनंदा के अंदर की पहचान है वो इस सैलाबके साए में है। ताजा तस्वीरें रुद्रप्रयाग के प्रसिद्ध कोटेश्वर गुफा की है। जहां शिव गुफा के अंदर तक अलकनंदा की धारा का आक्रमण हो चुका है। नदी की बाढ़ के बीच यह लाल रंग का हिस्सा जो बाढ़ के पानी में कभी नजर आ रहा है। यह नदी के किनारे बने मंदिर का हिस्सा है जो इस सैलाब में पूरी तरह डूब चुका है। हालत यह है कि अलकनंदा के किनारे 100 फीट तक दूर मौजूद घर डूबे हैं।… (प्रकाश कुमार पाण्डेय )