बिहार विधानसभा चुनाव से पहले परेशानी में तेजस्वी…दरभंगा में दर्ज हुई FIR…जानें क्या हे पूरा मामला..महिला ने लगाया ये गंभीर आरोप

बिहार विधानसभा चुनाव से पहले परेशानी में तेजस्वी…दरभंगा में दर्ज हुई FIR…जानें क्या हे पूरा मामला..महिला ने लगाया ये गंभीर आरोप

दरभंगा, बिहार – राज्य की राजनीति में फिर से हलचल मच गई है। बिहार विधानसभा चुनाव से पहले तेजस्वी यादव द्वारा घोषित माई बहिन योजना अब विवादों में आ गई है। दरभंगा जिले के सिंहवाड़ा थाना क्षेत्र में इस योजना के नाम पर ठगी का आरोप लगाते हुए एक महिला ने प्राथमिकी दर्ज कराई है। इस एफआईआर में आरजेडी नेता और पूर्व डिप्टी सीएम तेजस्वी यादव, राज्यसभा सांसद संजय यादव, पूर्व विधायक ऋषि मिश्रा और कांग्रेस के पूर्व प्रत्याशी मस्कुर अहमद उस्मानी समेत चार नेताओं को आरोपी बनाया गया है।

दरभंगा में तेजस्वी यादव पर FIR दर्ज
महिला ने माई बहिन योजना में ठगी का लगाया आरोप

महिला ने लगाए गंभीर आरोप
वार्ड नंबर 7 की रहने वाली गुड़िया देवी नामक महिला ने एफआईआर दर्ज कराते हुए आरोप लगाया कि माई बहिन योजना का लाभ दिलाने के नाम पर उनसे और कई अन्य महिलाओं से 200 रुपये वसूले गए। योजना के तहत प्रत्येक महिला को 2500 रुपये की सहायता राशि देने का दावा किया गया था। महिला ने बताया कि न केवल पैसे लिए गए बल्कि महिलाओं का आधार कार्ड, बैंक खाता संख्या और मोबाइल नंबर भी मांगे गए, जिनका दुरुपयोग होने की आशंका है। थाना अध्यक्ष बसंत कुमार ने शिकायत मिलने की पुष्टि की और बताया कि प्राथमिकी दर्ज कर ली गई है। मामले की जांच पदाधिकारियों के निर्देश पर आगे बढ़ाई जाएगी।

किन नेताओं के खिलाफ मामला दर्ज?

एफआईआर में जिन नेताओं का नाम शामिल है, वे सभी महागठबंधन के प्रमुख चेहरे हैं। इनमें तेजस्वी यादव, नेता प्रतिपक्ष, बिहार विधानसभा संजय यादव, राज्यसभा सांसद ऋषि मिश्रा, पूर्व विधायक और राजद नेता मस्कुर अहमद उस्मानी, कांग्रेस के पूर्व प्रत्याशी इन सभी नेताओं पर एक साथ ठगी और संवेदनशील निजी जानकारी लेने का आरोप लगा है।

क्या है माई बहिन योजना?

माई बहिन योजना, तेजस्वी यादव द्वारा बिहार विधानसभा चुनाव 2025 से पहले महिलाओं के लिए घोषित एक कल्याणकारी योजना है। योजना का मकसद आर्थिक रूप से कमजोर महिलाओं को 2500 रुपये मासिक आर्थिक सहायता देना बताया गया। दावा किया गया कि यह योजना महिलाओं को आत्मनिर्भर और सशक्त बनाने का माध्यम बनेगी। ग्रामीण और पिछड़े तबकों की महिलाओं को मुख्य लाभार्थी के तौर पर लक्षित किया गया। योजना की घोषणा के बाद आरजेडी ने इसे चुनावी वादे के रूप में भी प्रचारित किया था।

राजनीतिक सरगर्मी तेज
इस मामले ने बिहार की राजनीति को गर्मा दिया है। जहां विपक्षी दल इसे जनता से ठगी और चुनावी छलावा बता रहे हैं, वहीं राजद समर्थकों का कहना है कि यह एक राजनीतिक षड्यंत्र है, ताकि चुनावी माहौल में तेजस्वी यादव की लोकप्रियता को कमजोर किया जा सके।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि चुनावी साल में इस तरह का विवाद न केवल नेताओं की छवि प्रभावित कर सकता है, बल्कि ग्रामीण क्षेत्रों में जनता का भरोसा भी डगमगा सकता है। पुलिस ने मामला दर्ज कर लिया है और अब जांच की प्रक्रिया शुरू होगी। जांच के दौरान यह तय होगा कि आरोप सही हैं या फिर यह केवल चुनावी रणनीति के तहत किया गया एक कदम है। कुल मिलाकर, दरभंगा की यह एफआईआर न केवल तेजस्वी यादव बल्कि पूरे महागठबंधन के लिए बड़ी चुनौती साबित हो सकती है। आने वाले दिनों में यह मामला बिहार की चुनावी राजनीति का मुख्य मुद्दा बनना तय है।

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