अमरीका -रूस के बीच तनाव चरम पर: ट्रम्प ने रूस के पास तैनात कीं न्यूक्लियर पनडुब्बियां…रूस बोला— हमारे निशाने पर हैं अमेरिका की न्यूक्लियर पनडुब्बियां

Tensions between America and Russia

अमरीका -रूस के बीच तनाव चरम पर: ट्रम्प ने रूस के पास तैनात कीं न्यूक्लियर पनडुब्बियां, दी गंभीर परिणाम भुगतने की चेतावनी

“शब्द बहुत कीमती होते हैं”: ट्रम्प की चेतावनी पर रूस ने ‘डेड हैंड’ की याद दिलाई, वैश्विक सुरक्षा पर मंडराया खतरा

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने रूस के साथ बढ़ते तनाव के बीच बड़ा कदम उठाते हुए दो न्यूक्लियर पनडुब्बियों को रूस की सीमाओं के पास तैनात करने का आदेश दे दिया है। इस फैसले की जानकारी खुद ट्रम्प ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘ट्रुथ सोशल’ पर साझा की, जिसमें उन्होंने रूस को अप्रत्यक्ष रूप से चेतावनी दी। ट्रम्प के इस बयान से अंतरराष्ट्रीय राजनीति में खलबली मच गई है। रूस और अमेरिका के बीच पहले से ही यूक्रेन युद्ध को लेकर तनाव की स्थिति बनी हुई है और अब पनडुब्बियों की तैनाती से इस संकट में और इजाफा हो गया है। हालांकि, अमेरिका की ओर से यह स्पष्ट नहीं किया गया है कि ये पनडुब्बियां रूस के किस इलाके के पास तैनात की गई हैं।

क्या है पूरा मामला?

दरअसल यह फैसला ऐसे समय पर लिया गया है जब रूस के पूर्व राष्ट्रपति दमित्री मेदवेदेव ने हाल ही में एक भड़काऊ बयान देते हुए अमेरिका को अप्रत्यक्ष रूप से धमकी दी थी। उन्होंने ‘डेड हैंड’ सिस्टम की बात उठाकर ट्रम्प प्रशासन को चेताया था। ‘डेड हैंड’ सोवियत काल का वह ऑटोमैटिक न्यूक्लियर रेस्पॉन्स सिस्टम था, जो देश की पूरी लीडरशिप के नष्ट हो जाने की स्थिति में भी अपने आप जवाबी हमला कर सकता था। हालांकि यह प्रणाली अब सक्रिय नहीं मानी जाती, लेकिन मेदवेदेव के इस बयान को अमेरिका ने सीधे चुनौती के रूप में लिया।

ट्रम्प की रणनीति और चेतावनी

डोनाल्ड ट्रम्प ने रूस को चेतावनी देते हुए कहा कि अगर वह यूक्रेन युद्ध खत्म करने के लिए शीघ्र कोई समझौता नहीं करता, तो अमेरिका ऐसे देशों पर ‘सेकेंडरी टैरिफ’ लगाएगा जो रूस के साथ व्यापार कर रहे हैं। इससे पहले उन्होंने भारत और रूस की अर्थव्यवस्थाओं को ‘डेड इकोनॉमी’ करार देते हुए कहा था कि “अगर ये दोनों देश खुद को गर्त में ले जा रहे हैं, तो मुझे क्या?” ट्रम्प ने स्कॉटलैंड यात्रा के दौरान सार्वजनिक तौर पर कहा था कि रूस के पास यूक्रेन युद्ध समाप्त करने के लिए सिर्फ 10 से 12 दिन का समय है। डोनाल्ड ट्रंप के इस इस अल्टीमेटम के बाद अब न्यूक्लियर पनडुब्बियों की तैनाती को शक्ति प्रदर्शन और दबाव की रणनीति के रूप में देखा जा रहा है।

रूस की प्रतिक्रिया

ट्रम्प की चेतावनी के जवाब में मेदवेदेव ने टेलीग्राम पर लिखा “अगर कुछ शब्द अमेरिका के ताकतवर राष्ट्रपति को घबरा सकते हैं, तो हम सही रास्ते पर हैं। ट्रम्प को ‘डेड हैंड’ की ताकत नहीं भूलनी चाहिए। यह टिप्पणी संकेत देती है कि रूस किसी भी सख्त कदम के लिए तैयार है। ट्रम्प की आक्रामक रणनीति को लेकर उसे कोई भय नहीं है। हालांकि ट्रम्प के इस बयान और कदम से यूरोप ही नहीं एशिया भर में चिंता की लहर दौड़ती नजर आ रही है। क्योंकि न्यूक्लियर पनडुब्बियों की तैनाती का अर्थ महज सैन्य नहीं, बल्कि राजनीतिक दबाव बनाना भी होता है। इस सबके पीछे दो उद्देश्य होते हैं। पहला तो यह कि एक तो दुश्मन को मनोवैज्ञानिक रूप से डराना, उसे विचलित करना और दूसरा किसी संभावित युद्ध के लिए तत्काल प्रतिक्रिया देने की स्थिति को बनाना है।

रूस बोला— हमारे निशाने पर हैं अमेरिका की न्यूक्लियर पनडुब्बियां

वहीं दूसरी ओर रूसी सांसद वोडोलात्सकी ने दावा किया और कहा कि जिन दो अमेरिकी न्यूक्लियर पनडुब्बियों को यहां भेजा गया है। वे बहुत पहले से ही रुसी मिसाइलों के निशाने पर हैं। अब तो जरुरत इस बात की है कि अमेरिका और रूस दोनों देशों के बीच एक ठोस समझौता हो। जिससे विश्व युद्ध-III जैसी चर्चा और आशंका बंद हों। पूरी दुनिया शांत हो सके।

विदेशी मामलों के जानकारों का मानना है कि यह कदम सिर्फ रूस ही नहीं, बल्कि चीन, भारत और अन्य वैश्विक शक्तियों को एक संदेश देने के लिए भी उठाया गया है कि अमेरिका अपनी वैश्विक भूमिका को लेकर गंभीर है।

भारत की स्थिति

ट्रम्प द्वारा भारत पर 25% टैरिफ लगाने की चेतावनी के बाद भारतीय विदेश मंत्रालय ने अभी तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं दी है। हालांकि ट्रंप की ओर से पहले एक अगस्त से टैरिफ लगाया जाना था, जिसकी डेडलाइन अब 7 अब अगस्त कर दी गई है। भारत फिलहाल रूस और अमेरिका दोनों से अच्छे संबंध बनाए रखने की कोशिश कर रहा है। दोनों देशों की गतिविधियों पर भारत की पैनी नजर है।

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