उत्तरप्रदेश का संभल फिर चर्चा में है। इस प्रचीन नगरी को भी काशी मथुरा और अयोध्या की ही तर्ज पर सजाए और संवारे जाने के लिए जिला प्रशासन ने कवायद शुरू कर दी है। जिला प्रशासन की ओर से संभल के सौंदर्यकरण के साथ प्राचीन स्वरूप में वापस लाए के लिए नई पहल की है। यहा कलेक्टर के निर्देश पर संभल जिले में सौंदर्यकरण में बाधा बनने वाले अतिक्रमण को ध्वस्त करने के लिए फिर से बुलडोजर की कार्रवाई की जा रही है।
संभल में हर दिन बुलडोजर गरज रहा है। शहर के सौंदर्यीकरण प्लान के तहत बुलडोजर ने मंगलवार को भी कई अवैध अतिकृमण को हटाया। इससे पहले लोगों को नोटिस दिए गए। वहीं बुलडोजर कार्यवाही से हड़कंप मचा रहा।
जिला प्रशासन की जांच में सामने आई असलियत
संभल जिला प्रशासन के अनुसार यह पूरी जमीन नगर पालिका की है। जमीन पर अवैध तरीके से कब्जा कर निजी मकान बना लिए गए थे। कई मकानों के निवासी तो प्रशासन की टीम को दस्तावेज दिखाने में विफल रहे। जिनकी जांच के बाद इस क्षेत्र को ‘अतिक्रमण मुक्त’ घोषित करने की योजना है।
- अवैध कब्जों की संख्या
- अवैध मकान- 34
- धार्मिक ढांचा -1
- दुकानें (मुख्य बाज़ार) – 11
इससे पहले मंगलवार को भी संभल के चंदौसी चौराहा पर बुलडोजर ने अतिकृमण हटाया गया है। जिसमें नगर पालिका विनियमित क्षेत्र और लोकनिर्माण विभाग की साझा टीम ने मिलकर चौराहे से अतिकृमण हटाया। रास्ते को चौड़ा करने के प्लान को और आगे बढ़ाया है। इसके लिए सड़क की सीमा की मार्किंग भी वहां की गई। वहीं अवैध कब्जा करने वाले आरोपियों को प्रशासन की ओर से नोटिस भी दिए गए हैं। इस बीच ईओ ने चेतावनी दी है कि दुकानदारों अपनी दुकानों के अंदर ही व्यापार करें। सड़क किनारे अतिकृमण न करने की चेतावनी दी है।
ऐतिहासिक और धार्मिक पहचान
संभल मुग़ल काल और उससे पूर्व के ऐतिहासिक संदर्भों में एक महत्वपूर्ण नगरी रहा है। यह नगरी इस्लामिक शिक्षा के साथ सूफी परंपरा और ऐतिहासिक इमारतों के लिए जानी जाती है।
जामा मस्जिद बनाम हरिहर मंदिर विवाद
हाल ही में संभल में जामा मस्जिद और हरिहर मंदिर का सर्वे कराये जाने को लेकर जो घटनाक्रम चला है। उससे भी एक बार फिर यह क्षेत्र फिर से सुर्खियों में आया है। संभल के धार्मिक महत्व के चलते राज्य सरकार इसे एक संतुलित और समृद्ध धार्मिक स्थल के रूप में विकसित करने पर काम कर रही है।
संभल में विकास की संभावना
इंफ्रास्ट्रक्चर सुधार की बात करें तो सड़क, स्ट्रीट लाइट, जल निकासी और सफाई व्यवस्था में तेजी लाई जा सकती है। धार्मिक पर्यटन की बात करें तो यहां मस्जिद और मंदिरों दोनों के ही संरक्षण और सौंदर्यीकरण से पर्यटन को बढ़ावा मिल सकता है। संस्कृति और कला की बात की जाए तो स्थानीय शिल्प, संगीत और उर्दू साहित्य को संरक्षित कर सांस्कृतिक पहचान को पुनर्जीवित करना।
सीएम योगी का फोकस… संभल को बनाएंगे सांस्कृतिक केंद्र
उत्तर प्रदेश की योगी आदित्यनाथ सरकार बीते वर्षों में काशी वाराणसी और अयोध्या जैसी पवित्र नगरी को धार्मिक और सांस्कृतिक केंद्र के रूप में विकसित करने पर विशेष काम शुरु कर चुकी है। काशी में विश्वनाथ धाम कॉरिडोर और अयोध्या में श्रीराम मंदिर जैसे महाप्रोजेक्ट पूरे हो गए है। जिससे इन नगरों की छवि और पहचान को अब वैश्विक स्तर पर मजबूत किया है। इसके बाद संभल की ओर भी योगी सरकार का रुख उसी दिशा में बढ़ता दिख रहा है। सीएम योगी आदित्यनाथ ने पिछली बार विधानसभा में घोषणा की थी कि “संभल को फिर से धार्मिक-सांस्कृतिक धरोहर के रूप में विकसित किया जाएगा। सीएम ने यह भी बताया कि संभल में करीब 22 पुराने कुएं और 46 साल पुराना मंदिर के साथ प्रमाण खुदाई के दौरान मिले हैं। संभल जिले के लिए योगी सरकार की ओर से चलाए जा रहे सौंदर्यीकरण अभियान यानी बुलडोजर कार्रवाई जिसमें सड़क चौड़ीकरण और अतिक्रमण हटाना इसी योजना का हिस्सा हैं। जिससे एक साफ़, सुरक्षित, और धार्मिक-पर्यटन केंद्रित शहर का निर्माण किया जा सके।..प्रकाश कुमार पांडेय




