Share Market: शेयर बाजार में फिर मचा हाहाकार, एक दिन में निवेशकों के 7.52 लाख करोड़ डूबे; अब आम निवेशक क्या करें?

भारतीय शेयर बाजार में सोमवार, 28 सितंबर 2026 को भारी बिकवाली देखने को मिली। सप्ताह के पहले कारोबारी दिन सेंसेक्स 1,124.02 अंक यानी 1.52% गिरकर 72,771.72 पर बंद हुआ, जबकि निफ्टी 360.25 अंक यानी 1.56% टूटकर 22,780.25 पर पहुंच गया। दोनों प्रमुख सूचकांक करीब छह महीने के निचले स्तर पर बंद हुए। बाजार में आई इस गिरावट के बीच निवेशकों की संपत्ति में करीब 7.52 लाख करोड़ रुपये की कमी आई।

बाजार में इतनी बड़ी गिरावट क्यों आई?

सोमवार की गिरावट के पीछे कई अंतरराष्ट्रीय और घरेलू कारण एक साथ काम करते नजर आए। कच्चे तेल की बढ़ती कीमत, अमेरिका-ईरान के बीच तनाव, अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में तेजी और विदेशी निवेशकों की लगातार बिकवाली ने बाजार पर दबाव बढ़ाया। सोमवार को ब्रेंट क्रूड वायदा करीब 106.81 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गया था। महंगा तेल भारत के आयात बिल, रुपये और महंगाई को प्रभावित कर सकता है, इसलिए इसका असर शेयर बाजार की धारणा पर भी पड़ता है।

पहले भी देखे हैं बाजार में ऐसे झटके

भारतीय शेयर बाजार के इतिहास में इससे पहले भी कई बार बड़ी गिरावट देखने को मिली है। वैश्विक वित्तीय संकट, कोरोना महामारी और अलग-अलग आर्थिक एवं भू-राजनीतिक घटनाओं के दौरान शेयर बाजार में तेज गिरावट आई है। ऐसे समय में खासकर छोटे और नए निवेशकों के सामने जोखिम बढ़ जाता है। बाजार में नुकसान के कारण कुछ निवेशकों पर गंभीर आर्थिक दबाव भी पड़ा है। हालांकि किसी भी व्यक्तिगत घटना को केवल बाजार की गिरावट से जोड़कर देखना उचित नहीं है।

वैश्विक हालात का बाजार पर असर

इस समय बाजार पर वैश्विक परिस्थितियों का असर साफ दिखाई दे रहा है। अमेरिका और ईरान के बीच बढ़े तनाव से तेल आपूर्ति को लेकर चिंता बढ़ी है। दूसरी तरफ अमेरिकी 10 साल की बॉन्ड यील्ड 5.2% से ऊपर पहुंच गई है, जो लंबे समय के ऊंचे स्तरों में है। ऐसे माहौल में वैश्विक निवेशकों के लिए अमेरिकी बॉन्ड जैसे अपेक्षाकृत सुरक्षित साधन आकर्षक हो सकते हैं। इसके साथ ही विदेशी निवेशकों की भारतीय शेयरों में बिकवाली भी बाजार पर दबाव बढ़ा रही है।

आने वाले दिनों में कैसा रहेगा बाजार?

29 सितंबर को भी बाजार में कमजोरी जारी रही और शुरुआती कारोबार में सेंसेक्स तथा निफ्टी में 0.8% से ज्यादा की गिरावट दर्ज की गई। कच्चे तेल की कीमत, अमेरिकी बॉन्ड यील्ड, रुपये की चाल और पश्चिम एशिया के घटनाक्रम आने वाले दिनों में बाजार की दिशा के महत्वपूर्ण कारक रहेंगे। इसलिए बाजार में उतार-चढ़ाव जारी रहने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।

आम निवेशक पैसा लगाएं या इंतजार करें?

ऐसे समय में निवेशकों के लिए सबसे जरूरी बात अपनी जोखिम क्षमता और निवेश अवधि को ध्यान में रखना है। बाजार की तेज गिरावट देखकर घबराहट में शेयर बेचने या अचानक बड़ी रकम लगाने के बजाय अपने पोर्टफोलियो की समीक्षा करना जरूरी है। ज्यादा जोखिम वाले F&O और इंट्राडे कारोबार में बिना पर्याप्त जानकारी के पैसा लगाना नुकसान बढ़ा सकता है। लंबी अवधि के निवेशक बाजार की अस्थिरता को अलग नजरिए से देख सकते हैं, लेकिन किसी भी शेयर या म्यूचुअल फंड में निवेश से पहले उसके जोखिम और वित्तीय स्थिति को समझना जरूरी है। SIP जैसे नियमित निवेश विकल्पों में भी बाजार जोखिम बना रहता है; इसलिए निवेश का फैसला व्यक्ति की आर्थिक स्थिति और लक्ष्य के अनुसार होना चाहिए।

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