हंगामे के साथ यूपी बजट सत्र का आगाज…सदन में राज्यपाल ने लगाई विपक्ष को लताड़..कही ये बड़ी बात…!
उत्तर प्रदेश विधानसभा के बजट सत्र की शुरुआत सोमवार को सियासी टकराव और तीखे शोर-शराबे के साथ हुई। पहले ही दिन सदन में सवालों से ज्यादा सियासत हावी नजर आई। राज्यपाल आनंदी बेन पटेल के अभिभाषण के दौरान समाजवादी पार्टी और कांग्रेस के विधायकों ने जमकर नारेबाजी की, जिससे सदन का माहौल पूरी तरह गरमा गया। सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच टकराव इतना बढ़ा कि राज्यपाल को खुद विपक्ष पर नाराजगी जाहिर करनी पड़ी। वहीं, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का हंसते हुए मेज थपथपाना इस पूरे घटनाक्रम का सबसे चर्चित दृश्य बन गया।
- यूपी विधानसभा का बजट सत्र
- सत्र सवाल और सियासत
- राज्यपाल आनंदी बेन का अभिभाषण
- सपा और कांग्रेस ने की जमकर नारेबाजी
- सपा विधायकों ने किया सदन में हंगामा
- राज्यपाल आनंदी बेन पटेल हुईं नाराज
- सपा विधायकों पर भड़कीं राज्यपाल
- सीएम योगी ने हंसते हुए मेज थपथपाई
- सत्र सवाल और सियासत की भेंट
विधानमंडल के बजट सत्र 2026-27 की औपचारिक शुरुआत राज्यपाल के अभिभाषण से हुई। लेकिन जैसे ही राज्यपाल ने सरकार की उपलब्धियों का जिक्र शुरू किया, विपक्षी दलों के सदस्य अपनी सीटों से उठ खड़े हुए। सपा और कांग्रेस के विधायक नारे लगाते रहे और सरकार पर विफलताओं के आरोप लगाते दिखे। शोर इतना बढ़ गया कि कई बार राज्यपाल को अपना अभिभाषण रोकना पड़ा। सदन में सत्ता बनाम विपक्ष की तस्वीर साफ नजर आई।
राज्यपाल के अभिभाषण पर हंगामा
राज्यपाल आनंदी बेन पटेल अपने अभिभाषण में योगी सरकार की नीतियों, कानून-व्यवस्था, बुनियादी ढांचे और विकास योजनाओं की चर्चा कर रही थीं। उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश ने बीते वर्षों में निवेश, रोजगार और सुरक्षा के मोर्चे पर नई पहचान बनाई है। लेकिन विपक्ष को यह बयानबाजी रास नहीं आई। सपा और कांग्रेस के विधायक लगातार नारेबाजी करते रहे, जिस पर राज्यपाल ने कड़ा ऐतराज जताया।
नाराज राज्यपाल, विपक्ष पर बरसीं
हंगामे से खिन्न होकर राज्यपाल आनंदी बेन पटेल ने विपक्ष को आड़े हाथों लिया। उन्होंने कहा, “आप लोगों के समय में यह सब जीरो था… जीरो। पांच-सात सालों से आप लोग सिर्फ हंगामा कर रहे हैं। आगे भी आपका जीरो ही रहने वाला है।” राज्यपाल के इस बयान के बाद सदन में सन्नाटा छा गया। उनके इतना कहते ही विधानसभा अध्यक्ष सतीश महाना मुस्कुराते नजर आए और सत्ता पक्ष के कई विधायक मेज थपथपाने लगे।
सीएम योगी की प्रतिक्रिया बनी चर्चा का विषय
राज्यपाल के तीखे शब्दों के दौरान मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का हंसते हुए मेज थपथपाना कैमरों में कैद हो गया। सत्ता पक्ष ने इसे विपक्ष के हंगामे पर तंज के तौर पर देखा, जबकि विपक्ष ने इसे लोकतांत्रिक मर्यादाओं के खिलाफ बताया। इस दृश्य ने सत्र के पहले ही दिन सियासी तापमान और बढ़ा दिया।
विपक्ष का आरोप..अभिभाषण अधूरा पढ़ा गया
कांग्रेस विधायक दल की नेता आराधना मिश्रा ने राज्यपाल के अभिभाषण को लेकर बड़ा आरोप लगाया। कांग्रेस की आराधना का कहना है कि राज्यपाल आनंदी बेन पटेल की ओर से अपना पूरा अभिभाषण नहीं पढ़ा। अभिभाषण के कई हिस्से छोड़ दिए गए। कांग्रेस नेत्री मिश्रा ने कहा, यह एक तरह से सफेद कागज पर बीजेपी की काली स्याही से लिखी हुई झूठी इबारत थी। जिसे देश और प्रदेश की एक अनुभवी राजनेता के रूप में राज्यपाल ने पढ़ने से इनकार कर दिया।
सत्ता पक्ष का पलटवार
वहीं, उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने विपक्ष के आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया। उन्होंने कहा, “विकसित भारत के साथ विकसित उत्तर प्रदेश बनाने वाला बजट आने जा रहा है। प्रदेश की प्रगति देखकर समाजवादी पार्टी बौखलाई हुई है। उनके पास कोई रचनात्मक मुद्दा नहीं है। अगर सवाल हैं तो सदन में रखें, सरकार हर सवाल का जवाब देगी।” सत्ता पक्ष का दावा है कि यह बजट प्रदेश को विकास की नई दिशा देगा।
सपा का तंज और चुनावी मुद्दे
समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता शिवपाल सिंह यादव ने भी सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि एसआईआर को लेकर भाजपा ने वोट कटवाने की कोशिश की है, लेकिन सपा कार्यकर्ताओं ने मेहनत कर सही वोट बचाए हैं। शिवपाल यादव ने कहा कि इस संबंध में चुनाव आयोग से शिकायत भी की गई है। सपा का आरोप है कि सरकार विकास की बातों से असली मुद्दों को भटकाना चाहती है।
बजट से पहले सियासी बवाल
बजट पेश होने से पहले ही सदन में हंगामे ने यह संकेत दे दिया है कि आने वाले दिन आसान नहीं होंगे। सत्ता पक्ष जहां अपनी उपलब्धियों के दम पर बजट को ऐतिहासिक बता रहा है, वहीं विपक्ष महंगाई, बेरोजगारी और कानून-व्यवस्था जैसे मुद्दों पर सरकार को घेरने की तैयारी में है। पहले दिन का हंगामा इस बात का संकेत है कि यह सत्र बहस से ज्यादा टकराव का गवाह बन सकता है।
कुल मिलाकर, उत्तर प्रदेश विधानसभा के बजट सत्र की शुरुआत ही सवालों और सियासत की भेंट चढ़ गई। राज्यपाल के अभिभाषण से लेकर सदन के हंगामे तक, हर पल राजनीति हावी रही। सत्ता पक्ष विकास और उपलब्धियों का दावा कर रहा है, जबकि विपक्ष हंगामे के जरिए अपनी नाराजगी जता रहा है। अब देखना यह होगा कि आने वाले दिनों में सदन जनहित के सवालों पर चर्चा का मंच बनता है या फिर सियासी टकराव की तस्वीर यूं ही हावी रहती है।