गर्मी के मौसम में पिघली गहलोत-पायलट के रिश्तों में जमी बर्फ…जानें मुलाकात में क्या हुआ… क्या दोनों में होगी सुलह की नई शुरुआत?

The ice in Gahlot-Pilot's relationship melted in the summer season Know what happened in the meeting

गर्मी के मौसम में पिघली गहलोत-पायलट के रिश्तों में जमी बर्फ…जानें मुलाकात में क्या हुआ… क्या दोनों में होगी सुलह की नई शुरुआत?

राजस्थान की राजनीति में लंबे समय से चला आ रहा एक अहम तनाव अब शांत होता दिख रहा है। कांग्रेस के दो दिग्गज नेता — सचिन पायलट और अशोक गहलोत — के बीच शनिवार, 7 जून 2025 को हुई मुलाकात ने प्रदेश में कांग्रेस की अंदरूनी राजनीति को एक नया मोड़ दे दिया है।

क्या हुआ मुलाकात में?
सचिन पायलट, जो पूर्व उपमुख्यमंत्री और केंद्रीय मंत्री रह चुके हैं, शनिवार को पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के आवास पर पहुंचे। पायलट का कहना था कि वे अपने पिता राजेश पायलट की 25वीं पुण्यतिथि पर आयोजित श्रद्धांजलि कार्यक्रम में आमंत्रण देने के लिए आए थे। यह कार्यक्रम 11 जून को दौसा के भंडाना गांव में होना है — वही स्थान, जहां जून 2000 में एक सड़क दुर्घटना में राजेश पायलट का निधन हुआ था।

एक घंटे चली बातचीत
इस मुलाकात की राजनीतिक अहमियत इसलिए भी बढ़ जाती है क्योंकि यह बातचीत करीब एक घंटे तक चली, और इससे पहले पिछले कुछ वर्षों में दोनों नेताओं के बीच किसी भी प्रकार की व्यक्तिगत भेंट नहीं हुई थी। दोनों के बीच की तल्खी पार्टी स्तर पर भी खुलकर सामने आती रही है — खासकर 2020 में जब पायलट ने बगावती रुख अपनाया था।

सोशल मीडिया पर साझा किया गया संदेश
गहलोत ने मुलाकात के बाद सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X (पूर्व में ट्विटर) पर वीडियो और एक पोस्ट साझा की। उन्होंने लिखा “राजेश पायलट और मैं 1980 में एक साथ लोकसभा के लिए चुने गए थे और हमारे बीच करीब 18 वर्षों का गहरा रिश्ता रहा। उनकी असामयिक मृत्यु कांग्रेस के लिए अपूरणीय क्षति थी।”
वहीं दूसरी और सचिन पायलट ने भी अपने सोशल मीडिया पोस्ट में सकारात्मक संदेश दिया और लिखा है कि राज्य के पूर्व सीएम अशोक गहलोत से मुलाकात कर उन्होंने 11 जून को पिताजी की 25वीं पुण्यतिथि पर आयोजित होने वाली श्रद्धांजलि सभा में शामिल होने का निमंत्रण गहलोत को दिया है।

राजनीतिक विश्लेषण: क्या है इसका मतलब?
यह मुलाकात सिर्फ एक आमंत्रण नहीं मानी जा रही, बल्कि इसे राजस्थान कांग्रेस में सुलह के संकेत के रूप में देखा जा रहा है। 2023 विधानसभा चुनाव के बाद से पार्टी के अंदर नेतृत्व को लेकर तनाव जारी था। अब 2028 के चुनावों से पहले एकजुटता दिखाना पार्टी के लिए बेहद जरूरी है। राजनीतिक पर्यवेक्षकों का मानना है कि अगर यह मेल-मिलाप आगे भी जारी रहता है, तो कांग्रेस प्रदेश में फिर से सशक्त होकर उभर सकती है।

11 जून का कार्यक्रम: एकजुटता का मंच?
अब सभी की नजरें 11 जून को दौसा में होने वाले राजेश पायलट की पुण्यतिथि कार्यक्रम पर टिकी हैं। माना जा रहा है कि यदि गहलोत इस कार्यक्रम में भाग लेते हैं, तो यह एक राजनीतिक संदेश होगा कि राजस्थान कांग्रेस भविष्य में सामूहिक नेतृत्व की ओर बढ़ रही है। राजनीति में संभावनाओं के दरवाज़े कभी बंद नहीं होते। अशोक गहलोत और सचिन पायलट की यह मुलाकात शायद कांग्रेस के लिए एक नई राजनीतिक शुरुआत बन सकती है — बशर्ते संवाद का यह सिलसिला आगे भी जारी रहे।

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