महुआ से तेज प्रताप यादव और राघोपुर से तेजस्वी की होगी जीत या हार? पढ़िए वैशाली की 8 सीटों का ताजा हाल
बिहार विधानसभा चुनाव 2025 की मतगणना तेज गति से जारी है। 243 सीटों पर हो रहे इस चुनाव के नतीजे आज साफ हो जाएंगे। वैशाली जिले की हाजीपुर, लालगंज, वैशाली, महुआ, राजापाकड़, राघोपुर, महनार और पातेपुर—इन 8 सीटों पर ज़बरदस्त मुकाबला है और सभी की निगाहें दो हाई-प्रोफाइल चेहरों—तेजस्वी यादव और तेज प्रताप यादव—पर टिकी हैं।
महुआ सीट: तेज प्रताप यादव लगातार पीछे
महुआ इस चुनाव की सबसे चर्चित सीट रही है। राजद से निकाले जाने के बाद तेज प्रताप यादव ने अपनी नई पार्टी जनशक्ति जनता दल से मैदान संभाला, लेकिन शुरुआती राउंड से ही वह लगातार पीछे चल रहे हैं। हर राउंड में पिछड़ने का अंतर बढ़ता जा रहा है, जिससे उनकी हार की चर्चाएं तेज हो गई हैं।
राघोपुर सीट: तेजस्वी यादव पर खतरा बढ़ा
राघोपुर सीट पर तस्वीर उलटना शुरू हो गई है।
तीसरे राउंड में बीजेपी के सतीश कुमार ने तेजस्वी यादव को पीछे छोड़ दिया और 1273 वोट की बढ़त बना ली है। इससे पहले दूसरे राउंड में तेजस्वी यादव 916 वोट से आगे थे। मतों की तेजी से बदलती बढ़त ने मुकाबले को बेहद रोमांचक बना दिया है।
वैशाली की बाकी सीटों का माहौल
वैशाली जिले में कुल 8 सीटें हैं और इन सभी पर मतदान के बाद आज फैसला होना है।
हाजीपुर
लालगंज
वैशाली
महुआ
राजापाकड़
राघोपुर
महनार
पातेपुर
इनमें से कई सीटों पर एनडीए और महागठबंधन के बीच कांटे की टक्कर है, वहीं कुछ जगहों पर स्थानीय मजबूत प्रत्याशी दिलचस्प स्थिति बना रहे हैं।
चुनाव के नतीजे आज शाम तक आ जाऐंगे। इस चुनाव में एग्जिट पोल के बाद रुझानों में एनडीए की सरकार फिर से बन रही है। इसे लेकर अलग अलग अटकलें हैं। लेकिन एक बात तो यह है कि बिहार के ये चुनाव बिहार के सबसे बड़े सियासी घराने के लिए बड़े महत्तवपूर्ण है। क्योकि चुनावी नतीजों से ही तय होगा सियासी परिवार का राजनैतिक वारिस कौन है। हम बात कर रहे है राष्ट्रीय जनता दल के सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव के परिवार की। लालू परिवार में कौन होगा असली राजनैतिक गद्दी का हकदार यह आज चुनाव के नतीजे के बाद तय होगा।
तेजप्रताप की हार जीत ये तय होंगे समीकरण
बिहार चुनावों में तेजस्वी के लिए राघोपुर की हार जीत औऱ तेजप्रताप के लिए महुआ सीट पर सबकी नजर है। तेजस्वी अगर चुनाव जीत जाते हैं तो राघोपुर सीट लालू और राबड़ी का गढ़ है। ऐसे में चुनाव की जीत किसी बड़ी राजैनतिक जीत के तौर पर नहीं देखी जाएगी। इसके उलट अगर तेजप्रताप महुआ से अगर जीत जाते है तो ये लालू परिवार के लिए एक बड़ी चुनोती होगी। चुनौनी इस बात की होगी कि तेजप्रताप को अब चुनावी राजनीति में अपने पिता लालू प्रसाद यादव की जरूरत नहीं है । वो अपने दम पर चुनाव जीत सकते हैं। क्योंकि 2015 में तेजप्रताप महुआ से चुनाव लड़े थे, फिर 2020 में उनको हसनपुर सीट से टिकट दिया गया। ये माना गया कि हसनपुर सेफ सीट है । लेकिन अब पार्टी औऱ परिवार से बेदखल होने के बाद तेजप्रताप अपने दम पर महुआ से चुनाव लड़ रहे है। ऐसे में तेजप्रताप की जीत लालू परिवार के राजनैतिक वारिश तो तय करने में बड़ी भूमिका निभाएगी।
लालू परिवार का असली वारिस कौन
फिलहाल आरजेडी सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव है लेकिन बावजूद इसके कई सारे फैसले सिर्फ तेजस्वी ही ले रहे है। तेजस्वी यादव के आगे उनकी बहने भी कुछ नहीं बोलती। अगर देखा जाए तो मीसा भारती उस समय से राजनीति में है जब तेजस्वी बहुत छोटा था ऐसे में लालू की राजनैतिक विरासत पर मीसा का अधिकार होना चाहिए लेकिन ऐसा नहीं हुआ।
अब राजनैतिक वारिश कौन हो ये तय करेगी तेजस्वी और तेजप्रताप की चुनावी परफार्रमेंस ।
हांलाकि अभी पूरा परिवार तेजप्रताप से नाराज दिखाई दे रहा है क्योंकि माहौल चुनावी थी इसलिए तेजप्रताप को लेकर लालू प्रसाद यादव को कड़े फैसले करने पड़े । माना जा रहा है कि तेजप्रताप के लिए चुनाव के बाद का समय ऐसा नहीं रहेगा। राबडी देवी और Tej Pratap की बहने हमेशा उसके साथ है लेकिन चुनाव के चलते राजनैतिक दबाव में कोई सामने आकर साथ नही दे रहा। ऐसे हालात में अगर तेजप्रताप चुनाव जीतते हैं तो ये तेजस्वी के लिए सबसे बड़ा झटका होगा। साथ ही साथ तेजप्रताप की जीत पार्टी औऱ परिवार की राजनैतकि विरासत के पूरे के पूरे समीकरण भी बदल सकती है।





