राष्ट्रीय जनता दल ने लालू प्रसाद यादव Lalu Prasad Yadav को एक बार फिर पार्टी का राष्ट्रीय अध्यक्ष चुन लिया है। पार्टी महासचिव अब्दुल बारी सिद्दी ने इस बात का ऐलान 22 जून को ही कर दिया था । इसके बाद 23 जून को लालू प्रसाद यादव ने अपना नामांकन भऱा और 24 जून को इसकी आधिकारिक घोषणा कर दी गई।
राष्ट्रीय अध्यक्ष के तौर पर लालू प्रसाद यादव को तेरहवीं बार निविरोध चुना गया है। लालू प्रसाद यादव Lalu Prasad Yadav के नाम का ऐलान करने के साथ सियासत में इस बात पर बहस छिड़ गई कि – क्या वजह है कि लालू ने पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष की कमान तेजस्वी यादव को नहीं दी। क्या इसके पीछे लालू प्रसाद यादव की कोई मजबूरी थी या पार्टी की कोई खास रणनीति ।
क्यों खड़े हो रहे हैं सवाल
राष्ट्रीय जनता दल की स्थापना 1997 में हुई थी। तब से लेकर आजतक लालू प्रसाद यादव इसके राष्ट्रीय अध्यक्ष के तौर पर काम कर रहे है। अब लालू की दूसरी पीढ़ी भी इसी पार्टी की हिस्सा है और परिवार के कई सारे सदस्य इसी पार्टी के बैनर तले अलग अलग संवैधानिक और राजनैतिक पदों पर बैठे है। लालू प्रसाद यादव का बेटा तेजस्वी यादव बिहार में नेता प्रतिपक्ष है। बड़े बेटे तेजप्रताप विधायक हैं। उनकी पत्नी राबड़ी देवी प्रदेश की मुखयमंत्री रहीं है और फिलहाल विधान परिषद है। उनकी बेटी मीसा भारती Misa Bharti आर जे डी से RJD सांसद हैं। ऐसे मे सवाल है कि लालू प्रसाद यादव अपने बेटे तेजस्वी को सीएम फेस प्रोजक्ट कर सकते हैं तो पार्टी का राष्ट्रीय अध्यक्ष क्यों नहीं।
क्या है पार्टी की रणनीति
तमाम स्वास्थ्यगत समस्याओं के चलते भी लालू प्रसाद यादव का फिर से आरजेडी RJD का राष्ट्रीय अध्यक्ष बनना पार्टी की जरूरत और रणनीति दोनों ही तौर पर भी देखा जा सकता है। राजनैतिक पंडितो की माने तो लालू प्रसाद यादव जैसी पकड़ और लोकप्रियता बिहार मे किसी और नेता की नहीं है। लालू प्रसाद यादव ने जब बिहार की सियासत में एंट्री करी तभी से बिहार में M और Y फेक्टर को जिस तरह से अब तक उन्होंने साधा है उसे बनाए रखना जरूरी होगा। लालू यादव ने बिहार की सियासत में ‘भूरा बाल साफ करो” जैसे नारों के साथ भी जनता को पार्टी से जोड़ने की कोशिश की है। ऐसे में जब साल के अंत में बिहार में विधानसभा चुनाव हैं ऐसे में पार्टी के इस कोर बैंक को लालू प्रसाद यादव के चेहरे के साथ ही साधा जा सकता है। चुनावों के ठीक पहले पार्टी किसी तरह के एक्सपेरिमेंट पर भरोसा नहीं जता रही। साथ ही विधानसभा के नतीजे पार्टी को महागठबंधन में भी मजबूत स्थिति में रखेंगे यही कारण है कि लालू प्रसाद यादव ने फिर पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष के तौर पर खुद के नाम का चयन किया।
क्या है मजबूरी
लालू प्रसाद यादव फिलहाल तेजस्वी यादव Tejashwi Yadav को पार्टी की कमान नहीं सौप पा रहे हैं। इसके पीछे कई सारी वजहें बताई जा रही हैं। लालू यादव के नाम के ऐलान के साथ ही बीजेपी ने तंज सका। बीजेपी प्रवक्ता अजय आलोक ने तंज कसा। अजय आलोक ने सोशल मीडिया प्लेटफार्म एक्स पर लिखा कि – पार्टी की कमांड अभी भी छोटे नवीं के सितारे को नहीं देना चाहते, क्योंकि डर है कि दारा शिकोह और औरंगजेब वाला किस्सा घर में न हो जाए।
बिहार की सियासत के सबसे बड़े और मजबूत परिवार के पिछले दिनों के घटनाक्रम पर नजर डालें तो परिवार की कलह खुलकर सामने आ गई । पिछले दिनों लालू ने अपने बड़े बेटे तेजप्रताप को छह साल के लिए पार्टी से बाहर का रास्ता दिखा दिया। इस बीत तेजप्रताप ने सोशल मीडिया पर बहुत कुछ पोस्ट किया जो सीधे सीधे तेजस्वी की तरफ इशारा कर रहे थे। सूत्र बताते हैं कि मीसा भारती के राजनैतिक महत्तावकांक्षां के चलते उनके और राबड़ी देवी के बीच कई झगड़े हुए। इसके अलावा अंदरखाने में ये भी खबरें है कि पार्टी के नेताओं का एक धड़ा तेजस्वी के साथ है तो एक धड़ा वो है जो तेजस्वी को पसंद नहीं करता वो मीसा भारती और तेजप्रताप को साथ दे रहा है। इस तरह की तमाम सारे घटनाक्रमों के चलते लालू प्रसाद यादव को परिवार में बगावत की आशंका है। लालू प्रसाद यादव को इस बात का शक है कि- कही परिवार न बिखर जाए और ऐसे हालात में पार्टी पर उनका वर्चस्व और पकड़ दोनों कमजोर होगी।





