इस दिन 90वां जन्मदिन मनाएंगे दलाई लामा…जानें क्यों बौखला रहा चीन
दलाई लामा 6 जुलाई को 90 साल के हो जाएंगे। दलाई लामा का 90वां जन्मदिन बेहद खास होगा। ऐसा इसलिए क्योंकि इस बार अगले दलाई लामा के चुनाव के संबंध में फैसला लिया जाएगा। अपने एक आधिकारिक बयान में दलाई लामा ने यह कहा था कि 600 साल पुरानी संस्था उनकी मौत के बाद भी लगातार चलती रहेगी। यह उनके भावी पुनर्जन्म का चयन करेगी। जिससे 15वें दलाई लामा की नियुक्ति में चीन की भूमिका खत्म हो जाएगी।
दलाई लामा के द्वारा अगले दलाई लामा के चुनाव में चीन की भूमिका को खत्म करने के ऐलान के बाद चीन चिढ़ गया है। चीन में कम्युनिस्टों के सत्ता में आने के बाद चीनी सेना ने 1991 में तिब्बत पर जबरन कब्जा कर लिया था। मार्च 1959 में तिब्बती राष्ट्रीय विद्रोह को चीनी सैनिकों ने कुचल दिया। तिब्बती लोग चीन की सत्ता को नहीं मानते हैं और वह तिब्बत को एक चीन से अलग और आजाद देश के तौर पर चाहते हैं।
6 जुलाई को है दलाई लामा का जन्मदिन
दलाई लामा का 90वां जन्मदिन होगा बेहद खास
इस दिन हो सकता है अगले दलाई लामा के चुनाव पर फैसला
600 साल पुरानी संस्था…मौत के बाद भी चलती रहेगी
उनके भावी पुनर्जन्म का चयन करेगी
15वें दलाई लामा की नियुक्ति में खत्म होगी चीन की भूमिका
दलाई लामा के बयान से चिढ़ गया चीन
चीन ने 1991 में किया था तिब्बत पर जबरन कब्जा
1959 में तिब्बती के विद्रोह को चीन ने कुचल दिया था
तिब्बती लोग चीन की सत्ता को नहीं मानते
अपने 2011 के बयान में भी दलाई लामा ने कहा था कि उनका पुनर्जन्म एक स्वतंत्र देश में होना चाहिए ना कि चीनी नियंत्रण में। उन्होंने यह भी कहा था कि चीनी सरकार के द्वारा राजनीतिक उद्देश्यों के लिए चुने गए पुनर्जन्म को कोई मान्यता नहीं दी जानी चाहिए। तिब्बतियों को हमेशा यह भय रहता है कि जैसे-जैसे दलाई लामा बड़े होंगे, चीन अपने पसंद के उत्तराधिकारी के नाम का ऐलान कर सकता है। चीन इसका इस्तेमाल तिब्बती, बौद्ध धर्म और संस्कृति पर अपना नियंत्रण मजबूत करने के लिए चीन इसका उपयोग कर सकता है। यही वजह है कि जब दलाई लामा ने अपने अगले दलाई लामा के चुनाव में चीन की भूमिका को खत्म करने का ऐलान किया तो चीन बौखला गया।
बता दें 1935 को 6 जुलाई को उनका जन्म हुआ था। दलाई लामा का जन्म उत्तरपूर्वी तिब्बत में हुआ था। जब महज 2 साल की उनकी आयु थी, तभी उनकी पहचान दलाई लामा के तौर पर कर ली गई। ऐसे में सवाल यह है कि दलाई लामा होते कौन हैं और नए दलाई लामा की पहचान कैसे की जाती है? तिब्बती मान्यताओं के अनुसार नए दलाई लामा के चुने जाने की प्रक्रिया पुनर्जन्म के सिद्धांतों पर आधारित होती है। ऐसा माना जाता है कि दलाई लामा पुनर्जन्म लेते हैं और हर बार एक नए शरीर में नया रूप धारण करते हैं। दलाई लामा अपनी मृत्यु के समय पुनर्जन्म के कुछ संकेत देते हैं जिसके माध्यम से नए दलाई लामा की तलाश की जाती है। कई बार यह खोज सालों तक चलती है। दलाई लामा के मृत्यु के आसपास या फिर 9 महीने बाद जन्मे बच्चों को ढूंढा जाता है और उससे दलाई लामा की जुड़ी हुई वस्तुओं की पहचान कराई जाती है। ज्योतिषीय संकेतों के साथ-साथ उस बच्चे का धार्मिक परीक्षण भी किया जाता है। पहचान होने के बाद बच्चे को कई सालों तक बौद्धिक शिक्षा दी जाती है। तब तक कोई बौद्ध विद्वान लामा गुरु का काम संभालता है।
तिब्बती आध्यात्मिक गुरु दलाई लामा
जन्म: 6 जुलाई 1935, तक्षेर, तिब्बत
14वें दलाई लामा – तेनजिन ग्यात्सो
नोबेल शांति पुरस्कार: 1989
दुनिया में शांति, करुणा और सहिष्णुता के प्रतीक
विश्वभर में कार्यक्रम
भारत, अमेरिका, यूरोप और तिब्बती समुदायों में भव्य समारोह
धर्मशाला (हिमाचल) में विशेष प्रार्थना व सांस्कृतिक आयोजन
विश्व नेता और अनुयायी भेजेंगे शुभकामनाएं
उनकी शिक्षाएं
मानवता, अहिंसा और पर्यावरण संरक्षण पर विशेष जोर
युवाओं को करुणा और आंतरिक शांति की राह दिखाना
दुनिया कर रही है नमन – 90 साल सेवा, शांति और सत्य के नाम!
मौजूदा दलाई लामा 14वें दलाई लामा है जिनका असली नाम तनजीन ज्ञात्सो है। पहले दलाई लामा गेदून द्रुपा का जन्म 1391 में हुआ था और तब से ही दलाई लामा के चुनाव की प्रक्रिया इसी तरह से चलती आ रही है।