इटावा में है प्रसिद्ध श्री पिलुआ महावीर मंदिर…जहां सुनाई देती है प्रतिमा से सांस चलने की आवाज!..जानें क्या है मंदिर का इतिहास और धार्मिक मान्यता…

The famous Shri Pilua Mahavir Mandir is in Etawah UP

यूपी के इटावा में है प्रसिद्ध श्री पिलुआ महावीर मंदिर…जानें क्या है मंदिर का इतिहास और धार्मिक मान्यता

यूपी के संभल में जगह जगह मिल रहे शिवालयों ने सभी का ध्यान आकृर्षित किया है, लेकिन संभल ही नहीं उत्तरप्रदेश के कई शहर ऐसे हैं जहां के मंदिर देश भर में प्रसिद्ध हैं। हमारी इस खास पेशकश में बात करेंगे यूपी के इटावा में स्थित प्रसिद्ध श्री पिलुआ महावीर मंदिर की। जहां ये कहना गलत नही होगा कि यहां राम भक्त हनुमान साक्षात अपने भक्तों को दर्शन तो दे रहे हैं। इसके साथ ही उनके कष्टों को भी हर रहे हैं। जी हां इस मदिर में जो हनुमान जी की प्रतिमा है वो लेटी हुई है। इतना ही नहीं इटावा का प्रसिद्ध श्री पिलुआ महावीर मंदिर में हनुमान जी की मूर्ति को लड्डूओं का भोग लगता है।

इटावा का प्रसिद्ध श्री पिलुआ महावीर मंदिर इस मंदिर में ऐसे हनुमान जी हैं, जो अपने भक्तों की मुरादें तो पूरी करते हैं। साथ में मंदिर में मौजूद होने का संकेत भी देते हैं। इतना ही नही यहां दूर-दूर से भक्त भगवान के दर्शन करने आते हैं। यहां पर भगवान से अपनी मन की मुराद पूरी करने की मन्नत मानते है।

हनुमानजी का चमत्कारी रूप लोगों के हर संकट को हर लेता है। विद्वान कहते हैं एक बार अगर हनुमान जी का नाम ले लिया तो समझों सारा डर खत्म हो जाता है। श्री हनुमान के भक्त का कोई शत्रु नहीं होता। आप आए दिन हनुमान जी के अलग अलग तरह के चमत्कार के विषय में सुनते होंगे। ऐसा ही चमत्कार एक उत्तरप्रदेश के इटावा से करीब 12 किलोमीटर की दूरी पर गांव रूरा के पास यमुना नदी के निकट पिलुआ महावीर मंदिर में देखने को मिलता है। यहां मान्यता है कि अगर एक बार भी हनुमान जी के दर्शन कर लिये तो राम भक्त हनुमान आपकी सारी परेशानी दूर कर देते हैं।

पिलुआ महावीर मंदिर जब पहुंचने पर भगवान के होने का एहसास होता है। इतना ही नही भक्तों के अनुसार हनुमान जी को जब भी लड्डू चढ़ाये जाते हैं, वो लड्डू हनुमान जी खाते हैं। यहां हैरानी की बात तो ये है कि हनुमान जी की प्रतिमा के मुख से लगातार राम नाम की ध्वनी भी सुनाई देती है। मूर्ति में सांसें चलने का आभास भी होता है। मंदिर को लेकर प्रसिध है कि यहां हनुमान की मूर्ति प्रसाद ग्रहण करती है। बताया जाता है कि यहां स्थापित मूर्ति के मुंह में जितने भी लड्डू अर्पित किये जाते हैं वो कहां गायब हो जाता है पता ही नहीं चलता। यह वर्षों से इसी क्रम में चला आ रहा है। आज तक किसी को नहीं पता कि आखिर प्रसाद जाता कहां है।

जानें क्या है मंदिर का इतिहास

अभी तक हमने आपको लेटे हनुमान जी के बारे में बताया जो दिन रात भगवान राम का स्मरण करते रहते हैं। लेकिन अब यहां ये जाना भी जरुरी है की इस मंदिर का इतिहास क्याा है। इटावा स्थित पिलुआ वाले हनुमान जी के नाम से प्रसिद्ध इस मंदिर का इतिहास भी काफी रोचक है। मंदिर के पुजारी बताते हैं कि पिलुआ एक जंगली पेड़ होता है। इस पेड़ की जड़ के नीचे एक दिन हनुमान जी दबे हुए एक राजा को मिले थे। राजा ने उन्हें वहां से निकलवा कर उनके लिये उसी जगह पर एक छोटा सा मंदिर बनवाया। तभी से इस मंदिर का नाम पिलुआ वाले महावीर पड़ गया।

सुनाई देती है प्रतिमा से सांस चलने की आवाज!

इटावा शहर से कुछ किलोमीटर दूर स्थित ये मंदिर काफी लोकप्रिय है। यहां के भक्तों के अनुसार इस मंदिर में ध्यानमग्न हो कर बैठने पर हनुमान जी की सांसों चलने की आवाज के साथ ही राम धुन भी सूनाई देती है। यहां के लोगों की दावा है की यहां हनुमान जी जीवित अवस्था में हैं। यहां के हनुमान जी की प्रतिमा शयन अवस्था में है। और हनुमाज जी का मुख दक्षिण दिशा की और है। स्थानीय भक्तों का ये भी मानना है कि यहां लड्डू और बूंदी का भोग हनुमान जी के मुख पर रख दिया जाता है। कुछ ही देर में सारा प्रसाद पूरी तरहा गायब हो जाता है। आज तक ये पता नही चल पाया की प्रसाद गायब कहा हो जाता है। करीव 300 साल से ये क्रम यूं ही लगातार जारी है। मान्यता है की 300 साल पूर्व इस मंदिर का निर्माण राजा हुक्म चंद प्रताप चौहान ने कराया था। उस वक्त ये क्षेत्र राजा के अधीन था। तब राजा को हनुमान जी ने सपने में दर्शन देकर मुर्ती होने की बात बताई थी। जिसके बाद राजा ने यहां मंदिर का निर्माण कराया था। वहीं यहां के लोगों का ये भी कहना है कि यहां दूर दूर से भक्त दर्शन के लिए आते हैं। धार्मिक मान्यता है कि जो भी भक्त यहां हनुमान जी के दर्शन करते हैं उनकी सभी बीमारी दूर हो जाती है। कष्टों से निवारण हो जाता है। साथ ही बड़ी से बड़ी बीमारी और बाधा से भी छुटकारा मिल जाता है।

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