2026–27 की राष्ट्रीय राजनीति का ट्रेलर हैं राज्यसभा की 37 सीटों पर होने वाले चुनाव

Rajya Sabha seats

16 मार्च का सियासी संग्राम: 37 सीटों पर बदलता शक्ति-संतुलन

देश के 10 राज्यों की 37 राज्यसभा सीटों पर 16 मार्च को होने वाला चुनाव सिर्फ औपचारिक प्रक्रिया नहीं, बल्कि 2026–27 की राष्ट्रीय राजनीति का ट्रेलर माना जा रहा है। बदले हुए विधानसभा समीकरणों ने कई दिग्गजों की सियासी जमीन खिसका दी है। फायदा जहां राष्ट्रीय दलों—खासकर बीजेपी और कांग्रेस—को मिलता दिख रहा है, वहीं क्षेत्रीय दलों के लिए यह चुनाव अस्तित्व की परीक्षा बन गया है। महाराष्ट्र (7), तमिलनाडु (6), बिहार (5), पश्चिम बंगाल (5), ओडिशा (4), असम (3), हरियाणा (2), छत्तीसगढ़ (2), तेलंगाना (2) और हिमाचल प्रदेश (1) — इन राज्यों में होने वाले चुनाव का असर सीधे राज्यसभा की संख्या-ताकत पर पड़ेगा।

किसका होगा राजनीतिक लाभ?

इन 37 सीटों का चुनाव सिर्फ संख्या का खेल नहीं, बल्कि 2026–27 के राजनीतिक नैरेटिव को दिशा देने वाला है।

16 मार्च का परिणाम बताएगा कि राज्यसभा में राष्ट्रीय दलों का वर्चस्व और मजबूत होगा या क्षेत्रीय दल कोई चौंकाने वाला दांव खेल पाएंगे।

एनडीए बनाम इंडिया: किसका पलड़ा भारी?

फिलहाल इन 37 सीटों में से 15 सीटें एनडीए और 18 सीटें इंडिया ब्लॉक के पास हैं, जबकि 4 अन्य दलों के खाते में हैं। लेकिन नए विधानसभा गणित के आधार पर अनुमान है कि एनडीए 15 से बढ़कर 18 सीटों तक पहुंच सकता है, जबकि इंडिया ब्लॉक 18 से घटकर 14-15 सीटों पर सिमट सकता है। एनडीए में प्रमुख तौर पर बीजेपी, जेडीयू, AIADMK, आरएलएम और आरपीआई की सीटें दांव पर हैं। अनुमान है कि बीजेपी की सीटें 9 से बढ़कर 12 तक पहुंच सकती हैं। वहीं विपक्षी खेमे में कांग्रेस, टीएमसी, डीएमके, आरजेडी, शिवसेना (यूबीटी) और सीपीएम की सीटें खतरे में दिख रही हैं।

बिहार: क्या राष्ट्रीय जनता दल हो जाएगी हाफ?

बिहार की 5 सीटों पर मुकाबला सबसे दिलचस्प है। एक राज्यसभा सीट के लिए 41 विधायकों का समर्थन जरूरी है। मौजूदा स्थिति में एनडीए के पास 200 से ज्यादा विधायक हैं, जबकि महागठबंधन के पास करीब 35 के आसपास संख्या है। गणित कहता है कि एनडीए चार सीटें आसानी से जीत सकता है और पांचवीं सीट पर भी बढ़त में है। ऐसे में लालू प्रसाद यादव की पार्टी आरजेडी के लिए एक भी सीट निकालना मुश्किल हो सकता है। अगर AIMIM या बसपा अलग रुख अपनाती हैं तो महागठबंधन का गणित और बिगड़ सकता है। संकेत मिल रहे हैं कि एनडीए पांचों सीटों पर दांव खेल सकता है।

महाराष्ट्र: पवार-उद्धव का पावर टेस्ट

महाराष्ट्र की 7 सीटों पर मुकाबला और भी पेचीदा है। एक सीट के लिए 37 विधायकों का समर्थन चाहिए। एनडीए (बीजेपी + शिंदे शिवसेना + अजित पवार गुट) के पास 228 विधायक हैं, जिससे 6 सीटें लगभग पक्की मानी जा रही हैं। दूसरी ओर शरद पवार, उद्धव ठाकरे और कांग्रेस मिलकर भी मुश्किल से एक सीट निकाल सकते हैं। लेकिन यहां भी एक अतिरिक्त वोट की जरूरत होगी। अगर शरद पवार खुद राज्यसभा में वापसी चाहते हैं, तो समीकरण और उलझेंगे। उद्धव गुट भी अपनी दावेदारी जता चुका है। ऐसे में महाविकास आघाड़ी के भीतर सीट बंटवारे पर टकराव तय माना जा रहा है।

पश्चिम बंगाल: लेफ्ट का खत्म होता किला

पश्चिम बंगाल की 5 सीटों में से 4 सीटें टीएमसी के पास सुरक्षित मानी जा रही हैं। लेकिन एक सीट पर सीपीएम की स्थिति कमजोर दिख रही है। संभावना है कि यह सीट बीजेपी के खाते में जा सकती है, जिससे राज्यसभा में लेफ्ट का प्रतिनिधित्व लगभग समाप्त हो सकता है।

तेलंगाना और ओडिशा: बीआरएस और बीजेडी पर संकट

तेलंगाना की 2 सीटों पर कांग्रेस मजबूत स्थिति में है। ऐसे में भारत राष्ट्र समिति (बीआरएस) अपनी सीट गंवा सकती है। ओडिशा की 4 सीटों में से 3 सीटें बीजेपी जीत सकती है। बीजू जनता दल को एक सीट से संतोष करना पड़ सकता है। इससे बीजेडी की राज्यसभा में ताकत घटेगी।

तमिलनाडु और असम: सीमित बदलाव

तमिलनाडु में द्रविड़ मुनेत्र कड़गम चार सीटें बचा सकती है, जबकि AIADMK एक सीट सुरक्षित रख सकती है। एक सीट पर कड़ा मुकाबला संभव है। असम में तीन सीटों में से दो बीजेपी के पास रह सकती हैं। असम गण परिषद को अपनी सीट गंवाने का खतरा है।

हरियाणा, छत्तीसगढ़ और हिमाचल: उलटफेर की संभावना

हरियाणा की दो सीटों में से एक बीजेपी और एक कांग्रेस के खाते में जा सकती है। छत्तीसगढ़ में भी एक-एक सीट का बंटवारा संभव है। हिमाचल प्रदेश की एकमात्र सीट पर कांग्रेस बीजेपी को मात दे सकती है।

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