पहाड़ भी झुलसे: कश्मीर 10°C ऊपर, हिमाचल में टूटा रिकॉर्ड, उत्तर भारत में गर्मी का अलर्ट
उत्तर भारत में गर्मी ने इस बार समय से पहले दस्तक दे दी है—और हैरानी की बात यह है कि इसका असर मैदानी इलाकों से ज्यादा पहाड़ों पर दिख रहा है। India Meteorological Department (IMD) के ताजा आंकड़े संकेत दे रहे हैं कि जम्मू-कश्मीर और हिमाचल प्रदेश जैसे ठंडे राज्यों में तापमान सामान्य से कई डिग्री ऊपर पहुंच गया है। विशेषज्ञ इसे जलवायु परिवर्तन और सक्रिय वेस्टर्न डिस्टरबेंस की कमी से जोड़ रहे हैं।
कश्मीर में 8–10 डिग्री तक उछाल
श्रीनगर स्थित मौसम केंद्र की रिपोर्ट के अनुसार कश्मीर डिवीजन के कई हिस्सों में दिन का अधिकतम तापमान सामान्य से 9 से 10 डिग्री सेल्सियस अधिक दर्ज किया गया। जम्मू मंडल के कई इलाकों में भी तापमान 4 से 8 डिग्री सेल्सियस ऊपर रहा। मुजफ्फरबाद और मीरपुर में अधिकतम तापमान 28°C तक पहुंच गया—जो इस समय के औसत से काफी अधिक है। रात का न्यूनतम तापमान भी सामान्य से 2 से 4 डिग्री सेल्सियस ऊपर रिकॉर्ड हुआ। विशेषज्ञों का कहना है कि इतनी असामान्य बढ़ोतरी पहाड़ी क्षेत्रों के लिए चिंताजनक संकेत है, क्योंकि यहां की पारिस्थितिकी तंत्र तापमान में अचानक बदलाव के प्रति अधिक संवेदनशील होता है।
हिमाचल में भी टूटा संतुलन
क्यों बढ़ रही है गर्मी?
मौसम विभाग के अनुसार अगले कुछ दिनों में वेस्टर्न डिस्टरबेंस के सक्रिय होने की संभावना नहीं है। सामान्यतः ये पश्चिमी विक्षोभ हिमालयी क्षेत्रों में वर्षा और बर्फबारी लाते हैं, जिससे तापमान नियंत्रित रहता है। लेकिन इस बार इनकी अनुपस्थिति के कारण आसमान साफ है और दिन में धूप तेज हो रही है। परिणामस्वरूप तापमान में निरंतर वृद्धि हो रही है।
दिल्ली और उत्तर-पश्चिम भारत में अलर्ट
गर्मी का असर अब मैदानी इलाकों की ओर बढ़ रहा है। मौसम विभाग का अनुमान है कि दिल्ली और उत्तर-पश्चिम भारत के अधिकांश हिस्सों में अधिकतम तापमान अगले कुछ दिनों में 3 से 5 डिग्री सेल्सियस और बढ़ सकता है। राजधानी क्षेत्र में पहले से ही दिन के समय तेज धूप महसूस की जा रही है। यदि यही स्थिति बनी रही तो मार्च के शुरुआती सप्ताह में ही तापमान सामान्य से काफी ऊपर पहुंच सकता है।
जलवायु परिवर्तन की दस्तक
विशेषज्ञ मानते हैं कि इस तरह के असामान्य तापमान बदलाव जलवायु परिवर्तन के संकेत हैं। हिमालयी क्षेत्र को जलवायु परिवर्तन का “हॉटस्पॉट” माना जाता है, जहां तापमान वृद्धि वैश्विक औसत से अधिक तेजी से हो रही है। कम बर्फबारी और अधिक तापमान का सीधा असर पर्यटन, कृषि और जल आपूर्ति पर पड़ सकता है। सेब और अन्य पहाड़ी फसलों के उत्पादन चक्र पर भी इसका प्रभाव पड़ने की आशंका है।
यदि मार्च में भी वेस्टर्न डिस्टरबेंस सक्रिय नहीं हुआ, तो गर्मी का ग्राफ और ऊपर जा सकता है। मौसम वैज्ञानिकों ने सलाह दी है कि लोग दिन में धूप से बचें, पानी का पर्याप्त सेवन करें और पहाड़ी क्षेत्रों में जलस्रोतों के संरक्षण पर विशेष ध्यान दिया जाए। पहाड़ों का यह असामान्य रूप केवल एक मौसमी घटना नहीं, बल्कि बदलते जलवायु पैटर्न का संकेत हो सकता है। जब कश्मीर और हिमाचल जैसे ठंडे क्षेत्र भी 10 डिग्री तक तापमान वृद्धि दर्ज करने लगें, तो यह चेतावनी है कि मौसम के मिजाज में बड़ा बदलाव आ रहा है। उत्तर भारत के लिए यह समय सतर्क रहने का है—क्योंकि गर्मी अभी शुरुआत में है, और आने वाले हफ्तों में इसका असर और तेज हो सकता है।