शेयर बाजार में गुरुवार की भारी गिरावट के बाद शुक्रवार, 9 अक्टूबर को कारोबार की शुरुआत तेजी के साथ हुई। सेंसेक्स हरे निशान में 71,776.67 अंक पर खुला और शुरुआती कारोबार में सुबह 9 बजकर 41 मिनट पर 603.54 अंक यानी 0.84 प्रतिशत की बढ़त के साथ 72,196.78 अंक पर पहुंच गया। वहीं, निफ्टी ने 22,314.95 अंक पर कारोबार शुरू किया। बाजार खुलने के शुरुआती दौर में सेंसेक्स की 30 कंपनियों में से 24 के शेयरों में तेजी रही, जबकि 6 शेयर गिरावट के साथ कारोबार करते दिखे। खास बात यह रही कि अमेरिकी ग्रीन कार्ड कार्यक्रम को लेकर चिंता के बावजूद देश की प्रमुख आईटी कंपनियों के शेयरों में अच्छी खरीदारी देखने को मिली। TCS, Infosys, Wipro और HCL Tech जैसे बड़े शेयर बढ़त के साथ कारोबार कर रहे थे। इससे पिछले सत्र की गिरावट के बाद निवेशकों को कुछ राहत मिली।
गुरुवार की भारी बिकवाली के बाद शुक्रवार को सेंसेक्स और निफ्टी ने कैसे की कारोबार की शुरुआत?
शुक्रवार के शुरुआती कारोबार में बाजार का रुख पिछले दिन के मुकाबले बेहतर नजर आया। सेंसेक्स 71,776.67 अंक पर खुला और कुछ ही देर में इसमें मजबूत बढ़त दर्ज की गई। सुबह 9:41 बजे तक यह 72,196.78 अंक पर पहुंच गया था। इस दौरान सूचकांक में 603.54 अंक यानी 0.84 प्रतिशत की तेजी आई। दूसरी ओर, निफ्टी ने 22,314.95 अंक के स्तर से कारोबार की शुरुआत की। सेंसेक्स की 30 कंपनियों में से 24 के शेयरों में बढ़त और 6 में गिरावट दर्ज हुई। शुरुआती आंकड़ों से पता चला कि बाजार में खरीदारी का माहौल बना हुआ था। हालांकि, शुरुआती तेजी के आधार पर पूरे दिन के कारोबार का रुख तय नहीं माना जा सकता।
अमेरिकी ग्रीन कार्ड कार्यक्रम पर रोक के बावजूद TCS, Infosys और Wipro के शेयरों में क्यों आई तेजी?
अमेरिका की ओर से कई बड़ी टेक कंपनियों के लिए PERM लेबर सर्टिफिकेशन कार्यक्रम को रोकने के फैसले के बाद आईटी सेक्टर पर दबाव की आशंका जताई जा रही थी। इस कार्यक्रम के जरिए कंपनियां विदेशी कर्मचारियों के लिए स्थायी निवास यानी ग्रीन कार्ड की प्रक्रिया आगे बढ़ाती हैं। हालांकि, शुक्रवार को शुरुआती कारोबार में आईटी शेयरों में मजबूती देखने को मिली। TCS का शेयर 5.10 प्रतिशत चढ़कर 2,181 रुपये पर पहुंचा। Infosys में 3.23 प्रतिशत, Wipro में 2.84 प्रतिशत और HCL Tech में 1.30 प्रतिशत की बढ़त दर्ज हुई। Reuters के मुताबिक, TCS के तिमाही नतीजों और कारोबार से जुड़े सकारात्मक संकेतों ने भी आईटी शेयरों को सहारा दिया। हालांकि, शुरुआती तेजी को अमेरिकी फैसले के असर के पूरी तरह खत्म होने का संकेत नहीं माना जा सकता।
गुरुवार को सेंसेक्स 1,045 अंक टूटा था और निफ्टी 22,231 के स्तर पर बंद हुआ था
एक दिन पहले यानी 8 अक्टूबर को बाजार में भारी बिकवाली देखने को मिली थी। सेंसेक्स 72,668 अंक पर खुलने के बाद 1,045.46 अंक यानी 1.44 प्रतिशत गिरकर 71,593.24 पर बंद हुआ था। निफ्टी भी 371.25 अंक यानी 1.64 प्रतिशत टूटकर 22,231.80 पर आ गया था। कारोबार के दौरान निफ्टी 22,179 के आसपास पहुंच गया, जो अप्रैल 2025 के बाद का निचला स्तर था। इस गिरावट से निवेशकों की संपत्ति में करीब 11 लाख करोड़ रुपये की कमी आई थी। बाजार पर कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों, अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में उछाल, रुपये की कमजोरी और विदेशी निवेशकों की बिकवाली का दबाव रहा।
विदेशी निवेशकों ने ₹12,944 करोड़ के शेयर बेचे, जबकि घरेलू संस्थानों ने बाजार में लगाया पैसा
गुरुवार की गिरावट के दौरान विदेशी संस्थागत निवेशकों ने भारतीय शेयर बाजार से बड़ी रकम निकाली। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, 8 अक्टूबर को विदेशी निवेशकों ने करीब ₹12,944 करोड़ के शेयरों की शुद्ध बिकवाली की। इसके उलट घरेलू संस्थागत निवेशकों ने लगभग ₹10,703 करोड़ की शुद्ध खरीदारी की। घरेलू संस्थानों की खरीदारी ने विदेशी बिकवाली के असर को कुछ हद तक कम किया, लेकिन बाजार को गिरावट से बचाने के लिए यह पर्याप्त नहीं रही। इससे पहले भी विदेशी निवेशकों की लगातार बिकवाली बाजार के लिए चिंता का कारण बनी हुई थी।
बाजार में आगे तेजी टिकेगी या फिर लौटेगी गिरावट, निवेशकों की नजर इन संकेतों पर रहेगी
शुक्रवार की शुरुआती तेजी से बाजार में कुछ सुधार जरूर दिखाई दिया, लेकिन आगे की दिशा कई आर्थिक और वैश्विक संकेतों पर निर्भर करेगी। कच्चे तेल की कीमतें, अमेरिकी बॉन्ड यील्ड, रुपये की चाल, विदेशी निवेशकों की खरीद-बिक्री और कंपनियों के तिमाही नतीजे अहम रहेंगे। आईटी शेयरों में आई तेजी ने बाजार को सहारा दिया, लेकिन अमेरिकी ग्रीन कार्ड कार्यक्रम से जुड़ी अनिश्चितता पर भी नजर बनी रहेगी। निवेशकों के लिए जरूरी है कि वे केवल शुरुआती उछाल देखकर जल्दबाजी में फैसला न लें और निवेश से पहले अपनी जोखिम क्षमता तथा कंपनी के वित्तीय प्रदर्शन को समझें।