एलन मस्क और आंद्रेज़ कारपैथी के बयान पर विवाद: टेस्ला बनाम वेमो की ऑटोनॉमस ड्राइविंग जंग

Tesla vs Waymo autonomous driving battle

एलन मस्क और आंद्रेज़ कारपैथी के बयान पर विवाद: टेस्ला बनाम वेमो की ऑटोनॉमस ड्राइविंग जंग

टेस्ला के सीईओ एलन मस्क अपनी ही कंपनी के पूर्व आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) प्रमुख आंद्रेज़ कारपैथी के हालिया बयानों से खुश नहीं हैं। विवाद की जड़ तब सामने आई, जब कारपैथी ने टेस्ला की फुल सेल्फ-ड्राइविंग (FSD) तकनीक की तुलना गूगल की मूल कंपनी अल्फाबेट की वेमो (Waymo) ऑटोनॉमस ड्राइविंग सॉफ्टवेयर से की। इस तुलना ने एक बार फिर दुनिया भर में ऑटोनॉमस वाहनों की तकनीक, भविष्य और प्रतिस्पर्धा को लेकर बहस तेज कर दी है।

दरअसल, हाल ही में सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X (पूर्व में ट्विटर) पर एक यूजर युनचेन जिन ने आंद्रेज़ कारपैथी के साथ हुई बातचीत के कुछ अंश साझा किए। इस बातचीत में कारपैथी ने टेस्ला और वेमो—दोनों की ऑटोनॉमस ड्राइविंग तकनीकों की तारीफ की। उन्होंने कहा कि मौजूदा समय में दोनों सिस्टम ड्राइविंग का अनुभव इतना सहज और भरोसेमंद देते हैं कि यह लगभग “परफेक्ट ड्राइव” जैसा महसूस होता है। हालांकि, उन्होंने यह भी जोड़ा कि जैसे-जैसे इन तकनीकों का बड़े पैमाने पर विस्तार होगा, वैसे-वैसे दोनों के बीच अंतर और स्पष्ट होता जाएगा।

कारपैथी का पुराना नजरिया
आंद्रेज़ कारपैथी पहले भी टेस्ला और वेमो की तकनीकों पर अपनी राय रख चुके हैं। एक साल पहले उन्होंने कहा था,
“वेमो को हार्डवेयर की समस्या है, जबकि टेस्ला को सॉफ्टवेयर की समस्या।”
उनका तर्क था कि वेमो की प्रणाली अत्यधिक मॉड्यूलर है। यानी यह हाई-डेफिनिशन मैप्स, LiDAR, कई तरह के सेंसर, 5G नेटवर्क और अनेक न्यूरल नेटवर्क पर निर्भर करती है। जब तक सभी मॉड्यूल ठीक काम करते हैं, तब तक सिस्टम शानदार चलता है। लेकिन यदि इनमें से कोई एक हिस्सा भी फेल हो जाए, तो पूरी गाड़ी रुक सकती है।

युनचेन जिन ने इस बात को उदाहरण के साथ समझाया। उन्होंने बताया कि सैन फ्रांसिस्को में हुए एक पावर आउटेज के दौरान वेमो की कारें “ब्रिक मोड” में चली गईं—यानि सुरक्षित रूप से रुक गईं—क्योंकि ट्रैफिक लाइट्स बंद हो गई थीं और HD मैप्स वास्तविक स्थिति से मेल नहीं खा रहे थे। इसके अलावा, वेमो की कारों का रिमोट ऑपरेटर्स से कनेक्शन भी टूट गया था। इसके उलट, उसी स्थिति में टेस्ला का FSD सिस्टम चलता रहा।

टेस्ला का “एंड-टू-एंड” अप्रोच
कारपैथी और जिन के अनुसार, टेस्ला का FSD सिस्टम पूरी तरह एंड-टू-एंड न्यूरल नेटवर्क पर आधारित है। इसमें कैमरों से आने वाले पिक्सल डेटा को सीधे स्टीयरिंग, ब्रेकिंग और एक्सीलरेशन के फैसलों में बदला जाता है। यह दृष्टिकोण कारपैथी के “सॉफ्टवेयर 2.0” विचार पर आधारित है, जिसमें हर परिस्थिति के लिए मैनुअल कोड लिखने के बजाय अरबों किलोमीटर की मानवीय ड्राइविंग डेटा पर न्यूरल नेटवर्क को प्रशिक्षित किया जाता है। इस सिस्टम में असली “कोड” मॉडल के वेट्स होते हैं, जिससे गाड़ी इंसान की तरह ड्राइव करती है।

युनचेन जिन ने अपने पोस्ट में यहां तक कहा कि अब वेमो को एक बड़ी सॉफ्टवेयर समस्या का सामना करना पड़ सकता है। उनके अनुसार, वेमो का मॉड्यूलर ढांचा लंबे समय में स्केलिंग और डिपेंडेंसी का जाल बन सकता है, जबकि टेस्ला का FSD इस रेस में अंततः आगे निकल सकता है।

एलन मस्क की तीखी प्रतिक्रिया
हालांकि, आंद्रेज़ कारपैथी की हालिया टिप्पणियों पर एलन मस्क ने सीधा और कड़ा जवाब दिया। मस्क ने X पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि
“आंद्रेज़ की समझ अब पुरानी हो चुकी है।”
उन्होंने लिखा कि जब कारपैथी ने टेस्ला छोड़ा था, उसके बाद से टेस्ला का AI सॉफ्टवेयर काफी आगे बढ़ चुका है। मस्क के मुताबिक, आज टेस्ला के AI में प्रति गीगाबाइट “इंटेलिजेंस डेंसिटी” दुनिया की किसी भी अन्य प्रणाली से कम से कम दस गुना बेहतर है।

मस्क का यह बयान साफ संकेत देता है कि वे टेस्ला की मौजूदा तकनीकी प्रगति को कारपैथी की तुलना से कहीं आगे मानते हैं और नहीं चाहते कि पुरानी धारणाओं के आधार पर टेस्ला का मूल्यांकन किया जाए।

टेस्ला की हालिया प्रगति
हाल के महीनों में टेस्ला ने FSD वर्जन 14 रोल-आउट किया है, जिसे स्मूद नेविगेशन और बेहतर सुरक्षा फीचर्स के लिए काफी सराहा जा रहा है। इसके साथ ही कंपनी अपने रोबोटैक्सी फ्लीट के लिए ड्राइवरलेस टेस्टिंग की दिशा में भी तेजी से काम कर रही है। एलन मस्क पहले ही दावा कर चुके हैं कि भविष्य में टेस्ला की रोबोटैक्सी सेवा ट्रांसपोर्ट इंडस्ट्री को पूरी तरह बदल देगी।

वेमो और अन्य खिलाड़ी
दूसरी ओर, वेमो अभी भी अमेरिका में रोबोटैक्सी मार्केट का एक बड़ा और मजबूत खिलाड़ी है। कंपनी ने 2025 में 1.4 करोड़ पेड राइड्स का आंकड़ा छूने की जानकारी दी है। अल्फाबेट के स्वामित्व वाली यह कंपनी अब यूरोप में विस्तार की योजना बना रही है। वहीं, चीन की बैडू समर्थित अपोलो गो ने भी उबर और लिफ्ट के साथ साझेदारी में ब्रिटेन में प्रवेश की घोषणा की है टेस्ला बनाम वेमो की यह बहस केवल दो कंपनियों की तकनीक की तुलना नहीं है, बल्कि यह ऑटोनॉमस ड्राइविंग के भविष्य की दिशा को भी दर्शाती है। जहां एक ओर टेस्ला अपने एंड-टू-एंड AI मॉडल और डेटा-ड्रिवन अप्रोच पर भरोसा कर रही है, वहीं वेमो अपनी सुरक्षित और नियंत्रित मॉड्यूलर प्रणाली के दम पर आगे बढ़ रही है। आने वाले वर्षों में यही देखा जाएगा कि बड़े पैमाने पर संचालन, सुरक्षा और विश्वसनीयता के मामले में कौन-सी तकनीक बाजी मारती है।

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