तमिल संस्कृति पूरे भारत की साझा विरासत: ‘एक भारत, श्रेष्ठ भारत’ की भावना को मजबूत करता है पोंगल — प्रधानमंत्री मोदी

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तमिल संस्कृति पूरे भारत की साझा विरासत: ‘एक भारत, श्रेष्ठ भारत’ की भावना को मजबूत करता है पोंगल — प्रधानमंत्री मोदी

नई दिल्ली, 14 जनवरी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने तमिल संस्कृति की समृद्ध परंपरा को रेखांकित करते हुए कहा है कि तमिल संस्कृति केवल तमिलनाडु तक सीमित नहीं है, बल्कि यह पूरे भारत की साझा सांस्कृतिक धरोहर है। उन्होंने कहा कि पोंगल जैसे पर्व ‘एक भारत, श्रेष्ठ भारत’ की भावना को और अधिक सशक्त बनाते हैं। प्रधानमंत्री बुधवार को राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में केंद्रीय मंत्री एल. मुरुगन के आवास पर आयोजित पोंगल उत्सव कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे।

प्रधानमंत्री मोदी ने अपने संबोधन में कहा कि तमिल संस्कृति भारत की प्राचीन और जीवंत संस्कृतियों में से एक है, जिसने न केवल देश को बल्कि पूरी मानवता को अपनी सांस्कृतिक विरासत से समृद्ध किया है। उन्होंने कहा, “तमिल संस्कृति केवल तमिलनाडु तक सीमित नहीं है, बल्कि यह पूरे भारत की साझा विरासत है। वास्तव में, यह पूरी मानवता की साझा धरोहर है। जब मैं ‘एक भारत, श्रेष्ठ भारत’ की भावना की बात करता हूं, तो पोंगल जैसे पर्व इस भावना को और अधिक मजबूत बना देते हैं।”

प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत की विविधता ही उसकी सबसे बड़ी ताकत है और अलग-अलग राज्यों के त्योहार, परंपराएं और संस्कृतियां मिलकर राष्ट्रीय एकता को मजबूती देती हैं। पोंगल जैसे पर्व न केवल क्षेत्रीय पहचान को सम्मान देते हैं, बल्कि पूरे देश को आपस में जोड़ने का काम भी करते हैं। प्रधानमंत्री मोदी ने पोंगल को एक वैश्विक पर्व बताते हुए कहा कि आज यह उत्सव पूरी दुनिया में मनाया जा रहा है। उन्होंने कहा कि जहां-जहां तमिल समुदाय रहता है, वहां पोंगल बड़े उत्साह और उल्लास के साथ मनाया जाता है। प्रधानमंत्री ने इस पर्व के उत्सव में शामिल होने को अपने लिए सौभाग्य की बात बताया।

उन्होंने कहा “आज पोंगल एक वैश्विक पर्व बन चुका है। दुनिया भर में तमिल समुदाय और तमिल संस्कृति से प्रेम करने वाले लोग इसे बड़े उत्साह के साथ मनाते हैं। मैं भी उनमें से एक हूं। आपके साथ इस विशेष पर्व को मनाना मेरे लिए गर्व और सौभाग्य की बात है।” प्रधानमंत्री ने पोंगल के सांस्कृतिक और सामाजिक महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि यह पर्व किसानों के परिश्रम और प्रकृति के प्रति कृतज्ञता को दर्शाता है। पोंगल धरती, सूर्य और प्रकृति के प्रति धन्यवाद ज्ञापन का प्रतीक है। यह त्योहार हमें यह भी सिखाता है कि प्रकृति, परिवार और समाज के बीच संतुलन बनाए रखना कितना आवश्यक है। उन्होंने कहा, “हमारे जीवन में पोंगल एक सुखद अनुभूति की तरह है। यह हमारे अन्नदाताओं यानी किसानों की मेहनत को दर्शाता है और धरती तथा सूर्य के प्रति कृतज्ञता प्रकट करता है। साथ ही यह पर्व हमें प्रकृति, परिवार और समाज के बीच संतुलन बनाए रखने का मार्ग भी दिखाता है।”

प्रधानमंत्री मोदी ने इस अवसर पर देश के विभिन्न हिस्सों में एक ही समय पर मनाए जा रहे अन्य पर्वों का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि इस समय देशभर में लोहड़ी, मकर संक्रांति, माघ बिहू जैसे कई त्योहार मनाए जा रहे हैं, जो भारत की सांस्कृतिक विविधता और एकता को दर्शाते हैं। प्रधानमंत्री ने कहा, “इस समय देश के अलग-अलग हिस्सों में लोहड़ी, मकर संक्रांति, माघ बिहू और कई अन्य पर्व बड़े उत्साह के साथ मनाए जा रहे हैं। मैं पोंगल और इन सभी त्योहारों के अवसर पर भारत और दुनिया भर में रहने वाले तमिल भाइयों और बहनों को हार्दिक शुभकामनाएं देता हूं।” प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत के त्योहार केवल उत्सव नहीं होते, बल्कि वे जीवन मूल्यों, सामाजिक समरसता और सांस्कृतिक चेतना को मजबूत करने का माध्यम भी होते हैं। इन पर्वों के जरिए पीढ़ी दर पीढ़ी परंपराएं आगे बढ़ती हैं और समाज में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।

पोंगल को तमिल समुदाय का सबसे प्रमुख पर्व माना जाता है। यह त्योहार प्रकृति, सूर्य, पशुधन और किसानों के प्रति आभार व्यक्त करने का प्रतीक है। परंपरागत रूप से पोंगल को पारिवारिक पर्व के रूप में मनाया जाता है, जिसमें समृद्धि, कृतज्ञता और आपसी सौहार्द का संदेश निहित होता है। इस पर्व के दौरान घरों में विशेष पकवान बनाए जाते हैं और लोग एक-दूसरे के साथ खुशियां साझा करते हैं। पोंगल उत्सव को सुचारु रूप से मनाने के लिए तमिलनाडु सरकार ने पहले ही एक विशेष पोंगल उपहार पैकेज की घोषणा की थी। इस पैकेज के तहत पात्र लाभार्थियों को एक किलो कच्चा चावल, एक किलो चीनी और एक पूरा गन्ना उपलब्ध कराया गया, ताकि हर परिवार उत्सव को खुशी और सम्मान के साथ मना सके। प्रधानमंत्री मोदी ने अपने संबोधन के माध्यम से यह संदेश दिया कि भारत की सांस्कृतिक विविधता ही उसकी असली पहचान है। तमिल संस्कृति जैसी प्राचीन और समृद्ध परंपराएं पूरे देश को जोड़ने का काम करती हैं। पोंगल जैसे पर्व न केवल क्षेत्रीय संस्कृति को सम्मान देते हैं, बल्कि ‘एक भारत, श्रेष्ठ भारत’ के संकल्प को भी सशक्त बनाते हैं। प्रधानमंत्री का यह संदेश देश की एकता, सांस्कृतिक समरसता और साझा विरासत को रेखांकित करता है, जो आज के समय में भारत की सबसे बड़ी शक्ति के रूप में उभरकर सामने आ रही है।

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