2047 तक सभी नागरिकों को बिमा सुरक्षा देना का लक्ष्य, जाने क्या है- इंश्योरेंस एक्ट 1938

2047 तक सभी नागरिकों को बिमा सुरक्षा देना का लक्ष्य, जाने क्या है- इंश्योरेंस एक्ट 1938

देश के हर एक नागरिक के पास बिमा सुरक्षा हो, इसके लिए आईआरडीएआई (IRDAI) ने इंश्योरेंस कंपनियों से बीमा प्रोडक्ट्स को और किफायती बनाने को कहा है। यानि आने वाले समय में इंश्योरेंस पॉलिसी और वाजिब दाम पर मिलने की संभावना है। इंश्योरेंस रेगुलेटरी एंड डेवलपमेंट अथॅारिटी ने 2024 तक देश के सभी नागरिकों को बिमा सुरक्षा उपलब्ध कराने के लक्ष्य को पूरा करने के लिए इंश्योरेंस कंपनियों से किफायती इंश्योरेंस पॉलिसी लाने को कहा है।

*2047 तक सभी नागरिकों को बिमा सुरक्षा देना का लक्ष्य
इंश्योरेंस काउंसिल ने “बिमा सभी के लिए” के मकसद से मुंबई में एक मीटिंग का आयोजन किया गया, जिसमे 2047 तक देश के सभी नागरिकों को बिमा सुरक्षा उपलब्ध कराने के लिए चर्चा की गई। दरअसल हेल्थ इंश्योरेंस जैसे प्रोडक्ट्स के प्रीमियम ज्यादा होने की वजह से कई वरिष्ठ नागरिक इन बिमा प्रोडक्ट्स का लाभ नहीं ले पाते है।

*इंश्योरेंस काउंसिल ने बीमा कंपनियों के साथ बैठक की
इस बैठक में इंश्योरेंस कंपनियों से अलग-अलग प्रोडक्ट्स लॉन्च करने, बढ़ते कॉम्पिटीशन के बीच इंश्योरेंस प्रीमियम कम करने और डिस्ट्रीब्यूशन चैनल्स को बढ़ाने का सुझाव दिया गया, ताकि बीमा उत्पादों की पहुंच और बढ़े, खासकर दूरदराज के इलाकों में।

*बीमा कंपनियों ने दिया सुझाव
मीटिंग में कंपनियों ने सुझाव दिया कि इंश्योरटेक के इस्तेमाल से ऑपरेशन को और बेहतर किया जा सकता है। इसकी मदद से एडमिनिस्ट्रेटिव कॉस्ट कम होगी और कामकाज में मजबूती आएगी। ऐसे में इंश्योरेंस कंपनी को होने वाली बचत को कम प्रीमियम के तौर पर ग्राहकों को दी जा सकती है।

*इंश्योरेंस एक्ट 1938 में बदलाव के लिए बिल पेश कर सकती है सरकार..!!
सरकार भी इंश्योरेंस एक्ट 1938 में कुछ बदलाव के लिए बिल पेश कर सकती है। इस बिल में कुछ ऐसे प्रोविजन जो बदलाव के बाद बिल में शामिल किए जा सकते हैं, इनमें कम्पोजिट लाइसेंस, डिफरेंशियल कैपिटल, सॉल्वेंसी नॉर्म्स में रिडक्शन, बिचौलियों के लिए एकमुश्त रजिस्ट्रेशन देना शामिल हैं। इसके अलावा, बीमा कंपनियों को अन्य फाइनेंशियल प्रोडक्ट्स डिस्ट्रीब्यूट करने की अनुमति देना जैसा मुद्दा भी शामिल है।

*क्या है इंश्योरेंस एक्ट 1938
बीमा अधिनियम, 1938 मूल रूप से ब्रिटिश भारत में 1938 में पारित किया गया एक कानून है, जिसका उद्देश्य बीमा क्षेत्र को विनियमित करना है। यह व्यापक कानूनी ढांचा प्रदान करता है जिसके अंतर्गत उद्योग संचालित होता है। बीमा अधिनियम, 1938. इंपीरियल विधान परिषद। (अब अधिनियम की शक्तियाँ भारत की संसद के पास हैं)

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