तेज प्रताप की ‘पीली टोपी’ से सियासी तापमान गरम….बदल रहा है ‘लालू के लाल’ का अंदाज.. सपा कार्यालय पहुंचे, बोले- “ये एक ही गुलदस्ता सब बारी-बारी से दे रहा है…

बिहार की राजनीति एक बार फिर तेज हो गई है। इसके केंद्र में हैं आरजेडी प्रमुख लालू प्रसाद यादव के बड़े बेटे तेज प्रताप यादव। बुधवार 30 जुलाई को उन्होंने अचानक समाजवादी पार्टी के पटना स्थित पुनाईचक कार्यालय पहुंचकर सियासी हलकों में सरगर्मी बढ़ा दी है। जहां एक ओर राजद से बाहर किए जाने के बाद वे महुआ सीट से निर्दलीय लड़ने का एलान पहले ही कर चुके हैं, वहीं अब सपा से उनकी नज़दीकी के चलते नए सियासी समीकरण बनने की अटकलें तेज़ हो गई हैं।

हरी नहीं, अब पीली टोपी: बदल रहा है ‘लालू के लाल’ का अंदाज

राजद से निष्कासन के बाद तेज प्रताप ने न सिर्फ अपनी राजनीतिक रणनीति बदली है बल्कि अपनी पहचान में भी बदलाव किए हैं। अब वह हरी टोपी के बजाय पीली टोपी में दिखाई दे रहे हैं, जो आमतौर पर समाजवादी पार्टी से जुड़ी नहीं है, लेकिन इसके प्रतीक के रूप में चर्चा में है। पीली टोपी को तेज प्रताप के “नए राजनीतिक तेवर” का प्रतीक माना जा रहा है।

तेज प्रताप के बयानों से सियासी तीर

मुजफ्फरपुर में एक जनसभा के दौरान तेज प्रताप ने कहा था “कुछ जयचंदों को लगा कि दूसरा लालू यादव पैदा हो गया है, इसलिए मुझे पार्टी से बाहर किया गया। उन्होंने यह भी कहा कि उनके बोलने और पहनावे का अंदाज उनके पिता लालू यादव और मां राबड़ी देवी की देन है।
ऐसे बयान इस ओर इशारा करते हैं कि तेज प्रताप खुद को अब एक स्वतंत्र राजनीतिक धारा के रूप में स्थापित करने की कोशिश कर रहे हैं।

सपा कार्यालय पहुंचे, गुलदस्ते पर ली चुटकी

तेज प्रताप यादव जब सपा कार्यालय पहुंचे तो वहां मौजूद कार्यकर्ताओं ने उनका गर्मजोशी से स्वागत किया और गुलदस्ते भेंट किए। तेजप्रताप ने भी अपने चिरपरिचित मजाकिया अंदाज में माहौल को हल्का बनाया और कहा, “अरे भाई ये क्या हो रहा है…आप तो एक ही गुलदस्ता सब अलग अलग बारी-बारी से दे रहे हो। तेज प्रताप के इस अंदाज ने न वहां सिर्फ हंसी का माहौल बनाया बल्कि यह लालू यादव की शैली की भी याद भी दिला गया।

अखिलेश यादव से भी बातचीत और राजनीतिक संकेत

इससे पहले तेज प्रताप यादव की समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव से बातचीत हो चुकी है। खबरों के अनुसार, इस बातचीत के दौरान अखिलेश ने उनसे यह तक पूछ लिया कि “कहां से चुनाव लड़ना है?”। यह बयान राजनीतिक गलियारों में यह संकेत देने के लिए काफी है कि तेज प्रताप और सपा के बीच किसी संभावित संबंध या तालमेल की भूमिका बन रही है।

तेजस्वी के लिए बढ़ती चिंता?

तेज प्रताप ने न सिर्फ पार्टी से निकाले जाने का विरोध किया, बल्कि हाल ही में राजद नेता भाई वीरेंद्र के व्यवहार पर भी सवाल उठाए थे। सियासी जानकार मानते हैं कि तेज प्रताप यादव की नाराजगी और बढ़ती स्वतंत्र राजनीतिक गतिविधियां आरजेडी के लिए नई चुनौतियां खड़ी कर सकती हैं, खासकर जब बिहार विधानसभा चुनाव की तैयारियां जोरों पर हैं। तेज प्रताप यादव का सपा कार्यालय जाना सिर्फ एक “शिष्टाचार मुलाकात” नहीं, बल्कि बिहार की राजनीति में नए समीकरणों की दस्तक माना जा रहा है। क्या वह समाजवादी पार्टी से औपचारिक जुड़ाव करेंगे? या फिर नई पार्टी बनाएंगे? या निर्दलीय ही अपने सियासी भविष्य को संवारने की कोशिश करेंगे? इन सवालों का जवाब आने वाला वक्त देगा, लेकिन फिलहाल इतना तो तय है कि तेज प्रताप अब सियासत में ‘खामोश दर्शक’ नहीं, बल्कि ‘सक्रिय खिलाड़ी’ बनकर सामने आ चुके हैं। प्रकाश कुमार पांडेय

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