सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को केंद्र सरकार और NCERT, यानी नेशनल काउंसिल ऑफ़ एजुकेशनल रिसर्च एंड ट्रेनिंग को नोटिस जारी किया । कोर्ट ने इनसे जवाबदेही की मांग की। दरअसल NCERT की आठवी क्लास की सोशळ साइंस की किताब में ‘ज्यूडिशियरी में करप्शन’ पर एक सेक्शन था। सुप्रीम कोर्ट की आपत्ति के बाद ऑनलाइन बुक के इश चैप्टर को हटा दिया गया लेकिन इसके बावजूद कोर्ट ने सभी किताबों को वापस लेने और जांच करने की बात कही। कोर्ट ने NCERT की तरफ से दलील दे रहे सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता से सवाल करते हुए कहा, “हम और गहरी जांच चाहते हैं। हमें पता लगाना होगा कि कौन ज़िम्मेदार है… लोगों को सज़ा मिलनी चाहिए! हम केस बंद नहीं करेंगे।”
किताब की सभी कॉपी जब्त की जाए -कोर्ट
चीफ जस्टिस सूर्यकांत की अगुवाई वाली बेंच ने एक कड़े आदेश में भारत और विदेश में किताब पर बैन भी लगा दिया और सभी कॉपी ज़ब्त करने का आदेश दिया। कोर्ट ने किताब को पूरी या उसके कुछ हिस्सों में ऑनलाइन शेयर करने पर भी पूरी तरह से बैन लगा दिया और केंद्र और NCERT के चेयरमैन, प्रोफेसर दिनेश प्रसाद सकलानी को नोटिस जारी किए।
किसी संस्था को बदनाम करने की साजिश है
CJI ने इसे ज्यूडिशरी को बदनाम करने की सोची समझी साजिश बताया। उन्होंने कहा कि इसके तहत टीचर और स्टूडेंट के साथ साथ समाज को ये बताए कि ज्यूडिशरी में करप्शन है ।
चीफ जस्टिस ने गुस्से में कहा, ” “यह एक गहरी साज़िश लगती है। एक बहुत ही सोची-समझी चाल।”
NCERT की माफी को किया नामंजूर जांच होगी
सुप्रीम कोर्ट ने इस मसले पर संज्ञान लिया और NCERT की तरफ से मांगी गई माफी को खारिज कर दिया। कोर्ट ने NCERT के वकील तुषार मेहता की दलील जिसमें कहा गया कि
चीफ “गलत टेक्स्ट मटीरियल गलती से आ गया था”। इसमें, NCERT ने यह भी कहा कि उसे “इस फैसले की गलती पर पछतावा है” लेकिन कोर्ट ने इसे सिरे से खारिज कर दिया।
तुषार मेहता ने कोर्ट से कहा था कि 32 किताबें मार्केट में आई थीं लेकिन अब उन्हें वापस ले लिया गया है।