पांच राज्यों का महासंग्राम 2026: सियासी तापमान बढ़ा, कौन जीतेगा सत्ता की बाज़ी?
देश की राजनीति में इस समय सबसे बड़ा रण शुरू हो चुका है। पश्चिम बंगाल,तमिलनाडू, केरला, आसाम और Puducherry में विधानसभा चुनाव का एलान हो गया है। जिसने राजनीतिक माहौल को गर्म कर दिया है। इन पांच राज्यों के चुनाव न सिर्फ क्षेत्रीय राजनीति बल्कि राष्ट्रीय राजनीति की दिशा भी तय करने वाले माने जा रहे हैं। चुनावों की घोषणा के साथ ही राजनीतिक दलों ने अपनी रणनीति तेज कर दी है। आरोप-प्रत्यारोप, जनसभाएं, गठबंधन की कवायद और चुनावी वादों का दौर शुरू हो चुका है। हर राज्य में राजनीतिक समीकरण अलग हैं, इसलिए चुनावी मुकाबले भी अलग-अलग रंग में देखने को मिल सकते हैं।
एसआईआर के बाद पहली बड़ी परीक्षा
इस बार चुनाव कई मायनों में खास माने जा रहे हैं क्योंकि इन राज्यों में मतदान से पहले वोटर लिस्ट का विशेष गहन पुनरीक्षण यानी Special Intensive Revision (SIR) किया गया है। चुनाव आयोग की इस प्रक्रिया के बाद मतदाता सूची को अधिक सटीक और अद्यतन बनाने की कोशिश की गई है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि एसआईआर के बाद हुए पिछले चुनावों में कई जगहों पर नए वोटरों का असर देखने को मिला है। यही वजह है कि इस बार भी सभी दल नए मतदाताओं को अपने पक्ष में करने के लिए विशेष अभियान चला रहे हैं।
पश्चिम बंगाल: ममता की चुनौती, बीजेपी की उम्मीद
पूर्वी भारत का सबसे बड़ा राजनीतिक रण West Bengal में देखने को मिलेगा। राज्य की 294 सदस्यीय विधानसभा का मौजूदा कार्यकाल मई 2026 में समाप्त हो रहा है। पिछले चुनाव में Mamata Banerjee के नेतृत्व वाली तृणमूल कांग्रेस ने शानदार जीत हासिल की थी और लगातार तीसरी बार सत्ता में वापसी की थी। टीएमसी ने 2021 के चुनाव में 213 सीटें जीतकर विपक्ष को पीछे छोड़ दिया था, जबकि Bharatiya Janata Party 77 सीटों पर सिमट गई थी। अब 2026 के चुनाव में टीएमसी चौथी बार सत्ता में आने का सपना देख रही है। दूसरी ओर बीजेपी राज्य में बहुमत हासिल करने की पूरी कोशिश में है। कांग्रेस और वाम दल भी अपने खोए जनाधार को वापस पाने के लिए रणनीति बना रहे हैं। माना जा रहा है कि इस बार चुनाव में मुख्य मुकाबला टीएमसी और बीजेपी के बीच रहेगा।
तमिलनाडु: गठबंधनों की राजनीति का केंद्र
दक्षिण भारत की राजनीति का केंद्र माने जाने वाले Tamil Nadu में भी चुनावी हलचल तेज हो गई है। यहां की 234 सीटों वाली विधानसभा का कार्यकाल मई 2026 में समाप्त हो रहा है। पिछले चुनाव में M. K. Stalin के नेतृत्व वाली Dravida Munnetra Kazhagam ने शानदार जीत दर्ज की थी और राज्य की सत्ता पर काबिज हुई थी। डीएमके ने अकेले 133 सीटें जीतकर मजबूत सरकार बनाई थी। वहीं All India Anna Dravida Munnetra Kazhagam और बीजेपी गठबंधन को उम्मीद के मुताबिक सफलता नहीं मिल पाई थी। 2026 के चुनाव में डीएमके अपनी सत्ता बचाने की कोशिश करेगी, जबकि एआईएडीएमके और बीजेपी गठबंधन नए समीकरणों के साथ मैदान में उतर सकते हैं। तमिलनाडु में चुनाव अक्सर गठबंधन और स्टार प्रचारकों की वजह से दिलचस्प हो जाते हैं।
केरल: परंपरागत मुकाबला
राजनीतिक दृष्टि से बेहद जागरूक राज्य Kerala में चुनाव हमेशा दो प्रमुख गठबंधनों के बीच होता है। 2021 के चुनाव में वाम लोकतांत्रिक मोर्चा यानी एलडीएफ ने सत्ता बरकरार रखी थी। मुख्यमंत्री Pinarayi Vijayan के नेतृत्व में एलडीएफ ने 99 सीटों पर जीत दर्ज की थी। केरल में आमतौर पर हर चुनाव में सत्ता परिवर्तन देखने को मिलता था, लेकिन पिछली बार एलडीएफ ने यह परंपरा तोड़ दी थी। अब 2026 के चुनाव में कांग्रेस नेतृत्व वाला यूडीएफ सत्ता में वापसी की कोशिश करेगा, जबकि बीजेपी भी राज्य में अपनी पकड़ मजबूत करने का प्रयास कर रही है।
असम: क्षेत्रीय और राष्ट्रीय मुद्दों की टक्कर
पूर्वोत्तर के अहम राज्य Assam में भी चुनावी मुकाबला रोचक रहने वाला है। यहां 126 सीटों वाली विधानसभा का कार्यकाल मई 2026 में समाप्त हो रहा है। 2021 के चुनाव में बीजेपी के नेतृत्व वाले एनडीए गठबंधन ने 75 सीटें जीतकर सत्ता बरकरार रखी थी। राज्य के मुख्यमंत्री Himanta Biswa Sarma की नेतृत्व शैली और विकास एजेंडा इस चुनाव में अहम मुद्दा बन सकता है। दूसरी ओर कांग्रेस के नेतृत्व वाला महाजोत गठबंधन भी मजबूत चुनौती देने की तैयारी में है। असम में चुनाव अक्सर जातीय, क्षेत्रीय और पहचान से जुड़े मुद्दों के इर्द-गिर्द घूमते हैं।
पुदुचेरी: छोटा राज्य, बड़ा सियासी मुकाबला
दक्षिण भारत का छोटा लेकिन राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण केंद्र शासित प्रदेश Puducherry भी इस चुनावी चक्र का हिस्सा है। यहां की 30 सदस्यीय विधानसभा का कार्यकाल जून 2026 में समाप्त हो रहा है। पिछले चुनाव में N. Rangasamy की अगुवाई वाली All India N.R. Congress और बीजेपी गठबंधन ने सरकार बनाई थी। इस बार यहां त्रिकोणीय मुकाबले की संभावना जताई जा रही है, जिसमें क्षेत्रीय दलों के साथ कांग्रेस और बीजेपी भी अपनी ताकत आजमाएंगे।
चुनाव से तय होगा राजनीतिक संतुलन
राजनीतिक विश्लेषकों के मुताबिक इन पांच राज्यों के चुनावों का असर राष्ट्रीय राजनीति पर भी पड़ सकता है। इन राज्यों में जीत या हार से पार्टियों की रणनीति और नेतृत्व की ताकत का भी आकलन होगा। जैसे-जैसे चुनाव नजदीक आएंगे, वैसे-वैसे रैलियों, घोषणाओं और चुनावी वादों का दौर तेज होगा। फिलहाल इतना तय है कि 2026 का यह चुनावी महासंग्राम भारतीय राजनीति के लिए बेहद अहम साबित होने वाला है।




