Operation Sindoor: आतंकी कबूलनामे से बेनकाब हुई पाक सेना आतंक की सांठगांठ, दहशत में था पूरा पाकिस्तान

Operation Sindoor

भारत के खिलाफ झूठी जीत का शोर मचाने वाले Pakistan की असलियत अब उसके अपने आतंकियों ने ही दुनिया के सामने खोल दी है। जिस “कामयाबी” का ढोल पाकिस्तान पीट रहा था, उसी के बीच लश्कर-ए-तैयबा के आतंकियों के कबूलनामों ने इस्लामाबाद की कहानी को पूरी तरह ध्वस्त कर दिया है। ऑपरेशन सिंदूर के बाद सामने आए वीडियो और बयानों ने साफ कर दिया कि भारतीय कार्रवाई ने पाकिस्तान के आतंकी ढांचे और सैन्य प्रतिष्ठानों को गहरा नुकसान पहुंचाया था।

सबसे बड़ा खुलासा किया लश्कर-ए-तैयबा के टॉप कमांडर और मुरीदके मुख्यालय के केयरटेकर आतंकी हाफिज अब्दुल रऊफ ने। उसके बयान ने यह साबित कर दिया कि पाकिस्तान लंबे समय से आतंकियों को सिर्फ संरक्षण ही नहीं दे रहा, बल्कि राज्य स्तर पर उनका समर्थन भी करता रहा है।

रऊफ ने स्वीकार किया कि भारतीय हमलों में मारे गए आतंकियों के जनाजे में पाकिस्तानी सेना के बड़े अधिकारी, प्रशासनिक अफसर और राजनीतिक लोग शामिल हुए थे। उसके मुताबिक पाक सेना के कोर कमांडर, पंजाब के आईजी, चीफ सेक्रेटरी और सांसद तक जनाजे में मौजूद थे। यह बयान पाकिस्तान के उस झूठ को चकनाचूर कर देता है जिसमें वह आतंकवाद से खुद को अलग बताने की कोशिश करता रहा है।

आतंकी रऊफ ने कहा कि “यह किसी जमात का मसला नहीं, बल्कि पूरी रियासत का मामला था।” उसके इस बयान ने दुनिया के सामने साफ कर दिया कि पाकिस्तान में आतंकवाद केवल कुछ संगठनों की गतिविधि नहीं, बल्कि सत्ता और सेना की छत्रछाया में चलने वाला नेटवर्क है।

लश्कर के आतंकी सैफुल्लाह खालिद ने भी फैसलाबाद में आयोजित एक रैली के दौरान बड़ा कबूलनामा किया। उसने माना कि 8 मई 2025 को भारतीय सेना ने मुरीदके स्थित लश्कर मुख्यालय मरकज तय्यबा पर हमला किया था। आतंकी ने स्वीकार किया कि हमले के बाद वे “शवों के टुकड़े और चीथड़े इकट्ठा कर रहे थे।” यह बयान उस भारी तबाही की गवाही देता है जिसे पाकिस्तान लगातार छिपाने की कोशिश करता रहा।

विडंबना यह रही कि जिस रैली में आतंकियों के समर्थन में नारे लग रहे थे, वहीं मंच से खुद आतंकी भारत के हमले की विनाशकारी तस्वीर बयान कर रहे थे। इससे पाकिस्तान की दोहरी नीति भी उजागर हो गई—एक ओर दुनिया के सामने आतंकवाद विरोधी होने का दावा और दूसरी ओर आतंकियों को खुले मंच से समर्थन।

रऊफ ने अपने बयान में यह भी स्वीकार किया कि भारतीय ड्रोन हमलों ने पाकिस्तान की सुरक्षा व्यवस्था की पोल खोल दी थी। उसने कहा कि 8 मई को भारतीय ड्रोन इस्लामाबाद, लाहौर और पेशावर तक दिखाई दे रहे थे, लेकिन पाकिस्तान उन्हें रोक नहीं सका। यह कबूलनामा पाकिस्तान की एयर डिफेंस और वायुसेना की नाकामी को सीधे तौर पर उजागर करता है।

उसने आगे बताया कि 9 मई की रात पाकिस्तान के कई अहम एयरबेस भारतीय निशाने पर थे। इनमें Noor Khan Airbase, शोरकोट एयरबेस, रहीम यार खान एयरबेस और बहावलपुर के सैन्य ठिकाने शामिल थे। आतंकी के मुताबिक इन हमलों के बाद पाकिस्तानी सेना प्रमुख Asim Munir आयतें पढ़ने लगे और “बदर की दुआ” करवाई गई।

यह दावा दिखाता है कि भारतीय कार्रवाई के बाद पाकिस्तान की सत्ता और सेना में किस स्तर तक घबराहट फैल गई थी। जिस पाकिस्तान ने हमेशा खुद को सैन्य ताकत के रूप में पेश किया, वही भारत की रणनीतिक कार्रवाई के बाद दहशत में दिखाई दिया। ऑपरेशन सिंदूर से जुड़े इन कबूलनामों ने पाकिस्तान की उस छवि को गंभीर चोट पहुंचाई है, जिसे वह अंतरराष्ट्रीय मंचों पर बचाने की कोशिश करता रहा है। आतंकियों के बयानों ने यह साफ कर दिया है कि पाकिस्तान की जमीन पर आतंकी संगठन न केवल सक्रिय हैं, बल्कि उन्हें संस्थागत समर्थन भी हासिल है।

भारत लंबे समय से दुनिया को यह बताता रहा है कि पाकिस्तान आतंकवाद का सुरक्षित ठिकाना बन चुका है। अब पाकिस्तान के अपने आतंकियों के बयान ही इस सच्चाई पर मुहर लगा रहे हैं।

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