Stock Market Crash:अमेरिका से भारत तक निवेशकों में हड़कंप…एआई का डर बना वैश्विक गिरावट की वजह

Stock Market Crash

Stock Market Crash:अमेरिका से भारत तक निवेशकों में हड़कंप…एआई का डर बना वैश्विक गिरावट की वजह

वैश्विक शेयर बाजारों में शुक्रवार को जोरदार गिरावट दर्ज की गई। अमेरिका से शुरू हुई बिकवाली की आंच एशियाई बाजारों के रास्ते भारत तक पहुंची और निवेशकों की पूंजी पर बड़ा असर पड़ा। भारतीय बाजार में सेंसेक्स करीब 800 अंक टूट गया, जबकि निफ्टी 200 अंकों से अधिक फिसल गया। विशेषज्ञों का मानना है कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) को लेकर बढ़ती अनिश्चितता और इसके संभावित कारोबारी प्रभावों ने वैश्विक निवेशकों का भरोसा डगमगा दिया है।

भारतीय बाजार में भारी दबाव

कारोबार के दौरान सेंसेक्स 772.19 अंक या 0.92% गिरकर 82,902.73 पर पहुंच गया। वहीं निफ्टी 0.78% यानी 200.30 अंक टूटकर 25,606.90 के स्तर पर कारोबार करता दिखाई दिया। शुरुआती घंटों से ही बिकवाली का दबाव बना रहा और दिनभर बाजार संभल नहीं पाया। सबसे ज्यादा मार आईटी सेक्टर पर पड़ी। टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (TCS), इंफोसिस, एचसीएल टेक और टेक महिंद्रा जैसे दिग्गज शेयरों में 3% से 6% तक की गिरावट दर्ज की गई। आईटी कंपनियों को लेकर आशंका है कि नई एआई तकनीकों से पारंपरिक सॉफ्टवेयर सेवाओं की मांग प्रभावित हो सकती है, जिससे उनके मुनाफे पर दबाव बढ़ेगा। बीएसई के टॉप-30 शेयरों में से 24 लाल निशान में कारोबार करते नजर आए, जबकि केवल 6 शेयर मामूली बढ़त के साथ टिके रहे। इंफोसिस में लगभग 6% और टीसीएस में 5% से अधिक की गिरावट दर्ज की गई। एचसीएल टेक करीब 4% और टेक महिंद्रा लगभग 3% नीचे रहे।

बाजार की चौड़ाई भी कमजोर

व्यापक बाजार में भी गिरावट का असर साफ दिखा। बीएसई पर सूचीबद्ध 3,337 शेयरों में से 2,327 शेयर गिरावट में रहे, जबकि केवल 847 शेयरों में तेजी दर्ज की गई। 163 शेयरों में कोई बदलाव नहीं हुआ। 106 शेयर 52 सप्ताह के निचले स्तर पर पहुंच गए, जबकि 41 शेयर ही 52 सप्ताह के उच्च स्तर पर टिक पाए। लोअर सर्किट में फंसे 55 शेयर बाजार की घबराहट को दर्शाते हैं, जबकि 79 शेयरों में अपर सर्किट लगा। यह संकेत देता है कि निवेशकों के बीच अस्थिरता काफी अधिक है और छोटे व मझोले शेयरों में उतार-चढ़ाव तेज हो गया है।

अमेरिका में भी गहरी चोट

अमेरिकी शेयर बाजार में भी लगातार तीसरे दिन गिरावट दर्ज की गई। रिपोर्ट्स के मुताबिक, वहां की गिरावट से करीब एक ट्रिलियन डॉलर यानी लगभग 90 लाख करोड़ रुपये की बाजार पूंजी साफ हो गई। डॉऊ जोंस इंडेक्स 669.42 अंक या 1.34% गिरकर 49,451.98 पर बंद हुआ। नैसडैक में सबसे ज्यादा गिरावट रही, जो 469.32 अंक या 2.03% टूटकर 22,597.15 पर बंद हुआ। वहीं एसएंडपी 500 इंडेक्स 108.71 अंक या 1.57% गिरकर 6,832.76 पर बंद हुआ। नैसडैक में तेज गिरावट इस बात का संकेत है कि टेक्नोलॉजी शेयरों पर दबाव सबसे अधिक है। चूंकि एआई से जुड़ी कंपनियां और टेक सेक्टर अमेरिकी बाजार का बड़ा हिस्सा हैं, इसलिए निवेशकों की चिंता वहां ज्यादा देखने को मिल रही है।

एआई बना अस्थिरता का कारण

विश्लेषकों का कहना है कि हाल ही में लॉन्च हुए उन्नत एआई टूल्स और प्लेटफॉर्म ने पारंपरिक बिजनेस मॉडल को लेकर नई बहस छेड़ दी है। निवेशकों को डर है कि ऑटोमेशन और एआई के बढ़ते प्रभाव से कई क्षेत्रों—जैसे ट्रकिंग, लॉजिस्टिक्स, रियल एस्टेट और सॉफ्टवेयर सेवाएं—में मांग घट सकती है। यदि कंपनियों का लाभ घटता है तो उनके शेयरों की वैल्यूएशन पर दबाव आएगा। यही आशंका बिकवाली को हवा दे रही है। हालांकि कुछ विशेषज्ञ यह भी मानते हैं कि एआई लंबी अवधि में उत्पादकता बढ़ा सकता है, लेकिन अल्पकाल में बाजार अनिश्चितता को पसंद नहीं करता।

एशियाई बाजार भी दबाव में

अमेरिका की गिरावट का असर एशियाई बाजारों पर भी पड़ा। जापान, दक्षिण कोरिया और हांगकांग के बाजारों में भी कमजोरी देखने को मिली। विदेशी निवेशकों की बिकवाली से उभरते बाजारों में पूंजी का बहिर्गमन बढ़ा है, जिसका सीधा असर भारत जैसे देशों पर पड़ रहा है।

निवेशकों के लिए क्या संकेत?

बाजार विशेषज्ञों का कहना है कि घबराहट में फैसले लेने से बचना चाहिए। लंबी अवधि के निवेशकों के लिए गिरावट अवसर भी बन सकती है, बशर्ते वे मजबूत फंडामेंटल वाली कंपनियों का चयन करें। फिलहाल बाजार में उतार-चढ़ाव जारी रहने की संभावना है। जब तक एआई से जुड़ी आशंकाओं पर स्पष्टता नहीं आती और वैश्विक संकेत स्थिर नहीं होते, तब तक बाजार में अस्थिरता बनी रह सकती है।

 कुल मिलाकर, एआई को लेकर बढ़ती चिंता ने वैश्विक बाजारों में हलचल मचा दी है। अमेरिका में भारी गिरावट के बाद भारतीय बाजार भी दबाव में आ गया। आईटी सेक्टर सबसे ज्यादा प्रभावित हुआ है। आने वाले दिनों में निवेशकों की नजर वैश्विक संकेतों, कॉरपोरेट नतीजों और केंद्रीय बैंकों की नीतियों पर रहेगी। फिलहाल बाजार में सावधानी और धैर्य ही सबसे बड़ी रणनीति मानी जा रही है।

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