देश में मानसूनी बारिश 9 अक्टूबर 2025: पूरे महीने “सामान्य से अधिक वर्षा” की संभावना
भारत में 2025 का मानसून इस बार सामान्य से अधिक सक्रिय दिखाई दे रहा है। अक्टूबर के दूसरे सप्ताह तक देश के कई हिस्सों में बारिश जारी है। मौसम विभाग (IMD) ने इस पूरे महीने “सामान्य से अधिक वर्षा” की संभावना जताई है। यह वर्षा अब पश्चिमोत्तर और हिमालयी इलाकों तक फैल चुकी है, जहां सामान्यतः इस समय तक मानसून लौट जाता है। पश्चिमी विक्षोभ और मौसमी दबावों के कारण यह स्थिति बनी हुई है।
मानसून की वापसी में देरी
उत्तर भारत में रिकॉर्ड वर्षा
दक्षिण में पूर्वोत्तर मानसून की सक्रियता
फसल, परिवहन और जीवन पर असर
IMD की चेतावनी: अभी और बारिश बाकी
अक्टूबर में भी भीगा भारत
आम तौर पर सितंबर के अंत तक मानसून की वापसी होती है, लेकिन इस वर्ष बारिश का सिलसिला अक्टूबर तक खिंच गया है। उत्तर भारत, मध्य भारत और दक्षिणी प्रायद्वीप में अब भी बादल छाए हुए हैं। पूर्वोत्तर राज्यों से लेकर तटीय दक्षिण भारत तक बादलों की आवाजाही बनी हुई है। मौसम वैज्ञानिकों का कहना है कि यह बदलाव जलवायु असंतुलन और वैश्विक तापन के कारण हो सकता है।
पंजाब-हरियाणा में रिकॉर्ड बारिश
पश्चिमोत्तर भारत के राज्यों — पंजाब, हरियाणा और हिमाचल प्रदेश — में इस बार बारिश ने सारे रिकॉर्ड तोड़ दिए हैं। पंजाब में 4315% अधिक, हरियाणा में 4998% अधिक और हिमाचल प्रदेश में 2752% अधिक वर्षा दर्ज की गई है। खेतों में जलभराव हो गया है, फसलें गिर चुकी हैं और किसानों की चिंता बढ़ गई है। कटाई के मौसम में यह बारिश कृषि के लिए बड़ा झटका साबित हो रही है।
फसलों पर पड़ा असर
भारी वर्षा से खरीफ फसल की कटाई प्रभावित हुई है। कई इलाकों में धान और मक्का की फसलें पानी में डूब गईं। खेतों में नमी बढ़ने से भंडारण और परिवहन की दिक्कतें सामने आ रही हैं। कृषि विशेषज्ञों का कहना है कि अगर बारिश का यह दौर लंबा खिंचता है तो उत्पादन पर 10-15% तक असर पड़ सकता है।
महाराष्ट्र-विदर्भ में अतिरिक्त बारिश
महाराष्ट्र के विदर्भ क्षेत्र में इस बार 14% तक अधिक वर्षा दर्ज की गई है। नागपुर, अमरावती और वर्धा जिलों में जलाशय लबालब हैं। हालांकि, लगातार बारिश के कारण कई गांवों में जलजमाव और फसल सड़ने की शिकायतें सामने आई हैं। जलस्तर बढ़ने से भूजल भरण में सुधार हुआ है, परन्तु कृषि भूमि में नमी बढ़ने से खरीफ कटाई और रबी की बुवाई पर असर पड़ सकता है।
दक्षिण भारत में भारी वर्षा
तमिलनाडु, केरल और तटीय आंध्र प्रदेश में पूर्वोत्तर मानसून (Northeast Monsoon) की सक्रियता देखी जा रही है। चेन्नई, वेल्लोर, तिरुवल्लूर जैसे जिलों में भारी वर्षा का अलर्ट जारी किया गया है। कई नदियाँ उफान पर हैं और सड़कों पर जलभराव की स्थिति है। IMD ने 9 और 10 अक्टूबर को ‘रेड अलर्ट’ जारी किया है। तटीय क्षेत्रों में बाढ़ और यातायात प्रभावित होने की संभावना है।
तेलंगाना और हैदराबाद में बारिश
हैदराबाद और आसपास के जिलों में हल्की से मध्यम बारिश दर्ज की गई। बहादुरपुरा में 57.3 मिमी तक वर्षा हुई, जिससे शहर के कई हिस्सों में ट्रैफिक जाम और जलजमाव देखने को मिला। स्थानीय प्रशासन ने निचले इलाकों में राहत दल तैनात किए हैं। मौसम विभाग ने अगले 24 घंटों तक हल्की बारिश के आसार जताए हैं।
हिमाचल में भूस्खलन का खतरा
हिमाचल प्रदेश के ऊंचाई वाले क्षेत्रों में लगातार हो रही बारिश ने भूस्खलन का खतरा बढ़ा दिया है। ताजा घटनाओं में कुल्लू और मंडी जिलों में सड़कें बाधित हुई हैं। एक बस पर मलबा गिरने से 15 लोगों की मौत हो गई। प्रशासन ने पहाड़ी इलाकों में यात्रा टालने की सलाह दी है। भारी बारिश से बीते दिनों में नदियों का जलस्तर बढ़ गया है।
पूर्वोत्तर और पूर्व भारत में चेतावनी
असम, मेघालय, अरुणाचल प्रदेश, पश्चिम बंगाल और ओडिशा में भी मानसून सक्रिय बना हुआ है। मौसम विभाग ने यहां व्यापक वर्षा और तेज हवाओं की चेतावनी दी है। ब्रह्मपुत्र, सुवर्णरेखा और महानदी जैसी नदियों में जल स्तर लगातार बढ़ रहा है। राज्य सरकारों ने राहत टीमों को अलर्ट पर रखा है। किसानों को फसल कटाई टालने की सलाह दी गई है।
मौसम का असर और चेतावनी
देश के कई हिस्सों में यह असामान्य अक्टूबर वर्षा चिंता का विषय बन गई है। कृषि, फसल परिवहन, सड़क और बिजली ढांचे पर दबाव बढ़ा है। वहीं जलाशयों में बढ़ा जल स्तर भविष्य के लिए राहत भी दे सकता है। विशेषज्ञों का कहना है कि इस वर्ष मानसून की वापसी में कम से कम दो सप्ताह की देरी होगी।
मौसम विभाग ने अगले कुछ दिनों तक देश के अधिकांश हिस्सों में छिटपुट बारिश की संभावना जताई है।
एक दिन पहले 9 अक्टूबर को देश के अधिकांश हिस्सों में बारिश का असर स्पष्ट रहा है। पश्चिमोत्तर में यह बारिश असामान्य मानी जा रही है जबकि दक्षिण और पूर्वोत्तर राज्यों में यह मौसमी चक्र का हिस्सा है। फिलहाल देश को इस “लंबे मानसून” से राहत नहीं मिली है। कृषि, जल संसाधन और आपदा प्रबंधन एजेंसियों को अब इस स्थिति का सतत मूल्यांकन करते हुए बचाव कार्यों पर ध्यान देना होगा। प्रकाश कुमार पांडेय





